सोशल मीडिया ज़रूरी लेकिन ज़मीनी मेहनत का विकल्प नहीं, स्मृति बोलीं हर बूथ पर पहुंच हर व्यक्ति से संवाद

Arun Tiwari | Oct 26, 2026, 22:00 IST
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स्मृति ईरानी की दो टूक<br>
स्मृति ईरानी की दो टूक

स्मृति इरानी का छत्तीसगढ़ दौरा दो दिनों का रहा, जिसमें वरिष्ठ नेताओं के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं। चार सत्रों में विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा की गई, विशेष रूप से सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर। कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाने और संगठन की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने पर जोर दिया गया। कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जमीनी संपर्क की भूमिका को प्रमुखता दी गई।

समझें क्या है पूरा मामला

  1. स्मृति इरानी का छत्तीसगढ दौरा दो दिन का रहा।
  2. वे भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री और छत्तीसगढ की प्रदेश प्रभारी हैं।
  3. आखिरी दिन रायपुर में चार अलग बैठकें हुईं।
  4. चर्चा के केंद्र में संगठन, योजनाएं और जनता से संवाद रहा।
  5. स्मृति इरानी ने बूथ स्तर तक संगठन फैलाने पर जोर दिया।

रायपुर भाजपा बैठक में चार सत्र

रायपुर भाजपा बैठक का सिलसिला प्रदेश भाजपा कार्यालय में सुबह से चला। पहला सत्र मौजूदा विधायकों के साथ हुआ। इसमें सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर बात हुई। जनता से सीधा संवाद और संगठन की गतिविधियां भी एजेंडे में रहीं।

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26 Oct 2026 ,
By Arun Tiwari
<b>रायपुर। </b>छत्तीसगढ़ भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी ने अपने पहले दौरे में ही संगठन के नेताओं को स्पष्ट संदेश दे दिया , कि पार्टी में अब औपचारिक स्वागत-सत्कार से ज्यादा अहमियत संगठनात्मक काम और बूथ की मजबूती को मिलेगी। रविवार को दो दिवसीय दौरे पर रायपुर पहुंचीं स्मृति ईरानी का अंदाज अपेक्षा से बिल्कुल अलग रहा।
<b>रायपुर। </b>छत्तीसगढ़ भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी ने अपने पहले दौरे में ही संगठन के नेताओं को स्पष्ट संदेश दे दिया , कि पार्टी में अब औपचारिक स्वागत-सत्कार से ज्यादा अहमियत संगठनात्मक काम और बूथ की मजबूती को मिलेगी। रविवार को दो दिवसीय दौरे पर रायपुर पहुंचीं स्मृति ईरानी का अंदाज अपेक्षा से बिल्कुल अलग रहा।

दूसरे सत्र में लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के साथ समीक्षा बैठक हुई। केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने पर चर्चा हुई। संसदीय क्षेत्रों में विकास कार्यों की प्रगति पर भी चर्चा हुई।

तीसरा सत्र प्रदेश मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ रहा। इसमें राज्य सरकार की योजनाएं ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर जोर रहा। दिन की आखिरी बैठक भाजपा कोर ग्रुप के साथ हुई। इसमें आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों और भावी रणनीतियों पर विचार हुआ।

इस कवायद का दायरा व्यापक रहा। चार बैठकों में विधायक, दोनों सदनों के सांसद, मंत्री और कोर ग्रुप शामिल रहे। सरकार, संसद और संगठन के प्रतिनिधि एक ही दिन एक ही कार्यालय में जुटे।

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19 Oct 2026 ,
By Arun Tiwari
<b>Raipur. </b>छत्तीसगढ़ में अगले 10 दिनों के भीतर होने वाले चार प्रमुख वीआईपी दौरों से प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ.मोहन भागवत, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी की नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के प्रस्तावित दौरों से राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
<b>Raipur. </b>छत्तीसगढ़ में अगले 10 दिनों के भीतर होने वाले चार प्रमुख वीआईपी दौरों से प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ.मोहन भागवत, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी की नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के प्रस्तावित दौरों से राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

बात उस संदेश की, जो स्मृति इरानी ने कार्यकर्ताओं को दिया।

कार्यकर्ता ही संगठन की असली ताकत

स्मृति इरानी के मुताबिक पार्टी की मजबूती विचारधारा, अनुशासन और कार्यकर्ताओं के समर्पण पर टिकी है।

