राजनांदगांव में नाबालिग से पुलिसिया बर्बरता, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
Aishwarya Dwivedi | May 31, 2026, 15:04 IST
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राजनांदगांव में स्वास्थ्य केंद्र ने मासिक धर्म से पीड़ित 14 साल की बच्ची को गलत रिपोर्ट में गर्भवती बता दिया, जिसके बाद पुलिस ने उसे रातभर थाने में रखकर प्रताड़ित किया।
NEWS IN SHORT
- स्वास्थ्य केंद्र ने मासिक धर्म पीड़ित बच्ची को गलत गर्भवती बताया।
- सोमनी थाना पुलिस ने नाबालिग को रातभर प्रताड़ित किया।
- जिला अस्पताल की दोबारा जांच में प्रेग्नेंसी रिपोर्ट निगेटिव आई।
- राजनांदगांव कलेक्टर ने दो उच्च स्तरीय जांच कमेटियां बनाईं।
- थाना प्रभारी लाइन हाजिर और दोषी डॉक्टर को हटाया गया।
NEWS IN DETAIL
इस संवेदनशील मामले को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। सुशासन तिहार के दौरान सामने आई इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए राजनांदगांव कलेक्टर जीतेंद्र यादव ने दो अलग-अलग उच्च स्तरीय जांच कमेटियों का गठन कर दिया है।
स्वास्थ्य केंद्र की गलत रिपोर्ट और पुलिस का जुल्म
आरोप है कि महिला आरक्षक ने पूछताछ के नाम पर बच्ची से शर्मनाक सवाल किए, उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की, तथा उसका गला दबाने की कोशिश भी की। इस प्रताड़ना के कारण बच्ची गहरे सदमे में है। अगले दिन जब जिला अस्पताल में दोबारा जांच कराई गई, तो प्रेग्नेंसी टेस्ट निगेटिव आया, जिसने पूरे सिस्टम की कलई खोलकर रख दी।
कलेक्टर ने गठित की दो जांच कमेटियां
1. प्रशासनिक जांच कमेटी : अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (ADM) सीएल मार्कण्डेय, ज्वाइंट कलेक्टर शीतल बंसल, एसडीएम गौतमचंद पाटिल और सीएसपी अलेक्जेंडर किरो की अगुआई में यह टीम थाने के सीसीटीवी फुटेज और स्टाफ के बयानों की जांच करेगी।
2. मेडिकल जांच कमेटी : मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) नेतराम नवरतन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और पैथोलॉजिस्ट की यह टीम प्रेग्नेंसी टेस्ट में हुई गंभीर चूक की जांच करेगी।
थाना प्रभारी और डॉक्टर पर गिरी गाज
निष्कर्ष
FAQ
- क्या पुलिस किसी नाबालिग को रातभर थाने में रख सकती है?
बिल्कुल नहीं। कानूनन किसी भी नाबालिग को रात में थाने में रखना या लॉकअप में बंद करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। - पुलिस विभाग में 'लाइन हाजिर' करने का क्या अर्थ है?
इसका मतलब है अधिकारी को मौजूदा थाने से हटाकर पुलिस मुख्यालय (लाइन) भेजना, ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें। - मामले की जांच के लिए दो अलग कमेटियां क्यों बनीं?
एक कमेटी पुलिस की बर्बरता (प्रशासनिक जांच) की और दूसरी कमेटी डॉक्टर की गलत रिपोर्ट (मेडिकल जांच) की जांच करेगी। - दोष सिद्ध होने पर आरोपी पुलिस और डॉक्टर को क्या सजा हो सकती है?
उन्हें नौकरी से सस्पेंड (निलंबित) किया जा सकता है, विभागीय कार्रवाई होगी और जेल भी हो सकती है।
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