राजनांदगांव राजकीय खजाने का 11 साल से ऑडिट नहीं, सालाना 200 करोड़ की आय, राजपरिवार बोला- संयुक्त रूप से हो रही लूटपाट
VINAY VERMA | Oct 16, 2026, 15:57 IST
राजनांदगांव राज परिवार की संपत्ति का हिसाब
राजनांदगांव रियासत की संपत्ति से हर साल करीब 200 करोड़ रुपए का कारोबार होने का दावा है। लेकिन इस खजाने का हिसाब-किताब कहां है? पिछले 11 साल से ऑडिट नहीं होने के आरोप ने पूरे न्यास की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रीमती सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा न्यास के वित्तीय लेनदेन को लेकर शिकायत संभागीय कमिश्नर तक पहुंच गई है।
एक्टिविस्ट क्रिस्टोफर पॉल ने न्यास के जिम्मेदार अधिकारियों और सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। वहीं राजपरिवार के वंशजों ने आरोप लगाया है कि उनकी पैतृक संपत्ति को ट्रस्ट के अधीन करके अब उसका इस्तेमाल मनमाने तरीके से किया जा रहा है। उनका दावा है कि राजकीय खजाने की लूट में कई लोग संयुक्त रूप से शामिल हैं।
न्यास की संपत्ति और उसके वित्तीय लेनदेन को लेकर सबसे बड़ा सवाल ऑडिट का है। शिकायत में दावा किया गया है कि वर्ष 2015 से न्यास का नियमित ऑडिट नहीं कराया गया। यानी इतने लंबे समय में संपत्ति से कितनी कमाई हुई, कितना पैसा खर्च हुआ और कितना खजाने में बचा, इसका पूरा हिसाब सार्वजनिक रूप से सामने नहीं है। राजगामी संपदा न्यास में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायत पहले भी उठ चुकी है। सितंबर में कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई थी। अब ऑडिट और वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर मामला संभागीय कमिश्नर तक पहुंच गया है।
राजपरिवार के वंशजों का आरोप है कि न्यास की संपत्ति से होने वाली आय का इस्तेमाल स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे कामों के लिए होना चाहिए। लेकिन इसके बजाय अनुदान, खेल गतिविधियों और सौंदर्यीकरण पर खर्च किया जा रहा है। उनका कहना है कि सालाना करीब 200 करोड़ यानि 11 साल में 2200 करोड़ रुपए के कारोबार वाले इस खजाने पर अधिकारियों और न्यास से जुड़े लोगों की नजर है। खर्चों के नियमों का पालन नहीं करके रकम का बंदरबांट किया जा रहा है। भुगतान की मंजूरी और खर्चों का पूरा ब्यौरा सामने नहीं आने से संदेह बढ़ रहा है।
न्यास के वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर सूचना के अधिकार के तहत भी जानकारी मांगी गई थी। वैष्णव समाज के पूर्व महामंडलेश्वर कृष्ण कुमार वैष्णव ने ऑडिट रिपोर्ट और बैलेंस शीट मांगी। लेकिन जनसूचना अधिकारी ने रिपोर्ट उपलब्ध कराने के बजाय ऑडिट प्रतिवेदन अप्राप्त होना बताया। इसके बाद उन्होंने वित्तीय अनियमितता और राजकीय खजाने के गबन की आशंका जताई। सवाल यह है कि अगर संपत्ति का कारोबार इतने बड़े स्तर पर हो रहा है तो उसकी आमदनी और खर्च का हिसाब कहां दर्ज है? ऑडिट रिपोर्ट नहीं मिलने का कारण क्या है? और अब तक जिम्मेदार लोगों से जवाब क्यों नहीं मांगा गया?
शिकायत में न्यास के बायलॉज का हवाला देते हुए कहा गया है कि हर वित्तीय वर्ष का बजट साल शुरू होने से कम से कम दो महीने पहले शासन की मंजूरी के लिए भेजना जरूरी है। इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा। शिकायतकर्ता ने न्यास के जिम्मेदार अधिकारियों और सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब यह देखना होगा कि कमिश्नर इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं और क्या न्यास का पूरा वित्तीय रिकॉर्ड जांच के लिए सामने लाया जाता है।
राजनांद गांव स्टेट रियासत की शुरुआत राजा किशुनदास से शुरु होती है। इनके दो बेटे थे जिनका नाम बजरंग दास और तुलसी दास था। क्योंकि बजरंग दास बड़े बेटे थे तो सत्ता उन्हीें के हाथों में आई। जिसके जिसके बाद उनके बेटे बलराम दास राजनांदगांव रियासत के राजा बनें। सूर्यमुखी देवी इन्हीं की पत्नी थी। जिनके नाम पर ट्रस्ट का नामकरण हुआ है। इनके पोते और राजा सर्वेश्वर दास के बेटे दिग्विजय दास रियासत के अंतिम राजा बने। उनके निधन के बाद 25 जनवरी 1989 को राजपरिवार का समाप्त घोषित कर पूरी संपत्ति को ट्रस्ट के हवाले कर दिया गया।
तुलसी दास के वंशज खेम नारायण वैष्णव का आरोप है कि बड़े राजा के बाद संपत्ति का अधिकार दूसरे बेटे या उसके वंशजों को मिलना चाहिए था। लेकिन सरकार ने ट्रस्ट बनाकर पैतृक संपत्ति अपने नियंत्रण में ले ली। उनका कहना है कि अब न्यास की समिति के माध्यम से संपत्ति का इस्तेमाल किया जा रहा है और इसमें लूटपाट हो रही है। परिवार इस मामले में शिकायत करने की तैयारी कर रहा है।
राजगामी संपदा न्यास के मामले में अब तीन सवालों के जवाब जरूरी हैं। पहला, वर्ष 2015 से अब तक ऑडिट क्यों नहीं हुआ? दूसरा, संपत्ति से होने वाली आमदनी और खर्च का पूरा ब्यौरा कहां है? तीसरा, बजट मंजूरी और भुगतान के नियमों का पालन किसने किया और किसने नहीं? इन सवालों के जवाब के लिए न्यास की संपत्तियों, बैंक खातों, किराया वसूली, अनुदान और भुगतान की स्वतंत्र जांच जरूरी है। जब तक पूरा रिकॉर्ड सामने नहीं आता, तब तक राजकीय खजाने की कथित लूट के आरोप और संपत्ति के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे सवाल बने रहेंगे।
11 साल से हिसाब कहां?
200 करोड़ के कारोबार पर सवाल
RTI में भी नहीं मिला हिसाब
बजट मंजूरी के नियम भी कटघरे में
राजनांदगांव रियासत की वंशावली
राजपरिवार बोला- पैतृक संपत्ति पर कब्जा
अब जांच से ही खुलेगा खजाने का राज
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