रूंगटा यूनिवर्सिटी की नई खोज: 5-FU हाइड्रोजेल से त्वचा कैंसर का इलाज होगा आसान

Umeshwari Baghel | Aug 19, 2026, 19:15 IST
Share
त्वचा कैंसर इलाज में नई उम्मीद
त्वचा कैंसर इलाज में नई उम्मीद

रूंगटा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने त्वचा कैंसर के इलाज के लिए 5-FU दवा वाला चिटोसान हाइड्रोजेल विकसित किया है। लैब टेस्ट में इसने सामान्य 5-FU घोल से बेहतर कैंसररोधी असर दिखाया। आगे इसका पशुओं पर परीक्षण होगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • त्वचा कैंसर के इलाज के लिए नया हाइड्रोजेल
  • 5-FU दवा के असर को बढ़ाने की कोशिश
  • 12 घंटे तक हाइड्रोजेल से रिलीज हुई दवा
  • कैंसर कोशिकाओं पर लैब में हुआ परीक्षण
  • अब पशुओं पर किया जाएगा अगला परीक्षण
Bhilai। त्वचा कैंसर की दवा को सीधे प्रभावित हिस्से तक पहुंचाने और लंबे समय तक उसका असर बनाए रखने की दिशा में रूंगटा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने नई तकनीक विकसित की है। यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ फार्मेसी की डायरेक्टर डॉ. मधुलिका प्रधान और डॉ. कृष्णा यादव ने प्राकृतिक पदार्थ चिटोसान की मदद से एक विशेष हाइड्रोजेल तैयार किया है। इसमें कैंसर उपचार में उपयोग होने वाली दवा 5-फ्लुओरोयूरेसिल यानी 5-FU को शामिल किया गया है।

प्रयोगशाला में त्वचा कैंसर की कोशिकाओं पर किए गए परीक्षण के दौरान यह हाइड्रोजेल सामान्य 5-FU घोल की तुलना में ज्यादा प्रभावी पाया गया। शोध के नतीजे अंतरराष्ट्रीय जर्नल ChemistrySelect में प्रकाशित किए गए हैं। हालांकि शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि फिलहाल यह अध्ययन लैब स्तर तक सीमित है।

प्राकृतिक चिटोसान को संशोधित कर बनाया हाइड्रोजेल

इस तकनीक को विकसित करने के लिए शोधकर्ताओं ने चिटोसान नामक जैव-अनुकूल पदार्थ का इस्तेमाल किया। चिटोसान को रासायनिक प्रक्रिया से संशोधित कर डायल्डिहाइड चिटोसान यानी DCH बनाया गया। इसके बाद DCH को चिटोसान के साथ मिलाकर जेल जैसी संरचना तैयार की गई।

इसी संरचना के भीतर 5-FU दवा को रखा गया। इसका उद्देश्य दवा को त्वचा पर लगाने के बाद धीरे-धीरे प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाना है। चिटोसान शरीर में आसानी से विघटित हो सकता है। इसी कारण दवा पहुंचाने वाली प्रणालियों में इसके उपयोग की संभावनाएं देखी जाती हैं।

12 घंटे तक दवा छोड़ता रहा हाइड्रोजेल

शोध में यह भी जांचा गया कि अलग-अलग पीएच परिस्थितियों में हाइड्रोजेल कितनी दवा रिलीज करता है। 12 घंटे के परीक्षण में पीएच 7.4 पर लगभग 97.89 प्रतिशत दवा रिलीज हुई। पीएच 5.5 पर यह मात्रा करीब 94.5 प्रतिशत रही। पीएच 5 की स्थिति में 98.34 प्रतिशत तक दवा बाहर आई।

अध्ययन के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत दवा शुरुआती पांच घंटों में रिलीज हो गई। इसके बाद भी दवा निकलने की प्रक्रिया जारी रही। शोधकर्ताओं का मानना है कि ऐसी नियंत्रित रिलीज प्रणाली प्रभावित त्वचा पर लंबे समय तक दवा की उपलब्धता बनाए रखने में सहायक हो सकती है।

त्वचा के पीएच के करीब मिला जेल

तैयार किए गए हाइड्रोजेल का पीएच करीब 5.5 दर्ज किया गया। यह सामान्य त्वचा के पीएच के आसपास माना जाता है। परीक्षण के दौरान जेल को आसानी से फैलने योग्य पाया गया। इसे ट्यूब से निकालकर त्वचा पर लगाने में भी सुविधा देखी गई।

