कक्षा बढ़ते ही बढ़ रही ड्रॉपआउट दर, 9वीं-10वीं में सबसे ज्यादा छात्र छोड़ रहे स्कूल
Harrison Masih | Jun 04, 2026, 18:38 IST
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छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा के दौरान बच्चों के ड्रॉपआउट की समस्या अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। यूडीआईएसई के आंकड़ों के अनुसार कक्षा बढ़ने के साथ ड्रॉपआउट दर भी बढ़ रही है, जिसमें कक्षा 9 और 10 में यह दर 18 से 22 प्रतिशत तक पहुंच रही है।
शिक्षा का अधिकार कानून, मुफ्त पाठ्यपुस्तक, गणवेश, मध्यान्ह भोजन और छात्रवृत्ति जैसी कई योजनाओं के बावजूद छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा के दौरान बच्चों के पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉपआउट) की समस्या अब भी बनी हुई है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि जैसे-जैसे विद्यार्थी उच्च कक्षाओं में पहुंचते हैं, स्कूल छोड़ने वालों की संख्या भी बढ़ जाती है। विशेष रूप से कक्षा 8 के बाद और माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर राज्य के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) के हालिया आंकड़ों और विभागीय समीक्षा में यह स्थिति सामने आने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने ड्रॉपआउट दर को शून्य प्रतिशत तक लाने के लिए नई रणनीति तैयार करने का निर्णय लिया है।
हाल ही में मुख्य सचिव विकासशील ने स्कूल शिक्षा विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में स्कूल शिक्षा सचिव, संचालक लोक शिक्षण और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन जिलों में ड्रॉपआउट दर कम है, वहां इसे पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में काम किया जाए। साथ ही अधिक प्रभावित जिलों के लिए अलग कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि स्कूल स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग, विद्यार्थियों की ट्रैकिंग और अभिभावकों से संवाद बढ़ाया जाए, ताकि कोई भी बच्चा पढ़ाई बीच में न छोड़े।
शिक्षा विभाग के आंकड़े बताते हैं कि प्राथमिक स्तर पर स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन माध्यमिक स्तर पर पहुंचते-पहुंचते समस्या गंभीर हो जाती है।
शिक्षा विभाग और विशेषज्ञों के अनुसार ड्रॉपआउट के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार
स्कूलों की दूरी
परिवहन सुविधा का अभाव
पारिवारिक जिम्मेदारियां
बाल मजदूरी
बाल विवाह
किशोरावस्था में पढ़ाई के प्रति घटती रुचि
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में संसाधनों की कमी
विशेषज्ञों का मानना है कि माध्यमिक शिक्षा स्तर पर इन कारणों का प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है।
जिला स्तरीय समीक्षा और पिछले वर्षों के यूडीआईएसई आंकड़ों के अनुसार आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में ड्रॉपआउट दर राज्य औसत से अधिक है।
राज्य में वर्तमान में 55 लाख से अधिक विद्यार्थी स्कूल शिक्षा प्रणाली से जुड़े हुए हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत छात्रों की है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि यदि माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर कम करने में सफलता मिलती है तो इसका सीधा असर बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम, उच्च शिक्षा में प्रवेश और राज्य के मानव संसाधन विकास पर पड़ेगा।
सूत्रों के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग अब ऐसे विद्यार्थियों की पहचान करने की तैयारी कर रहा है, जो पढ़ाई छोड़ने के जोखिम वाले वर्ग में आते हैं। इसके लिए स्कूलों को नियमित रिपोर्टिंग, छात्र उपस्थिति की निगरानी और समुदाय आधारित जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
इसके अलावा बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों पर विशेष फोकस करने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में ड्रॉपआउट की समस्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
राज्य सरकार का लक्ष्य केवल नामांकन बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे को स्कूल में बनाए रखना और उसकी शिक्षा पूरी कराना है। इसी उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने ड्रॉपआउट दर को शून्य प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। आने वाले महीनों में विभाग की नई रणनीति और जिला स्तर पर की जाने वाली कार्रवाई इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) के हालिया आंकड़ों और विभागीय समीक्षा में यह स्थिति सामने आने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने ड्रॉपआउट दर को शून्य प्रतिशत तक लाने के लिए नई रणनीति तैयार करने का निर्णय लिया है।
मुख्य सचिव ने जताई चिंता
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन जिलों में ड्रॉपआउट दर कम है, वहां इसे पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में काम किया जाए। साथ ही अधिक प्रभावित जिलों के लिए अलग कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि स्कूल स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग, विद्यार्थियों की ट्रैकिंग और अभिभावकों से संवाद बढ़ाया जाए, ताकि कोई भी बच्चा पढ़ाई बीच में न छोड़े।
कक्षा बढ़ने के साथ बढ़ रही ड्रॉपआउट दर
छत्तीसगढ़ में अनुमानित ड्रॉपआउट की दर
| शिक्षा स्तर | अनुमानित ड्रॉपआउट दर |
|---|---|
| कक्षा 1 से 5 (प्राथमिक) | 1 से 2 प्रतिशत |
| कक्षा 1 से 8 (एलीमेंट्री) | 4 से 5 प्रतिशत |
| कक्षा 9-10 (माध्यमिक) | 18 से 22 प्रतिशत |
स्कूल क्यों छोड़ रहे हैं बच्चे?
इनमें प्रमुख कारण हैं-
स्कूलों की दूरी
परिवहन सुविधा का अभाव
पारिवारिक जिम्मेदारियां
बाल मजदूरी
बाल विवाह
किशोरावस्था में पढ़ाई के प्रति घटती रुचि
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में संसाधनों की कमी
विशेषज्ञों का मानना है कि माध्यमिक शिक्षा स्तर पर इन कारणों का प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है।
आदिवासी और दूरस्थ जिलों में ज्यादा चुनौती
जिन जिलों में स्थिति अधिक गंभीर
- बीजापुर
- सुकमा
- नारायणपुर
- दंतेवाड़ा
- कोंडागांव
- बलरामपुर
55 लाख से ज्यादा विद्यार्थी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े
शिक्षा विभाग का मानना है कि यदि माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर कम करने में सफलता मिलती है तो इसका सीधा असर बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम, उच्च शिक्षा में प्रवेश और राज्य के मानव संसाधन विकास पर पड़ेगा।
विशेष अभियान चलाने की तैयारी
इसके अलावा बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों पर विशेष फोकस करने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में ड्रॉपआउट की समस्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
शून्य ड्रॉपआउट का लक्ष्य
FAQ
- छत्तीसगढ़ में विद्यार्थी स्कूल क्यों छोड़ रहे हैं?
ड्रॉपआउट के प्रमुख कारणों में आर्थिक तंगी, स्कूलों की दूरी, परिवहन सुविधा का अभाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां, बाल मजदूरी, बाल विवाह और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां शामिल हैं। - छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक ड्रॉपआउट दर किस कक्षा स्तर पर है?
छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक ड्रॉपआउट दर माध्यमिक स्तर यानी कक्षा 9 और 10 में दर्ज की गई है। यूडीआईएसई के आंकड़ों के अनुसार यह दर 18 से 22 प्रतिशत के बीच है।
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