RTE एडमिशन में देरी पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, कहा - अगस्त तक एडमिशन तो पढ़ाई कब
Aishwarya Dwivedi | Apr 21, 2026, 11:43 IST
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प्रशासनिक देरी से गरीब बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षा के अधिकार की सार्थकता तभी है जब समय पर जांच और प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश में नया शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है, लेकिन आरटीई की प्रवेश प्रक्रिया कछुआ गति से चलने पर न्यायालय ने गहरी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि प्रवेश की प्रक्रिया अगस्त तक खिंचेगी, तो बच्चे पढ़ाई कब शुरू करेंगे?
हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव से विस्तृत जानकारी मांगी थी। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से बताया गया कि पहले चरण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जिसमें 15 हजार छात्रों को सीटें आवंटित की गई हैं। इन छात्रों को 1 मई से 30 मई के बीच स्कूलों में दाखिला लेना होगा। इसके बाद दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि विभाग की वर्तमान समय-सारणी के अनुसार पूरी प्रक्रिया अगस्त के अंत तक जाएगी, जो बच्चों के शैक्षणिक भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कोर्ट ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि 7 मई से पहले पूरी प्रवेश प्रक्रिया को जल्द समाप्त करने के लिए एक ठोस कार्य योजना पेश करें।
![The Picture of Delay in Figures]()
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने नोडल वेरिफिकेशन के लिए 16 फरवरी से 31 मार्च तक का समय तय किया था, लेकिन डेडलाइन बीतने के बाद भी कई जिलों में 10% से कम आवेदनों की जांच हो पाई है। प्रशासनिक सुस्ती का आलम यह है कि सत्र शुरू होने के बावजूद हजारों अभिभावक अनिश्चितता के भंवर में हैं।
![The Protracted Admission Schedule]()
अगस्त के मध्य तक दाखिला होने की स्थिति में छात्रों के प्रथम त्रैमासिक पाठ्यक्रम का बड़ा हिस्सा छूटने की आशंका है, जिसे लेकर हाईकोर्ट ने चिंता जताई है।
राज्य के 6,861 स्कूलों में आरटीई की कुल 21,698 सीटें हैं। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो राज्य में सीटों और आवेदनों के बीच भारी असंतुलन नजर आता है:
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग : यहां सीटों के मुकाबले कई गुना ज्यादा आवेदन हैं, जिससे कड़ी प्रतिस्पर्धा है।
बस्तर क्षेत्र : यहां की स्थिति इसके उलट है, जहां सीटों के मुकाबले पर्याप्त आवेदन नहीं आए हैं।
कुल औसत : प्रति सीट लगभग 1.77 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
राज्य के 33 जिलों में से 11 जिले ऐसे हैं जहां सीटें खाली रहने की नौबत है, जबकि शहरी केंद्रों में गरीब बच्चों के लिए एक-एक सीट के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अब सबकी नजरें 7 मई को शिक्षा विभाग द्वारा पेश की जाने वाली नई कार्ययोजना पर टिकी हैं।
आरटीई एडमिशन छत्तीसगढ़ की धीमी रफ्तार पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। सत्र शुरू होने के बावजूद प्रक्रिया अगस्त तक खिंचने पर कोर्ट ने 7 मई तक कार्ययोजना मांगी है
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हाईकोर्ट की फटकार और शासन का जवाब
इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि विभाग की वर्तमान समय-सारणी के अनुसार पूरी प्रक्रिया अगस्त के अंत तक जाएगी, जो बच्चों के शैक्षणिक भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कोर्ट ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि 7 मई से पहले पूरी प्रवेश प्रक्रिया को जल्द समाप्त करने के लिए एक ठोस कार्य योजना पेश करें।
आंकड़ों में देरी की तस्वीर
The Picture of Delay in Figures
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने नोडल वेरिफिकेशन के लिए 16 फरवरी से 31 मार्च तक का समय तय किया था, लेकिन डेडलाइन बीतने के बाद भी कई जिलों में 10% से कम आवेदनों की जांच हो पाई है। प्रशासनिक सुस्ती का आलम यह है कि सत्र शुरू होने के बावजूद हजारों अभिभावक अनिश्चितता के भंवर में हैं।
प्रवेश प्रक्रिया का लंबा शेड्यूल
The Protracted Admission Schedule
अगस्त के मध्य तक दाखिला होने की स्थिति में छात्रों के प्रथम त्रैमासिक पाठ्यक्रम का बड़ा हिस्सा छूटने की आशंका है, जिसे लेकर हाईकोर्ट ने चिंता जताई है।
जिलों का समीकरण
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग : यहां सीटों के मुकाबले कई गुना ज्यादा आवेदन हैं, जिससे कड़ी प्रतिस्पर्धा है।
बस्तर क्षेत्र : यहां की स्थिति इसके उलट है, जहां सीटों के मुकाबले पर्याप्त आवेदन नहीं आए हैं।
कुल औसत : प्रति सीट लगभग 1.77 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
राज्य के 33 जिलों में से 11 जिले ऐसे हैं जहां सीटें खाली रहने की नौबत है, जबकि शहरी केंद्रों में गरीब बच्चों के लिए एक-एक सीट के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अब सबकी नजरें 7 मई को शिक्षा विभाग द्वारा पेश की जाने वाली नई कार्ययोजना पर टिकी हैं।
निष्कर्ष
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