CG School Crisis : जर्जर भवन और शिक्षकों का टोटा, सड़कों पर उतरे Gen-Alpha छात्र
Aishwarya Dwivedi | Aug 17, 2026, 12:45 IST
स्कूल शिक्षकों की कमी के खिलाफ़ विरोध-प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में जर्जर भवनों, शिक्षकों की कमी और शौचालयों के अभाव से परेशान होकर 'जेन-अल्फा' छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। कई जिलों में तालाबंदी और प्रदर्शन जारी हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है।
- शिक्षकों के अभाव से बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है।
- परेशान होकर अब जेन अल्फा छात्रों ने खुद प्रदर्शन शुरू किया है।
- राज्य के कई जिलों में तालाबंदी और मार्च की घटनाएं दिखी हैं।
- हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी इस बदहाली पर चिंता जता चुके हैं।
स्कूलों की बदहाली पर गुस्सा
तालाबंदी और प्रशासनिक मार्च
वहां बच्चे पंचायत भवन में पढ़ने को मजबूर हैं। छात्रों ने बीईओ (BEO – Block Education Officer) दफ्तर तक तिरंगा मार्च निकाला। मांगे पूरी न होने पर पेड़ के नीचे पढ़ने की चेतावनी दी।
शिक्षकों का संकट और प्रभावित पढ़ाई
उन्होंने स्थायी शिक्षकों की मांग करते हुए ताला जड़ दिया। प्रदेश में 1800 से अधिक स्कूल ऐसे हैं। इन सभी स्कूलों में पढ़ाई की जिम्मेदारी एक शिक्षक पर है। विषयवार शिक्षक न होने से पढ़ाई का स्तर गिर रहा है।
CG School Crisis
शौचालयों और पानी की भीषण समस्या
गंदे शौचालयों के कारण बच्चों में संक्रमण का खतरा रहता है। सुविधाओं की कमी से छात्राओं का नामांकन भी कम हुआ है। साल 2014-15 में नामांकन का आंकड़ा 106.61 प्रतिशत था। साल 2024-25 में यह घटकर 89.9 प्रतिशत पर आ गया।
अदालत की टिप्पणी और विशेषज्ञों की राय
डिजिटल दुनिया और इंटरनेट ने बच्चों को जागरूक बनाया है। वे अब अपने अधिकारों के प्रति बहुत सजग हैं। रविवि (RSU – Pandit Ravishankar Shukla University) रायपुर की प्रो. रोली तिवारी के अनुसार यह मनोवैज्ञानिक बदलाव है। उन्होंने कहा कि बच्चों के विरोध को दबाना सही रास्ता नहीं है। प्रशासन और अभिभावकों को संवाद के जरिए हल निकालना चाहिए।
FAQ
- छत्तीसगढ़ के कितने सरकारी स्कूल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं?
उत्तर: राज्य में 1800 से अधिक सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां पूरे स्कूल की पढ़ाई का जिम्मा सिर्फ एक शिक्षक पर है। - छात्राओं के नामांकन दर में कितनी गिरावट आई है?
उत्तर: सरकारी प्राथमिक स्कूलों में छात्राओं का नामांकन 2014-15 के 106.61 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 89.9 प्रतिशत रह गया है। - बच्चों ने सुविधाओं की कमी पर क्या कदम उठाया है?
उत्तर: छात्रों ने स्कूलों में तालाबंदी की है, बीईओ दफ्तरों तक मार्च निकाला है और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है।
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