सक्ती दोहरे हत्याकांड : तांत्रिक साधना के चक्कर में पूरे परिवार को आजीवन कारावास
Umeshwari Baghel | Jun 04, 2026, 17:58 IST
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सक्ती जिले के तांदुलडीह में दो सगे भाइयों की हत्या अंधविश्वास और तंत्र साधना के नाम पर हुई। पुलिस जांच में मां फिरीतबाई सिदार, बहनें अमरिका और चंद्रिका तथा भाई विशाल दोषी पाए गए। न्यायालय ने चारों को आजीवन कारावास और 1-1 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
NEWS IN SHORT
- सक्ती: तांदुलडीह दोहरे हत्याकांड में चारों आरोपियों को आजीवन कारावास
- अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के चक्कर में दो सगे भाइयों की हत्या
- मां और तीन परिजनों पर लगे गंभीर आरोप, अदालत ने सुनाई सख्त सजा
- परिवार के धार्मिक अनुष्ठानों के पीछे छुपा हत्याकांड का सच
- कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: तांदुलडीह हत्या मामले में न्याय कायम
NEWS IN DETAIL
संदिग्ध परिस्थितियों में हुई दो भाइयों की मौत
परिवार की तांत्रिक गतिविधियां
घटना का खौफनाक मंजर
आरोपियों का दावा और पुलिस की शंका
मृतकों के विरोध और हत्या की योजना
पुलिस का दावा है कि विरोध के चलते परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें विशेष पूजा में शामिल होने के बहाने बुलाया और हत्या कर दी। हत्या के बाद पूरी घटना को धार्मिक साधना का रूप देने का प्रयास किया गया।
घटनास्थल से बरामद महत्वपूर्ण सामग्री
न्यायालय की कार्रवाई
अपर लोक अभियोजक उदय वर्मा ने शासन की ओर से प्रभावी पैरवी की और न्यायालय ने उनका पक्ष भी गंभीरता से सुना। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि अंधविश्वास और तंत्र साधना के नाम पर हत्या जैसी गंभीर घटना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
IMP FACTS
घटना समय: अक्टूबर 2024।
मृतक: विक्रम (विकास) सिदार और विक्की सिदार, दो सगे भाई।
आरोपी: मां फिरीतबाई सिदार, बहनें अमरिका और चंद्रिका सिदार, भाई विशाल सिदार।
हत्या का तरीका: तंत्र साधना और धार्मिक अनुष्ठान के बहाने बुलाकर हत्या।
सजा: चारों आरोपी दोषी, आजीवन सश्रम कारावास और 1‑1 हजार रुपये अर्थदंड।
पुलिस जांच: पूजा सामग्री, हवन सामग्री, नोटबुक, जड़ी-बूटियां, कीटनाशक बरामद।
न्यायालय: अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत कुमार शिवहरे की अदालत।
मुख्य कारण: मृतक भाईयों का तंत्र साधना और अंधविश्वास का विरोध।
सामाजिक संदेश: अंधविश्वास और तांत्रिक प्रथाओं में परिवार को शामिल करने से गंभीर अपराध हो सकता है।
समाज और कानून के लिए संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के अंधविश्वास और तांत्रिक गतिविधियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। परिवार और समाज को चाहिए कि वे इस तरह के खतरनाक अनुष्ठानों से दूर रहें और बच्चों एवं युवाओं को सुरक्षित रखें।
FAQ
- तांदुलडीह दोहरे हत्याकांड में आरोपी कौन हैं?
इस मामले में चार मुख्य आरोपी हैं। मृतकों की मां फिरीतबाई सिदार, उनकी दो बहनें अमरिका और चंद्रिका सिदार, और भाई विशाल सिदार। अदालत ने सभी को दोषी मानते हुए आजीवन सजा सुनाई। आरोप है कि इन चारों ने तंत्र साधना और धार्मिक अनुष्ठानों के बहाने अपने ही परिवार के दो बेटों की हत्या की थी। - दोनों भाई कौन थे और उनकी जान कैसे गई?
मृतक दो सगे भाई थे, विक्रम (विकास) और विक्की सिदार। परिवार में बढ़ते अंधविश्वास और तंत्र साधना के कारण दोनों भाई इन प्रथाओं का विरोध करते थे। पुलिस जांच के मुताबिक, उन्हें पूजा और गुरु मंत्र के बहाने बुलाया गया और फिर हत्या कर दी गई। घटना के समय वे अचेत अवस्था में पाए गए और अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। - न्यायालय ने आरोपियों को क्या सजा दी और क्यों?
न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा प्रत्येक आरोपी पर एक-एक हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया। अदालत ने यह फैसला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और पुलिस जांच रिपोर्टों के आधार पर लिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अंधविश्वास और तंत्र साधना के नाम पर हत्या जैसी गंभीर घटना को किसी भी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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