100 एकड़ का उद्योग परिसर अब बनेगा बिजनेस हब, 100 करोड़ खर्च के बाद निजी हाथों में देने की तैयारी
Arun Tiwari | Oct 02, 2026, 13:47 IST
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उद्योग एवं व्यापार परिसर बनेगा बिजनेस हब
राजधानी के नया रायपुर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उद्योग एवं व्यापार परिसर यानी राज्योत्सव स्थल के बड़े हिस्से को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है। यानी इसे पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। 100 एकड़ में फैले इस परिसर को निजी निवेशकों के जरिए विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) ने निजी निवेशकों से प्रस्ताव मांगे हैं। योजना के तहत परिसर में कन्वेंशन सेंटर, होटल, व्यावसायिक गतिविधियों और अन्य सुविधाओं का विकास किया जाना प्रस्तावित है। राज्योत्सव स्थल में पहले से विकसित बुनियादी ढांचे और उपलब्ध जमीन को देखते हुए शासन इसे व्यावसायिक एवं औद्योगिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करना चाहता है।
प्रस्तावित योजना के मुताबिक यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, फूड फेस्टिवल और अन्य बड़े आयोजनों के लिए सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। सरकार इस पर 100 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है उसके बाद भी उसे एक पैसे की आमदनी नही हो रही। यही वजह है कि इसे निजी हाथों में सौंपा जा रहा है।
राज्योत्सव स्थल में करीब 4000 लोगों की क्षमता वाला अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर पहले से मौजूद है। इसके अलावा परिसर में करीब 150 कमरों वाला फाइव स्टार होटल विकसित करने का प्रस्ताव भी योजना का हिस्सा है। निजी निवेश के माध्यम से इन सुविधाओं का बेहतर संचालन और विस्तार करने की तैयारी है। अधिकारियों के मुताबिक पीपीपी मॉडल के तहत विकसित होने के बाद परिसर में व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए अतिरिक्त कमरे, होटल-रेस्टोरेंट और अन्य सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे बड़े आयोजनों और राष्ट्रीय स्तर के व्यापार मेलों के आयोजन की संभावना भी बढ़ेगी।
राज्योत्सव स्थल के विकास पर अब तक करीब 100 करोड़ रूपए खर्च किए जा चुके हैं। जानकारी के मुताबिक परिसर के विकास और वहां अधोसंरचना तैयार करने पर पिछले वर्षों में लगातार राशि खर्च हुई है। इनमें पार्किंग, पेवर, सड़क, नालियां, पाइपलाइन, विद्युत कार्य और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण पर भी खर्च किया गया है।
अब शासन का तर्क है कि इतने बड़े परिसर के नियमित रखरखाव और संचालन के लिए स्थायी उपयोग जरूरी है। फिलहाल यहां राज्योत्सव के अलावा सालभर बड़े आयोजन सीमित संख्या में होते हैं। ऐसे में परिसर का व्यावसायिक उपयोग बढ़ाने और निजी निवेश आकर्षित करने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।
सीएसआईडीसी की ओर से पहले राज्योत्सव स्थल के करीब एक-तिहाई हिस्से को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर लीज पर देने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। हालांकि अब करीब 100 एकड़ में फैले पूरे परिसर को एक व्यापक योजना के तहत विकसित करने की दिशा में प्रस्ताव सामने आया है। सीएसआईडीसी ने निजी निवेशकों से रुचि के प्रस्ताव मांगे हैं। निगम के मुताबिक परियोजना का उद्देश्य नया रायपुर में उपलब्ध इस बड़े परिसर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करना है। निजी निवेश के माध्यम से यहां रोजगार के नए अवसर पैदा होने और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है।
पीपीपी मॉडल पर विकास के बाद राज्योत्सव स्थल का इस्तेमाल राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों, फूड फेस्टिवल और अन्य बड़े आयोजनों के लिए किया जा सकेगा। परियोजना में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और पूंजी का उपयोग करने की योजना है, जबकि सरकारी जमीन और मौजूदा अधोसंरचना का इस्तेमाल किया जाएगा। सीएसआईडीसी के अधिकारियों के अनुसार निजी निवेशकों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
परियोजना में निवेश, संचालन और विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रस्तावों का परीक्षण किया जाएगा। इस पूरी कवायद का उद्देश्य राज्योत्सव स्थल को केवल वार्षिक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय सालभर उपयोग में आने वाले व्यावसायिक और कन्वेंशन हब के रूप में विकसित करना है। इससे परिसर की मौजूदा सुविधाओं का अधिक प्रभावी इस्तेमाल हो सकेगा और रखरखाव पर होने वाले खर्च का बोझ भी कम करने की कोशिश की जाएगी।
प्रस्तावित योजना के मुताबिक यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, फूड फेस्टिवल और अन्य बड़े आयोजनों के लिए सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। सरकार इस पर 100 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है उसके बाद भी उसे एक पैसे की आमदनी नही हो रही। यही वजह है कि इसे निजी हाथों में सौंपा जा रहा है।
4000 सीट का कन्वेंशन सेंटर :
अब तक करीब 100 करोड़ रूपए खर्च :
अब शासन का तर्क है कि इतने बड़े परिसर के नियमित रखरखाव और संचालन के लिए स्थायी उपयोग जरूरी है। फिलहाल यहां राज्योत्सव के अलावा सालभर बड़े आयोजन सीमित संख्या में होते हैं। ऐसे में परिसर का व्यावसायिक उपयोग बढ़ाने और निजी निवेश आकर्षित करने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।
पहले एक-तिहाई हिस्से को लीज पर देने का प्रस्ताव :
व्यापारिक आयोजनों का बन सकता है बड़ा केंद्र :
परियोजना में निवेश, संचालन और विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रस्तावों का परीक्षण किया जाएगा। इस पूरी कवायद का उद्देश्य राज्योत्सव स्थल को केवल वार्षिक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय सालभर उपयोग में आने वाले व्यावसायिक और कन्वेंशन हब के रूप में विकसित करना है। इससे परिसर की मौजूदा सुविधाओं का अधिक प्रभावी इस्तेमाल हो सकेगा और रखरखाव पर होने वाले खर्च का बोझ भी कम करने की कोशिश की जाएगी।
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