मंत्रियों की छवि खराब कर रहे निज सहायक, अब तक दर्जन भर पीए की छुट्टी
Arun Tiwari | Sept 09, 2026, 17:42 IST
मंत्रियों के पीए पर कार्रवाई
2024 से सितंबर 2026 तक कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें मंत्रियों के निजी स्टाफ के अधिकारियों-कर्मचारियों को हटाया गया या उनकी भूमिका बदली गई। इनमें सबसे ज्यादा बदलाव वन मंत्री केदार कश्यप के कार्यालय में दिखाई देते हैं।
छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार के मंत्रियों की छवि खराब उनके पीए कर रहे हैं। सीएम से संगठन तक ये शिकायतें मिल रही हैं कि मंत्रियों के पीए सरकार की योजनाओं पर पलीता लगा रहे हैं। कार्यकर्ताओं को मंत्री से मिलने से भी यही निज सहायक रुकावट बने हुए हैं।
मंत्रियों के निजी स्टाफ में बदलाव का सिलसिला लगातार जारी है। OSD, निज सचिव और निज सहायकों को हटाने के दर्ज़न भर मामले पिछले ढाई साल में सामने आए हैं।
ताजा मामला खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के निज सचिव संतोष अग्रवाल का है, जिन्हें मूल विभाग भेज दिया गया है। इससे एक बार फिर मंत्रियों के निजी स्टाफ की भूमिका और उनके कार्यालयों में लगातार हो रहे बदलाव चर्चा में हैं।
साय सरकार के गठन के बाद शुरुआती नौ महीनों में ही कई मंत्रियों के OSD बदले गए। उपमुख्यमंत्री अरुण साव के OSD गोपाल पटवा, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के ओमप्रकाश देवांगन और खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के OSD अजय यादव को हटाया गया।
सितंबर 2024 में वन मंत्री केदार कश्यप के OSD सुनील तिवारी को भी मूल विभाग भेज दिया गया। सितंबर 2024 में दयालदास बघेल के स्टाफ से अजय यादव को हटाया गया।
इसके बाद केदार कश्यप के कार्यालय में बदलाव का सिलसिला जारी रहा। सुनील तिवारी के बाद जितेंद्र कुमार गुप्ता को OSD बनाया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें भी मूल विभाग भेज दिया गया। उनकी जगह प्रदीप कुमार वैद्य को जिम्मेदारी दी गई।
नए साल की शुरुआत में ही उपमुख्यमंत्री अरुण साव के OSD विपुल कुमार गुप्ता को हटाकर उनके स्थान पर नए OSD की नियुक्ति की गई। इसी दौर में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के निज सहायक दुर्गेश धारे की संविदा सेवा समाप्त की गई।
इसके बाद मई 2026 में मंत्री केदार कश्यप के निज सहायक संकर्षण सिंह की संविदा सेवा भी समाप्त कर दी गई। केदार कश्यप के कार्यालय में इसी अवधि में कमल नारायण कांडे की OSD की भूमिका भी खत्म हुई।
जुलाई 2026 में केदार कश्यप के OSD प्रदीप कुमार वैद्य को उनके मूल विभाग भेजे जाने के बाद दुष्यंत कुमार को नया OSD बनाए जाने की जानकारी सामने आई। यानी एक ही मंत्री के कार्यालय में अलग-अलग समय पर OSD और निजी स्टाफ के कई चेहरे बदले।
सितंबर 2026 में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के निज सचिव संतोष अग्रवाल को भी मूल विभाग भेज दिया गया है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब मंत्री के निजी स्टाफ को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं चल रही थीं।
बताया जाता है कि अग्रवाल की कार्यशैली से संगठन नाराज था। वे कार्यकर्ताओं को मंत्री से मिलने नहीं देते थे। इसके अलावा गुड़ खरीदी और पीडीएस से जुड़े मामलों में भी गड़बड़ी का आरोप लगा है।
सबसे ज्यादा बदलाव केदार कश्यप के कार्यालय का है। 2024 में सुनील तिवारी और जितेंद्र कुमार गुप्ता OSD पद से हटे। इसके बाद प्रदीप कुमार वैद्य को जिम्मेदारी मिली और 2026 में वे भी मूल विभाग भेजे गए। इसी बीच संकर्षण सिंह की संविदा सेवा समाप्त हुई और कमल नारायण कांडे की OSD की जिम्मेदारी भी खत्म हुई।
यानी एक ही मंत्री के कार्यालय में अलग-अलग श्रेणी के निजी स्टाफ में लगातार बदलाव हुआ। यही वजह है कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि ये सामान्य प्रशासनिक फेरबदल हैं या निजी स्टाफ के कामकाज और भूमिका को लेकर सरकार के स्तर पर कोई व्यापक समीक्षा चल रही है।
