आईएएस की संपत्ति सार्वजनिक नहीं, जीएडी ने अपने पोर्टल से किया रिकॉर्ड गायब
VINAY VERMA | Apr 27, 2026, 13:28 IST
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छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं, जब सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की वेबसाइट पर अधिकारियों की संपत्ति का ब्योरा देने वाला पोर्टल 15 दिनों से बंद पड़ा है। इस दौरान, सरकार ने सभी अधिकारियों से संपत्ति विवरण जमा करने के आदेश दिए थे।
Raipur. छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ सरकार अधिकारियों से उनकी अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा मांग रही है, वहीं दूसरी तरफ उसी जानकारी को सार्वजनिक करने वाला पोर्टल आम लोगों के लिए बंद नजर आ रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की वेबसाइट पर मौजूद संपत्ति विवरण कॉलम बीते करीब 15 दिनों से नहीं खुल रहा। जैसे ही इस पर क्लिक किया जाता है, स्क्रीन पर 502 सर्वर एरर दिखाई देता है।
हैरानी की बात यह है कि उसी GAD की वेबसाइट के अन्य सभी सेक्शन सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। यानी समस्या सिर्फ उसी हिस्से में है, जहां अधिकारियों की संपत्ति का विवरण दिखना चाहिए। ऐसे में सवाल उठ रहा है, क्या यह महज तकनीकी खामी है या फिर जानबूझकर जानकारी छिपाई जा रही है?
राज्य सरकार ने हाल ही में सभी अधिकारी-कर्मचारियों के लिए अचल संपत्ति का वार्षिक विवरण देना अनिवार्य है। GAD ने अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव और विशेष सचिव स्तर तक के अधिकारियों को निर्देश हैं कि वे 31 जनवरी तक अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा जमा करें। यह निर्देश छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 19(1) के तहत है।
सरकार का दावा है कि यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए उठाया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट दिखाई दे रही है। जब आम नागरिक उस जानकारी को देखना चाहते हैं, तो पोर्टल ही जवाब देने से इंकार कर देता है।
जनवरी 2026 से सचिवालय सेवा के सभी अधिकारी-कर्मचारियों को अपनी संपत्ति का विवरण ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य है। इसके लिए एनआईसी द्वारा संचालित SPARROW पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। यह व्यवस्था कागजी प्रक्रिया खत्म कर डिजिटल पारदर्शिता लाने के नाम पर लागू की गई।
लेकिन अब यही डिजिटल सिस्टम सवालों के घेरे में है। अगर डेटा जमा हो रहा है, तो वह सार्वजनिक क्यों नहीं है? अगर पोर्टल बना है, तो वह काम क्यों नहीं कर रहा? और अगर यह सिर्फ तकनीकी समस्या है, तो उसे ठीक करने में 15 दिन क्यों लग रहे हैं?
तकनीकी भाषा में 502 सर्वर एरर का मतलब होता है कि एक सर्वर को दूसरे सर्वर से सही जवाब नहीं मिल रहा। आमतौर पर यह अस्थायी समस्या होती है, जो कुछ समय में ठीक हो जाती है। लेकिन यहां मामला अलग है। लगातार 15 दिनों तक एक ही सेक्शन में एरर आना संदेह को जन्म देता है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वेबसाइट के बाकी हिस्से ठीक से काम कर रहे हैं, तो यह समस्या सिर्फ एक सेक्शन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। ऐसे में यह आशंका और गहराती है कि कहीं यह “तकनीकी गड़बड़ी” के नाम पर जानकारी को रोका तो नहीं जा रहा।
सरकार पारदर्शिता की बात करती है, लेकिन जब बात आईएएस और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति की आती है, तो सिस्टम खुद ही फेल हो जाता है। यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था की नीयत पर सवाल खड़े करती है। अगर अधिकारी अपनी संपत्ति का विवरण दे रहे हैं, तो उसे सार्वजनिक करने में हिचक क्यों? क्या जनता को यह जानने का अधिकार नहीं कि उनके प्रशासनिक अधिकारी कितनी संपत्ति रखते हैं?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी कौन लेगा। क्या GAD इस सर्वर एरर को जल्द ठीक करेगा? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? फिलहाल स्थिति यही है किसरकार आदेश दे रही है, अधिकारी डेटा जमा कर रहे हैं, लेकिन जनता के लिए सच अब भी सर्वर एरर के पीछे छिपा हुआ है।
मामले में सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव अंवेषण धृतलहरे का कहना है कि IASअधिकारियों के संबंध में जानकारी केंद्र की वेबसाइट पर अपलोड होने लगी है। इसलिए राज्य के GADकी साइट से इसे हटा दिया गया है। इसलिए सर्वर एरर दिखा रहा होगा। जिसे जरुरत है वह DOPT की वेबसाइट पर जाकर देख सकता है।
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हैरानी की बात यह है कि उसी GAD की वेबसाइट के अन्य सभी सेक्शन सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। यानी समस्या सिर्फ उसी हिस्से में है, जहां अधिकारियों की संपत्ति का विवरण दिखना चाहिए। ऐसे में सवाल उठ रहा है, क्या यह महज तकनीकी खामी है या फिर जानबूझकर जानकारी छिपाई जा रही है?
आदेश सख्त, लेकिन जानकारी गायब
सरकार का दावा है कि यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए उठाया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट दिखाई दे रही है। जब आम नागरिक उस जानकारी को देखना चाहते हैं, तो पोर्टल ही जवाब देने से इंकार कर देता है।
ऑनलाइन व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
लेकिन अब यही डिजिटल सिस्टम सवालों के घेरे में है। अगर डेटा जमा हो रहा है, तो वह सार्वजनिक क्यों नहीं है? अगर पोर्टल बना है, तो वह काम क्यों नहीं कर रहा? और अगर यह सिर्फ तकनीकी समस्या है, तो उसे ठीक करने में 15 दिन क्यों लग रहे हैं?
502 एरर या सूचना पर पर्दा?
GAD
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वेबसाइट के बाकी हिस्से ठीक से काम कर रहे हैं, तो यह समस्या सिर्फ एक सेक्शन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। ऐसे में यह आशंका और गहराती है कि कहीं यह “तकनीकी गड़बड़ी” के नाम पर जानकारी को रोका तो नहीं जा रहा।
पारदर्शिता बनाम गोपनीयता
जवाबदेही किसकी?
जानकारी हटा दी गई है
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