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NEWS IN SHORT
- नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी 2026 में केस में याचिका CJM कोर्ट ने स्वीकार कर ली है।
- कांग्रेस की याचिका स्वीकार, पहली सुनवाई 20 जनवरी को होगी।
- टेंडर से पहले काम शुरू होने और खर्चों में गड़बड़ी के आरोप।
- अस्थायी टॉयलेट, टेंट और अन्य व्यवस्थाओं में करोड़ों का खर्च।
- आयोजन स्थगन के बाद अब पूरे मामले की न्यायिक जांच तय।
NEWS IN DETAIL
कोर्ट में पहुंचा जंबूरी भ्रष्टाचार मामला
छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी 2026 को लेकर उठे भ्रष्टाचार के आरोप अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गए हैं। कांग्रेस की ओर से दायर शिकायत याचिका को CJM कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने मामले की पहली सुनवाई के लिए 20 जनवरी 2026 की तारीख तय की है।
याचिका स्वीकार होने के बाद आयोजन से जुड़े खर्च, टेंडर प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों की न्यायिक समीक्षा की जाएगी।
टेंडर से पहले काम, खर्चों पर गंभीर सवाल
बालोद जिले के ग्राम दुधली में प्रस्तावित जंबूरी आयोजन में टेंडर 5 जनवरी 2026 को खोले गए, लेकिन आरोप है कि संबंधित फर्म ने दिसंबर 2025 से ही काम शुरू कर दिया था। टेंट, टॉयलेट, मंच और अन्य ढांचे पहले से खड़े किए जा चुके थे।
रायपुर की फर्म अमर भारत किराया भंडार को ठेका दिया गया, जिसके संचालक को सत्ताधारी दल के एक प्रभावशाली नेता का करीबी बताया जा रहा है। इससे टेंडर प्रक्रिया को केवल औपचारिकता बताए जाने के आरोप लगे हैं।
अस्थायी टॉयलेट पर करोड़ों का खर्च
टेंडर दस्तावेजों में एक अस्थायी टॉयलेट की दर 22 हजार रुपए तय की गई थी। 400 टॉयलेट पर ही करीब 88 लाख रुपए खर्च दिखाया गया। वीआईपी और वीवीआईपी टॉयलेट, यूरिनल और वॉशरूम मिलाकर कुल खर्च 2 करोड़ रुपए से अधिक बताया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी राशि में स्थायी आरसीसी टॉयलेट बनाए जा सकते थे।
आयोजन स्थगन से बढ़ा विवाद
विवाद सामने आने के बाद भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने जंबूरी आयोजन स्थगित करने की घोषणा की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 10 करोड़ रुपए सीधे जिला शिक्षा अधिकारी, बालोद के खाते में ट्रांसफर किए गए, जो नियमों के खिलाफ है।
Sootr Knowledge
- राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी भारत स्काउट एंड गाइड का राष्ट्रीय स्तर का आयोजन होता है।
- आयोजन में केंद्र और राज्य स्तर के फंड शामिल होते हैं।
- टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता अनिवार्य होती है।
- PWD और वित्तीय नियमों के तहत बाजार दरों का पालन जरूरी है।
- हाईकोर्ट याचिका स्वीकार होने पर प्रशासनिक फैसलों की समीक्षा कर सकता है।
डाक्यूमेंट:
नियम संशोधन की कॉपी
Sootr Alert
- टेंडर से पहले काम शुरू होना गंभीर प्रशासनिक अनियमितता।
- अस्थायी व्यवस्थाओं में असामान्य रूप से ऊंचा खर्च।
- फंड ट्रांसफर को लेकर नियम उल्लंघन के आरोप।
- हाईकोर्ट की निगरानी में अब पूरा मामला।
IMP FACTS
- आयोजन स्थल: ग्राम दुधली, जिला बालोद
- टेंडर ओपन: 5 जनवरी 2026
- पहली सुनवाई: 20 जनवरी 2026
- अस्थायी टॉयलेट खर्च: 2 करोड़+
- आरोपित फर्म: अमर भारत किराया भंडार
आगे क्या
- 20 जनवरी को हाईकोर्ट में पहली सुनवाई होगी।
- खर्च और टेंडर प्रक्रिया की न्यायिक जांच होगी।
- दोष सिद्ध होने पर FIR और रिकवरी संभव।
- आयोजन को लेकर अंतिम फैसला कोर्ट पर निर्भर है।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी 2026 का आयोजन अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि न्यायिक मुद्दा बन चुका है। टेंडर से पहले काम, करोड़ों के खर्च और नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर CJM कोर्ट की सुनवाई से यह तय होगा कि आयोजन में भ्रष्टाचार हुआ या नहीं। आने वाले दिनों में यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए अहम साबित हो सकता है।
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