मंत्रियों के निजी स्टाफ का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि मंत्री तक पहुंच, फाइलों की आवाजाही, मुलाकातों का समन्वय और विभागीय कामकाज में ये कर्मचारी अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किसी मंत्री के OSD, निज सचिव या निज सहायक में बदलाव का असर सिर्फ कार्यालय की व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे मंत्री के कामकाज की शैली और उनके कार्यालय की अंदरूनी व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
साय सरकार में पिछले ढाई साल के घटनाक्रम को जोड़कर देखें तो तस्वीर यह बनती है कि निजी स्टाफ में बदलाव कोई एक-दो मंत्रियों तक सीमित नहीं रहा। अरुण साव, लक्ष्मी राजवाड़े, दयालदास बघेल, टंकराम वर्मा और खास तौर पर केदार कश्यप के कार्यालय में अलग-अलग समय पर बदलाव हुए हैं।अब दयालदास बघेल के निज सचिव संतोष अग्रवाल को मूल विभाग भेजे जाने के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में है।
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मंत्रियों के निजी स्टाफ में बदलाव का सिलसिला लगातार जारी है। OSD, निज सचिव और निज सहायकों को हटाने के दर्ज़न भर मामले पिछले ढाई साल में सामने आए हैं।
ताजा मामला खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के निज सचिव संतोष अग्रवाल का है, जिन्हें मूल विभाग भेज दिया गया है। इससे एक बार फिर मंत्रियों के निजी स्टाफ की भूमिका और उनके कार्यालयों में लगातार हो रहे बदलाव चर्चा में हैं।
सरकार बनने के शुरुआती महीनों में ही शुरू हो गया था बदलाव:
सितंबर 2024 में वन मंत्री केदार कश्यप के OSD सुनील तिवारी को भी मूल विभाग भेज दिया गया। सितंबर 2024 में दयालदास बघेल के स्टाफ से अजय यादव को हटाया गया।
इसके बाद केदार कश्यप के कार्यालय में बदलाव का सिलसिला जारी रहा। सुनील तिवारी के बाद जितेंद्र कुमार गुप्ता को OSD बनाया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें भी मूल विभाग भेज दिया गया। उनकी जगह प्रदीप कुमार वैद्य को जिम्मेदारी दी गई।
2026 में फिर तेज हुए तबादले और बदलाव:
इसके बाद मई 2026 में मंत्री केदार कश्यप के निज सहायक संकर्षण सिंह की संविदा सेवा भी समाप्त कर दी गई। केदार कश्यप के कार्यालय में इसी अवधि में कमल नारायण कांडे की OSD की भूमिका भी खत्म हुई।
जुलाई 2026 में केदार कश्यप के OSD प्रदीप कुमार वैद्य को उनके मूल विभाग भेजे जाने के बाद दुष्यंत कुमार को नया OSD बनाए जाने की जानकारी सामने आई। यानी एक ही मंत्री के कार्यालय में अलग-अलग समय पर OSD और निजी स्टाफ के कई चेहरे बदले।
अब दयालदास बघेल के निज सचिव संतोष अग्रवाल की बारी:
बताया जाता है कि अग्रवाल की कार्यशैली से संगठन नाराज था। वे कार्यकर्ताओं को मंत्री से मिलने नहीं देते थे। इसके अलावा गुड़ खरीदी और पीडीएस से जुड़े मामलों में भी गड़बड़ी का आरोप लगा है।
सबसे ज्यादा बदलाव केदार कश्यप के कार्यालय में:
यानी एक ही मंत्री के कार्यालय में अलग-अलग श्रेणी के निजी स्टाफ में लगातार बदलाव हुआ। यही वजह है कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि ये सामान्य प्रशासनिक फेरबदल हैं या निजी स्टाफ के कामकाज और भूमिका को लेकर सरकार के स्तर पर कोई व्यापक समीक्षा चल रही है।
क्या निजी स्टाफ मंत्रियों की छवि कर रहा:
साय सरकार में पिछले ढाई साल के घटनाक्रम को जोड़कर देखें तो तस्वीर यह बनती है कि निजी स्टाफ में बदलाव कोई एक-दो मंत्रियों तक सीमित नहीं रहा। अरुण साव, लक्ष्मी राजवाड़े, दयालदास बघेल, टंकराम वर्मा और खास तौर पर केदार कश्यप के कार्यालय में अलग-अलग समय पर बदलाव हुए हैं।अब दयालदास बघेल के निज सचिव संतोष अग्रवाल को मूल विभाग भेजे जाने के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में है।
इन मंत्रियों ने हटाये अपने पीए :
- अरुण साव - गोपाल पटवा, विपुल कुमार गुप्ता
- लक्ष्मी राजवाड़े - ओमप्रकाश देवांगन
- दयालदास बघेल - अजय यादव, संतोष अग्रवाल
- केदार कश्यप - सुनील तिवारी, जितेंद्र कुमार गुप्ता, प्रदीप कुमार वैद्य,संकर्षण सिंह,कमलनारायण कांडे
- टंकराम वर्मा - दुर्गेश धारे
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