कवर्धा में फर्जी एनकाउंटर ! 5 जवानों ने कई नक्सलियों को कैसे खदेड़ा ?
Rahul Garhwal | Feb 09, 2024, 17:05 IST
Naxalite
छत्तीसगढ़ के कवर्धा में एक पुलिस-नक्सली मुठभेड़ के फर्जी होने की बात सामने आ रही है। हैरानी इस बात पर है कि 5 जवानों ने कई नक्सलियों को कैसे मार भगाया। सूत्रों के मुताबिक मुठभेड़ कागजी हो सकती है। इसकी जांच की मांग उठ रही है।
KAWARDHA. कवर्धा में पुलिस और नक्सलियों के एनकाउंटर (Naxalite Encounter) पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल इस मुठभेड़ के कागजी यानी फर्जी होने पर हैं। हैरानी की बात है कि विशेष असूचना खुफिया शाखा के अधिकारी हथियार लेकर सर्चिंग कर रहे थे। इस दौरान उन्हें जंगल में नक्सलियों को होने की खबर मिली। DSB के जवानों ने मोर्चा संभाला और कई नक्सलियों को खदेड़ दिया। नक्सलियों का सामान भी बरामद किया। सूत्रों के मुताबिक ये फर्जी मुठभेड़ (Fake Encounter) है और इसकी जांच की मांग की जा रही है।
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माराड़भरा इलाके में ये मुठभेड़ हुई। देश में ऐसा कोई राज्य नहीं है, जहां DSB यानी विशेष असूचना शाखा के अधिकारी हथियार के साथ सर्चिंग करते हों। इसके अधिकारी अपनी गोपनीयता बनाए रखने के लिए खाकी वर्दी भी नहीं पहनते। इन्हें मुठभेड़ के लिए तैयार भी नहीं किया जाता है और न ही हथियार दिए जाते हैं। इसलिए DSB के जवानों के नक्सलियों को खदेड़ने की बात पर लोग हैरानी जता रहे हैं।
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DSB जवान-नक्सली मुठभेड़ पर सवाल उठने के बाद पुलिस का एक वर्ग इसकी जांच में जुटा है। फर्जी मुठभेड़ से पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस सरकार के दौरान हुई कई मुठभेड़ सवालों के घेरे में हैं। अब बीजेपी के शासन में ये फर्जी मुठभेड़ सुर्खियां बटोर रही है। चिल्फी में नक्सलियों की आवाजाही नई नहीं है। मध्यप्रदेश के बालाघाट से सटी सीमा पर अंतर्राज्यीय नक्सली संगठन अपने पैर जमाए हुए हैं। इलाके में कई मुठभेड़ भी हो चुकी हैं।
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केस डायरी के मुताबिक कवर्धा के वरिष्ठ अधिकारियों ने सिर्फ 5 जवानों को नक्सलियों से भिड़ने के लिए घने जंगलों में भेजा था। जवानों ने भी मोर्चा संभालते हुए नक्सलियों को खदेड़ दिया। बोडला एरिया कमेटी के समर, नवीन और जरीना समेत अन्य 5 नक्सली मौके पर मौजूद थे। पुलिस ने उन्हें सरेंडर के लिए कहा पर नक्सलियों ने DSB जवानों पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। 15-20 मिनट की मुठभेड़ के बाद नक्सली भाग गए। पुलिस ने सामान बरामद किया और उसकी तस्वीरें भी जारी की।
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DSB के जवानों को नहीं दिए जाते हथियार
माराड़भरा इलाके में ये मुठभेड़ हुई। देश में ऐसा कोई राज्य नहीं है, जहां DSB यानी विशेष असूचना शाखा के अधिकारी हथियार के साथ सर्चिंग करते हों। इसके अधिकारी अपनी गोपनीयता बनाए रखने के लिए खाकी वर्दी भी नहीं पहनते। इन्हें मुठभेड़ के लिए तैयार भी नहीं किया जाता है और न ही हथियार दिए जाते हैं। इसलिए DSB के जवानों के नक्सलियों को खदेड़ने की बात पर लोग हैरानी जता रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ में 1,47,500 करोड़ का बजट, कोई नया टैक्स नहीं, शिक्षा-स्वास्थ्य-नौकरी पर फोकस, 'GYAN' पर केंद्रित बजट
जांच में जुटी पुलिस
DSB जवान-नक्सली मुठभेड़ पर सवाल उठने के बाद पुलिस का एक वर्ग इसकी जांच में जुटा है। फर्जी मुठभेड़ से पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस सरकार के दौरान हुई कई मुठभेड़ सवालों के घेरे में हैं। अब बीजेपी के शासन में ये फर्जी मुठभेड़ सुर्खियां बटोर रही है। चिल्फी में नक्सलियों की आवाजाही नई नहीं है। मध्यप्रदेश के बालाघाट से सटी सीमा पर अंतर्राज्यीय नक्सली संगठन अपने पैर जमाए हुए हैं। इलाके में कई मुठभेड़ भी हो चुकी हैं।
CG के स्कूल मेंटेनेंस में 800 करोड़ खर्च, स्कूल शिक्षा विभाग के हवाले
PCC ने बनाई कार्यक्रम समन्वयक समिति, क्या है इस समिति का काम
केस डायरी में क्या है ?
केस डायरी के मुताबिक कवर्धा के वरिष्ठ अधिकारियों ने सिर्फ 5 जवानों को नक्सलियों से भिड़ने के लिए घने जंगलों में भेजा था। जवानों ने भी मोर्चा संभालते हुए नक्सलियों को खदेड़ दिया। बोडला एरिया कमेटी के समर, नवीन और जरीना समेत अन्य 5 नक्सली मौके पर मौजूद थे। पुलिस ने उन्हें सरेंडर के लिए कहा पर नक्सलियों ने DSB जवानों पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। 15-20 मिनट की मुठभेड़ के बाद नक्सली भाग गए। पुलिस ने सामान बरामद किया और उसकी तस्वीरें भी जारी की।
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