कमिश्नरी के दायरे में नहीं आएगा नवा रायपुर और एयरपोर्ट, पुलिस आयुक्त के अंडर शहर एसपी से भी कम इलाका

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम की शुरुवात होने जा रही है। 23 जनवरी से शुरु होने वाली इस नई पुलिस व्यवस्था का जो खाका खींचा गया है उसमें बड़ी प्रशासनिक उलझन सामने आ रही है। पुलिस कमिश्नर का दायरा थोड़ा सीमित कर दिया गया है।

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Arun Tiwari
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News in Short :

. 23 जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम
. कमिश्नर सिस्टम में प्रशासनिक उलझन
. कमिश्नर के दायरे में सिर्फ रायपुर शहर
. एयरपोर्ट और नवा रायपुर नहीं आएगा कमिश्नरी के दायरे में
. शहर एसपी के बराबर होगा पुलिस कमिश्नर का इलाका

News in Detail :

कमिश्नरी या एसपीगिरी :

छत्तीसगढ़ की पुलिसिंग में नया सिस्टम लागू होने वाला है। राजधानी रायपुर में 23 जनवरी से पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ अब उन प्रदेशों की कतार में शामिल होने जा रहा है जहां पर पुलिस कमिश्नर सिस्टम काम कर रहा है। सरकार और पुलिस मुख्यालय इसको लागू करने की तैयारी कर रहे हैं।

कौन होगा पुलिस कमिश्नर, कैसे चलेगा सिस्टम इन सब बातों पर चर्चा की जा रही है। सरकार ने जो खाका खींचा है उसमें बड़ी प्रशासनिक उलझन सामने आ रही है। यह उलझन कमिश्रनरेट के एरिया को लेकर है। 

ऐसे समझिए पुलिस कमिश्नर सिस्टम की उलझन : 

रायपुर के पंडरी के आगे का पुराना विधानसभा थाना, माना, नवा रायपुर, अभनपुर जैसे बाहरी इलाके इससे अलग होंगे। यानी पुलिस कमिश्नर का कार्यक्षेत्र सिटी एसपी से भी कम हो गया। नवा रायपुर और एयरपोर्ट जैसे मोस्ट वीवीआईपी क्षेत्र पुलिस कमिश्नर के दायरे में नहीं आएंगे। यह ग्रामीण एसपी के इलाके में आएंगे।

माना एयरपोर्ट पर कोई वीवीआईपी आएगा तो ग्रामीण एसपी उसे रिसीव करेंगे और वीआईपी रोड पर आने के बाद फिर पुलिस कमिश्नर।  रायपुर से मंत्रालय और विधानसभा जाने वाले मंत्रियों के लिए अब डबल पायलेटिंग की व्यवस्था करनी होगी। माना थाना से पहले तक रायपुर पुलिस कमिश्नर अपनी गाड़ी लगाएंगे और माना के आगे रायपुर ग्रामीण एसपी की व्यवस्था रहेगी।

 गृह विभाग भी इस असलियत को जानता है कि शहरों के आउटर इलाकों में ही सबसे अधिक अपराध होते हैं और आउटर ही अपराधियों के ठौर-ठिकानों के लिए सबसे सुरक्षित जगह मानी जाती है। यही इलाके पुलिस कमिश्नर के दायरे में नहीं होंगे।

कमिश्नर से पहले ओएसडी : 

एक दो दिन में पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति कर दी जाएगी। हालांकि, अभी उनका पदनाम ओएसडी होगा। ठीक उसी तरह जैसे नए जिले बनते हैं तो कलेक्टर, एसपी को पहले ओएसडी बनाकर भेजा जाता है। ताकि, वे तैयारी करा लें। फिर जिस दिन से जिला बनता है, उस रोज उन्हें कलेक्टर, एसपी नियुक्त कर दिया जाता है।

यही प्रक्रिया मुख्य सचिव बनने के दौरान होती है। उसी तरह रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में भी ओएसडी की नियुक्ति होने वाली है। पुलिस कमिश्नर का जिम्मा आईजी स्तर के अधिकारी को मिलेगा। दूसरे नंबर का पद ज्वाइंट कमिश्नर का होता है। इस पर डीआईजी लेवल के अधिकारी की पोस्टिंग की जाएगी। 

कौन होगा पहला पुलिस कमिश्नर : 