हाइड्रोजेल की सूक्ष्म संरचना का अध्ययन करने पर इसमें छोटे छिद्र और अपेक्षाकृत समान सतह दिखाई दी। शोधकर्ताओं के अनुसार ऐसी संरचना दवा को जेल में रखने और बाद में नियंत्रित तरीके से रिलीज करने में मदद कर सकती है।

कैंसर कोशिकाओं पर खुराक बढ़ने के साथ बढ़ा असर

शोध का अहम चरण B16F10 त्वचा कैंसर कोशिकाओं पर किया गया। इनमें अलग-अलग मात्रा में 5-FU वाले हाइड्रोजेल का परीक्षण किया गया। नतीजों में दवा की मात्रा बढ़ने के साथ कैंसर कोशिकाओं की जीवित रहने की क्षमता घटती दिखाई दी।

शोधकर्ताओं के अनुसार हाइड्रोजेल के माध्यम से दी गई 5-FU ने सीधे दिए गए 5-FU घोल की तुलना में बेहतर कैंसररोधी गतिविधि दिखाई। यह प्रभाव दवा की खुराक बढ़ने के साथ ज्यादा स्पष्ट हुआ।

टाटा मेमोरियल सेंटर के ACTREC में हुई जांच

कैंसर कोशिकाओं पर हाइड्रोजेल के प्रभाव से जुड़े परीक्षण मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर के ACTREC में किए गए। वहीं इसकी सूक्ष्म संरचना और कुछ अन्य विश्लेषणों के लिए रायपुर की कलिंगा यूनिवर्सिटी की प्रयोगशाला सुविधाओं का भी उपयोग किया गया।

मरीजों पर इस्तेमाल से पहले कई चरण बाकी

शोधकर्ताओं ने इसे अभी शुरुआती वैज्ञानिक उपलब्धि बताया है। हाइड्रोजेल को मरीजों के उपचार में शामिल करने से पहले इसकी सुरक्षा की व्यापक जांच जरूरी होगी। यह भी देखना होगा कि लंबे समय तक इसके उपयोग का शरीर और सामान्य गैर-कैंसर कोशिकाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है।

अगले चरण में इस हाइड्रोजेल का पशुओं पर परीक्षण किए जाने की योजना है। इसके लिए अन्य चिकित्सा और शोध विशेषज्ञों से भी सलाह ली जा रही है। पशु परीक्षण और आगे के अध्ययनों में सुरक्षित तथा प्रभावी नतीजे मिलने पर यह तकनीक भविष्य में त्वचा कैंसर की दवा को सीधे प्रभावित हिस्से तक पहुंचाने वाली नई उपचार प्रणाली के रूप में विकसित हो सकती है।

FAQ

  1. रूंगटा यूनिवर्सिटी ने त्वचा कैंसर के लिए क्या विकसित किया है?
    शोधकर्ताओं ने चिटोसान से एक हाइड्रोजेल तैयार किया है, जिसमें कैंसर की दवा 5-फ्लुओरोयूरेसिल (5-FU) को शामिल किया गया है।
  2. 5-FU हाइड्रोजेल का लैब टेस्ट में क्या असर दिखा?
    B16F10 त्वचा कैंसर कोशिकाओं पर परीक्षण में हाइड्रोजेल के जरिए दी गई 5-FU ने सामान्य 5-FU घोल की तुलना में बेहतर कैंसररोधी प्रभाव दिखाया।
  3. क्या इस हाइड्रोजेल का इस्तेमाल अभी मरीजों पर हो सकता है?
    नहीं। शोध अभी प्रयोगशाला स्तर पर है। मरीजों पर इस्तेमाल से पहले पशु परीक्षण, सुरक्षा जांच और अन्य विस्तृत अध्ययन किए जाने जरूरी हैं।

ये खबरें भी पढ़े...

कैंसर इंस्टीट्यूट जबलपुर का खुलासा, बिना स्मोकिंग के भी हो सकता है फेफड़ों का कैंसर

विधानसभा का मानसून सत्र: हाथों में काली पट्टी बांधकर पहुंची कांग्रेस, पंचायत राज संशोधन विधेयक पारित

भिलाई रेप केस : चॉकलेट-टॉफी का लालच देकर बच्चियों को बुलाता था आरोपी

Top News: खबरें काम की... अग्नि-4 का सफल परीक्षण, भारत ने फिर दिखाई मिसाइल ताकत



Tags:
  • भिलाई
  • परीक्षण
  • शोध
  • रूंगटा यूनिवर्सिटी
  • त्वचा कैंसर
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज

By Sanjay Dhiman

UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब

By VINAY VERMA

अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान

By Ashish Bhardwaj

RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान