MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ओपन कैटेगरी में आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों का भी हक, मेरिट बनेगी आधार

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 16, 2026, 15:51 IST
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ओपन कैटेगरी में किसे मिलेगी जगह? एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने समझाया पूरा नियम
ओपन कैटेगरी में किसे मिलेगी जगह? एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने समझाया पूरा नियम

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर सिंगल बेंच ने आरक्षण और मेरिट पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि ओपन कैटेगरी सामान्य वर्ग का कोई आरक्षित कोटा नहीं है। यह मेरिट आधारित पूल है। जिसमें सभी वर्गों के पात्र अभ्यर्थी शामिल हो सकते हैं। यह फैसला पुलिस भर्ती परीक्षा 2013 से जुड़ी याचिका पर आया है।

पुलिस भर्ती परीक्षा 2013 में क्या हुआ था?

MP पुलिस भर्ती 2013 व्यापम ने कराई थी, जिसे अब कर्मचारी चयन बोर्ड (ESB) के नाम से जाना जाता है। इस भर्ती के तहत सब-इंस्पेक्टर, सूबेदार और प्लाटून कमांडर के पदों पर नियुक्तियां होनी थीं। रेखा जाट ने भी OBC वर्ग की अभ्यर्थी के तौर पर इस भर्ती में हिस्सा लिया था।

कट-ऑफ का गणित: 144 बनाम 147

रेखा जाट को 200 में से 144 अंक मिले थे। चयन सूची जारी हुई, तो ओबीसी महिला वर्ग का कट-ऑफ 147 अंक था, जबकि अनारक्षित महिला वर्ग का कट-ऑफ 144 अंक रहा। यानी रेखा के अंक अनारक्षित महिला वर्ग के कट-ऑफ के बराबर थे।

विभाग ने क्यों किया चयन से बाहर

रेखा जाट के अंक अनारक्षित महिला वर्ग में आखिरी बार चयनित हुई अभ्यर्थी के बराबर थे। इसके बावजूद विभाग ने हॉरिजेंटल और कम्पार्टमेंट आरक्षण (आरक्षण लागू करने के तरीके) का हवाला देते हुए उन्हें सिर्फ ओबीसी महिला वर्ग तक सीमित रखा। इस वर्ग में कट-ऑफ ज्यादा होने के कारण उनका चयन नहीं हो सका।

रेखा जाट ने विभाग के 18 मार्च 2015 के आदेश को चुनौती दी थी। इसके लिए उन्होंने एडवोकेट ऋषिकेश बोहरे के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। अब हाईकोर्ट ने उनकी याचिका मंजूर कर ली है।

ओपन कैटेगरी सभी के लिए खुली

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अगर आरक्षित वर्ग के किसी उम्मीदवार के अंक अनारक्षित वर्ग में चयनित उम्मीदवार के बराबर या उससे ज्यादा हैं, तो उसे ओपन कैटेगरी में सीट मिलनी चाहिए। इसमें ओबीसी, एससी (अनुसूचित जाति) और एसटी (अनुसूचित जनजाति) तीनों वर्गों के उम्मीदवार शामिल हैं।

इस फैसले को आरक्षण और मेरिट के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। मेरिट और आरक्षण को लेकर चल रही बहस के बीच कोर्ट ने साफ किया कि मेरिट के आधार पर चयनित आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार भी ओपन कैटेगरी में सीट पाने के हकदार हैं। हालांकि, इस पूरे मामले की शुरुआत एक पुराने सर्कुलर से हुई थी।

सामान्य प्रशासन विभाग का सर्कुलर

कोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के 7 नवंबर 2000 के सर्कुलर का हवाला दिया। इसके मुताबिक, अगर आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार बिना उम्र या किसी दूसरी छूट का फायदा लिए सामान्य वर्ग के कट-ऑफ के बराबर अंक हासिल करता है, तो उसे ओपन मेरिट में जगह पाने से नहीं रोका जा सकता।

सरकार भी ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता ने किसी तरह की छूट का फायदा लिया था।

90 दिन में नियुक्ति पर विचार

जस्टिस आनंद सिंह बहरावत ने याचिका स्वीकार कर ली। उन्होंने रेखा जाट के चयन पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है। अगर वे पात्र पाई जाती हैं, तो 90 दिनों के भीतर उनकी नियुक्ति का आदेश जारी करना होगा।

तो क्या उनकी नियुक्ति पक्की है? नहीं, पहले उनकी पात्रता की जांच होगी। अगर वे पात्र पाई जाती हैं, तभी नियुक्ति का आदेश जारी होगा।

ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला: सरकार, PSC, ESB और उम्मीदवार सब असमंजस में | High Court's Decision on OBC Reservation: Government, PSC, ESB, and Candidates in Confusion
ओबीसी आरक्षण फैसले के बाद कई सवाल, सरकार से लेकर PSC और ESB, उम्मीदवार सबमें असमंजस
11 Oct 2026 ,
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