उन्होंने बताया कि दो दिन के चिंतन का मकसद आत्ममंथन करना है। संगठन की प्राथमिकताओं को नए सिरे से रेखांकित करना भी इसका मकसद रहा। साथ ही उस संकल्प को दोहराना, जिसने जनसंघ से भाजपा को दिशा दी।

कर्मयोगी हैं भाजपा के कार्यकर्ता

स्मृति इरानी ने कहा भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता कर्मयोगी है। उसके परिश्रम से ही संगठन लगातार मजबूत होता है।

उन्होंने कहा कि पार्टी केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। भाजपा को उन्होंने राष्ट्र प्रथम की भावना से चलने वाला वैचारिक आंदोलन बताया। यह आंदोलन कार्यकर्ताओं के निःस्वार्थ समर्पण से चलता है।


भाजपा की रीति-नीति एकात्म मानववाद और अंत्योदय पर आधारित है, उन्होंने कहा। एकात्म मानववाद का मतलब है, व्यक्ति और समाज को एक साथ देखने वाली सोच। अंत्योदय का अर्थ है, समाज की अंतिम पंक्ति के व्यक्ति का उत्थान। संगठन की सफलता का असली पैमाना यही होना चाहिए।

उन्होंने अनुशासन को पार्टी की सबसे अहम खासियतों में गिना। उनके मुताबिक पद और दायित्व बदलते रहते हैं। पर भाजपा कार्यकर्ता संगठन की स्थायी पूंजी होता है।

सोशल मीडिया बनाम जमीनी संपर्क

स्मृति इरानी ने माना कि मौजूदा समय तकनीक का है। सोशल मीडिया संवाद का अहम जरिया बन चुका है।

जमीनी संपर्क का कोई विकल्प नहीं

स्मृति इरानी ने आगे कहा सोशल मीडिया संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है, लेकिन इसे जमीनी संपर्क का विकल्प नहीं माना जा सकता।

भाजपा कार्यकर्ता को गांव-गांव, पारा-टोला और बस्तर से सरगुजा तक पहुंचना होगा। आम लोगों के सुख-दुख में साथ रहना कार्यकर्ता का असली धर्म है। उनकी समस्याएं सुनना और समाधान की कोशिश करना भी इसी धर्म में आता है।

सादगी और सहज व्यवहार पर जोर

स्मृति इरानी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में सादगी बनी रहनी चाहिए। कार्यकर्ता बिना औपचारिकता के आम लोगों के बीच बैठे और समस्याएं समझे। तभी संगठन परिवार जैसा दिखाई देता है।


जनता का भरोसा बनाए रखने की चुनौती

छत्तीसगढ की जनता ने भाजपा पर गहरा विश्वास जताया है। स्मृति इरानी ने इसे सम्मान के साथ अहम जिम्मेदारी बताया। संगठन को अब इस भरोसे के लिए लगातार काम करना होगा।

तीन अलग सत्रों में सरकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने की बात उठी। विधायकों से जमीनी क्रियान्वयन, सांसदों से संसदीय क्षेत्रों की प्रगति पर बात हुई। मंत्रिमंडल के सत्र में राज्य की योजनाएं ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर जोर रहा।

संगठन के सामने अब क्या लक्ष्य है?

पार्टी का लक्ष्य सिर्फ मौजूदा जनसमर्थन बचाना नहीं है। उन्होंने संगठन को हर बूथ तक मजबूत और प्रभावी बनाने की बात कही। कार्यकर्ताओं के परिश्रम से भाजपा को और मजबूत बनाने का संकल्प भी दोहराया।

स्मृति इरानी ने संगठनात्मक एकजुटता पर भी जोर दिया। सोशल मीडिया साथ चले, पर असली काम जमीन पर दिखे।

यह खबर क्यों जरूरी है:

लोकतंत्र में जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधा संवाद जरूरी है। स्मृति इरानी का संदेश इसी संवाद पर टिका है। सरकारी योजनाएं गांव और बस्ती तक पहुंचें, इसमें कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम होती है। सामाजिक न्याय की कसौटी यही है कि अंतिम पंक्ति का व्यक्ति पीछे न छूटे। अंत्योदय का यही भाव संविधान के कल्याणकारी लक्ष्यों से भी मेल खाता है। इसलिए बूथ तक संवाद की यह कोशिश आम मतदाता से सीधे जुड़ती है।
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