पुलिस कमिश्नर या छत्तीसगढ के पहले पुलिस कमिश्नर के लिए दो नाम चर्चा में हैं। इसके लिए दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग और बिलासपुर आईजी संजीव शुक्ला का नाम प्रमुख तौर पर चर्चा में है। रामगोपाल साफ-सुथरी छबि के आईपीएस हैं। सीबीआई में सात साल डेपुटेशन पर रह चुके हैं। नियम-कायदे, कानून के जानकार भी हैं। संजीव शुक्ला की छबि भी अच्छी है।

वे रायपुर के एसपी रह चुके हैं और छत्तीसगढ़ पुलिस की दृष्टि से काफी अनुभवी हैं। लोकल होने की वजह से उनके अपने कंटेक्ट हैं। उनके माइनस प्वाइंट है कि अगले साल जनवरी में रिटायरमेंट है। यानी पोस्टिंग के बाद सिर्फ 11 महीने बचेगा। रामगोपाल गर्ग रायपुर के लिए नए होंगे।

रामगोपाल अगर पुलिस कमिश्नर बनते हैं तो रायपुर को समझने वाले डीआईजी को ज्वाइंट कमिश्नर बनाया जा सकता है। वो या तो अजातशत्रु हो सकते हैं या फिर शशिमोहन सिंह। या रजनेश सिंह या विजय अग्रवाल। बहरहाल कौन क्या बनेगा इसकी पर्ची अभी नहीं खुली है इसलिए अनुमान ही लगाया जा रहा है। 

अब आगे क्या : 

दुर्ग या बिलासपुर में से कोई आईजी अगर पुलिस कमिश्नर बना तो फिर वहां नए आईजी की नियुक्ति करनी होगी। इसके लिए जल्द ही आईपीएस की एक लिस्ट निकलेगी। सबसे अधिक उत्सुकता रायपुर रेंज को लेकर है। पुलिस कमिश्नर बनने के बाद अमरेश मिश्रा आईजी बने रहेंगे। सिर्फ शहर के 21 थाना उनके कार्यक्षेत्र से कम हो जाएंगे। शंकर नगर स्थित रायपुर आईजी ऑफिस भी यथावत रहेगा और उनकी कुर्सी भी। रायपुर एसएसपी लाल उम्मेद सिंह को तो 22 जनवरी को विदाई के बाद उन्हें अच्छी पोस्टिंग मिलने की चर्चा है। 

Important Points : 

.अपराधों को नियंत्रित करने के लिए लागू होता है कमिश्नर सिस्टम
.कमिश्नर के पास धारा 144 लागू करने, धारा 188 के तहत कार्रवाई करने, गन लाइसेंस, आबकारी से संबंधित कार्रवाई और जिला बदर जैसे अधिकार
.रायपुर, छत्तीसगढ़ का पहला शहर जहां पर पुलिस कमिश्नर सिस्टम
.रायपुर के बाद दुर्ग और बिलासपुर में कमिश्नर सिस्टम पर होगा विचार

Sootr knowledge :

पुलिस कमिश्नर सिस्टम (Police Commissioner system) खास तौर पर महानगरों और बड़े शहरों के लिए बनाया गया है। यहां अपराध और कानून-व्यवस्था की चुनौतियां ज्यादा जटिल होती हैं। यहां का प्रमुख अधिकारी पुलिस कमिश्नर होता है। शहर के आकार और महत्व के अनुसार, पुलिस कमिश्नर का रैंक अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक या महानिरीक्षक के समकक्ष होता है।

CP के पास वे अधिकार होते हैं जो सुपरिटेंडेंट सिस्टम में DM के पास होते हैं, जैसे- धारा 144 लागू करना, कर्फ्यू लगाना, हथियार लाइसेंस जारी/रद्द करना, भीड़ और कानून-व्यवस्था पर सीधे आदेश देना। यहां पुलिस को सीधे कार्यकारी अधिकार दिए जाते हैं। जब पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रियल पावर भी मिल जाती है, तो उस कमिश्नरेट सिस्टम कहा जाता है।

निष्कर्ष : 

नया पुलिस सिस्टम अपराधों को कम करने और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए लागू किया जा रहा है। सवाल यह नहीं है कि पुलिस कमिश्नर को सरकार कौन-कौन सा अधिकार देगी। फिलहाल, सवाल यह है कि जब आधे से कम जिले में कमिश्नर सिस्टम लागू होगा तो रिजल्ट की अपेक्षा क्यों और कैसे की जाएगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने पुलिस में रिफार्म का बड़ा प्रयास किया है। लेकिन इसमें इलाके को लेकर जो कसर रह गई है उसे दूर करना चाहिए। 

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