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News In Short
- रायपुर में 23 जनवरी से लागू होने वाली पुलिस कमिश्नर प्रणाली की अधिसूचना फिर रोकी गई
- 21 जनवरी की कैबिनेट बैठक में पूरे रायपुर जिले में विस्तार पर फैसला संभव
- नवा रायपुर और माना एयरपोर्ट क्षेत्र को कमिश्नरी में शामिल करने की तैयारी
- 2007 बैच के आईपीएस रामगोपाल गर्ग पहले पुलिस कमिश्नर हो सकते हैं
- कमिश्नर प्रणाली से कानून व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही बढ़ाने का दावा
News In Detail
Raipur. रायपुर में 23 जनवरी से लागू होने जा रहे पुलिस कमिश्नर प्रणाली की अधिसूचना एक बार फिर से रोक दी गई है। कहा जा रहा है कि गृह विभाग और राजस्व विभाग की मंजूरी मिलने के बाद फिलहाल इसे रोक दिया गया है। समझा जा रहा है कि 21 जनवरी की कैबिनेट की होने वाली बैठक में रायपुर शहर ही नहीं बल्कि इसका विस्तार पूरे रायपुर जिले में करने का फैसला लिया जा सकता है।
नवा रायपुर और एयरपोर्ट तक कमिश्नरी:
अब तक केवल रायपुर शहर और बिरगांव निगम क्षेत्र के 22 पुलिस थानों को कमिश्नरी में शामिल करने और माना एयरपोर्ट से लेकर नया रायपुर इलाके के 11 पुलिस थानों के साथ देहात क्षेत्र को रायपुर रेंज में रखने की चर्चा थी, लेकिन इसे लेकर अफसरों के बीच ही एकमत नहीं बन पा रहे थे। अब कमिश्नर का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इसके बाद नवा रायपुर और एयरपोर्ट कमिश्नरी में शामिल हो जाएंगे। इससे प्रशासनिक उलझनें बच जाएंगी। कैबिनेट की मुहर के बाद संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।
रामगोपाल गर्ग हो सकते हैं पहले कमिश्नर:
गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार रायपुर के प्रथम पुलिस कमिश्नर के रूप में 2007 बैच के आईजी रामगोपाल गर्ग के नाम पर सहमति बनी है। गर्ग सीबीआई में कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच कर चुके हैं। उनके साथ ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर के रूप में एसएसपी लाल उमेद सिंह नियुक्ति भी लगभग तय मानी जा रही है। दोनों आईपीएस अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था बनाने में माहिर माने जाते हैं।
ओएसडी करेंगे सेटअप व्यवस्था:
गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार आईजी स्तर के अधिकारी को ओएसडी (विशेष कार्य अधिकारी) नियुक्त किया जाएगा, जो कार्यालय सेटअप, स्टाफ, फर्नीचर समेत अन्य व्यवस्था करेगा। पुलिस कमिश्नरी लागू होने से शहर में कानून व्यवस्था की निगरानी में सुधार होने के साथ ही पुलिस की जवाबदेही भी बढ़ेगी। पुलिस कमिश्नर प्रणाली का उद्देश्य अपराध नियंत्रण और तत्काल फैसले लेने की क्षमता देना है।
राजधानी रायपुर में लागू होने वाला कमिश्नर प्रणाली मध्यप्रदेश, ओडिशा, उत्तरप्रदेश की तुलना में सीमित अधिकारों वाला होगा। कमिश्नर को जिला बदर, शस्त्र एवं बार लाइसेंस जैसे अहम अधिकार नहीं दिए जाएंगे। चर्चा है कि आईपीएस लॉबी के दबाव के कारण पुलिस कमिश्नर को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के अधिकार दिए जाएंगे, जिससे धरना-प्रदर्शन जैसी परिस्थितियों में पुलिस तत्काल कार्रवाई कर सकेगी।
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