सस्पेंड होने पर भूपेश की शरण में पहुंचे CEO रुपेश पांडे, पंजा छाप अफसर डाल रहे थे सुशासन में रोड़ा
Arun Tiwari | Jun 02, 2026, 17:43 IST
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दुर्ग जनपद के CEO रुपेश पांडे का 'सुशासन तिहार' में अभद्र भाषा का वीडियो वायरल होने पर CM ने "जनता ही भगवान है" कह सस्पेंड किया। इसके बाद पांडे पूर्व CM भूपेश बघेल के दरबार पहुंचे, जिससे छत्तीसगढ़ की सियासत का पारा चढ़ गया है।
छत्तीसगढ़ सरकार के निलंबन के बाद दुर्ग जनपद पंचायत के सीईओ रुपेश पांडे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की शरण मे पहुंच गए। सोमवार दोपहर को उनका ऑर्डर हुआ और शाम को वे भूपेश बघेल के साथ खिलखिलाते हुए नजर आए मानो उनको मन की मुराद मिली हो। वे क्यों गए यह तो वही जाने लेकिन उनकी इस मुलाकात के वीडियो ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग तो यहां तक कहने लगे हैं कि रुपेश पांडे पर शायद किसी का हाथ था जो वे न जनता से डरते थे न ही अधिकारियों से। वहीं छत्तीसगढ़ में सुशासन है, यह सरकार दावा करती है।
सरकार का कहना है तो हम भी मान लेते हैं। लेकिन सुशासन की चाल पर संदेह है। इसकी चाल बहुत धीमी है। एक साल पहले सुशासन तिहार के दौरान दुर्ग की जनपद अध्यक्ष ने सीईओ रूपेश पांडे की शिकायत की। शिकायत पर कार्रवाई एक साल बाद हुई। कुछ दिन पहले बीजेपी विधायक ने भी सीईओ को हटाने के लिए सीएम को पत्र लिखा। तब भी कुछ नहीं हुआ। अब जाकर रूपेश पांडे के खिलाफ एक्शन हुआ।
छत्तीसगढ़ की दुर्ग जनपद पंचायत के सीईओ रुपेश पांडे की सुशासन तिहार में लोगों से अभद्र भाषा का वीडियो वायरल होता है और सरकार उनको सस्पेंड कर देती है। इस निलंबन के बाद रुपेश पांडे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दरवाजे पर पहुंच जाते हैं। अकेले में जो भी बात हुई हो लेकिन सार्वजनिक तौर पर जो वीडियो आया है उसमें वे बघेल के साथ हंसते खिलखिलाते नजर आ रहे हैं। अब सवाल यह उठने लगा है कि रुपेश पांडे आखिर भूपेश बघेल से मिलने क्यों गए। कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला कहते हैं कि जो भी प्रताड़ित होता है वो भूपेश बघेल के पास अपनी व्यथा सुनाने पहुंच जाता है।
पांडे तो बीजेपी के खास अफसर रहे हैं,वे तो बीजेपी के ही आदमी कहलाते थे। लेकिन प्रताड़ित होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के पास आए। भूपेश बघेल के दरवाजे सबके लिए खुले हैं। वहीं बीजेपी प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कहा कि 45 डिग्री के तापमान में मुख्यमंत्री सहित जनप्रतिनिधिगण का सुशासन तिहार के माध्यम से जनता की समस्याओं सुनना और समाधान करना कांग्रेस को नागवार गुजरा।कुछ पंजा छाप अधिकारियों को कांग्रेस ने इस कार्य में बाधा डालने का ठेका भी दिया जिसे रूपेश पांडे ने प्रमाणित भी किया।निलंबित होते ही वह भूपेश बघेल के पास गए।किसी दल की विचारधारा से प्रेरित होना बुरा नहीं परंतु काम पर उसका असर होना बुरा है।
इस पूरे घटनाक्रम में एक और खास बात है। बीजेपी कार्यकर्ताओं से बदसुलूकी का वीडियो सामने आया तब पांडे पर एक्शन हुआ। लेकिन यह पूरा मामला तो एक साल पुराना है। 2025 के सुशासन तिहार के समय दुर्ग जनपद की अध्यक्ष कुलेश्वरी देवांगन ने भी सरकार से यही गुहार लगाई थी। देवांगन ने सरकार से रुपेश पांडे की शिकायत की थी। इस शिकायत में कहा गया था कि रुपेश पांडे का बर्ताव बीजेपी कार्यकर्ताओं के लिए ठीक नहीं है।
पत्र में लिखा कि पांडे ने कहा कि मैं मंडल अध्यक्ष को नहीं जानता,जो उखाड़ना है उखाड़ लो। वे कर्मचारियों और लोगों से अभद्र व्यवहार करते हैं। कमीशन के लिए ठेकेदार को रखा है। जनपद पंचायत अध्यक्ष ने पांडे के तबादले की मांग की थी। लेकिन यह बात आई गई हो गई। पिछले सुशासन तिहार से इस साल का सुशासन तिहार आ गया। एक साल बाद अब जाकर सुशासन का एक्शन हुआ है।
बीजेपी विधायक ललित चंद्राकर ने भी सीएम को 16 मई को चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में तत्कालीन सीईओ रुपेश पांडे का तबादला करने की गुहार लगाई गई थी। ललित चंद्राकर ने नए प्रभारी की भी सिफारिश कर दी थी। इस चिट्ठी का भी कोई असर नहीं हुआ। उल्टा ये और हो गया कि ललित चंद्राकर के सामने ही पांडे ने उनके कार्यकर्ताओं को खरी खोटी सुना दी। ललित चंद्राकर खड़े होकर सुनते रहे।
अब कांग्रेस कहती है कि आखिर विधायक मौन क्यों रहे हो सकता है उनके कार्यकर्ताओं की ही कोई गलती हो। अमित चिमनानी कहते हैं कि रूपेश पांडे एवं सभी अधिकारीगण का दायित्व जनता की सेवा करना है उन्हें धमकाना नहीं।रूपेश पांडे के खिलाफ कुछ शिकायतें पहले भी आई थी समय समय पर उन्हें अपना जनता के कार्यों को गंभीरता से लेने आगाह भी किया गया था एवं अब जब वो सार्वजनिक स्थानों पर भी मर्यादाएं तोड़ने लगे ,जनता को धमकाने लगे ,यह आचरण स्वीकारयोग्य नहीं है इसलिए उनको निलंबित किया गया है।
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सरकार का कहना है तो हम भी मान लेते हैं। लेकिन सुशासन की चाल पर संदेह है। इसकी चाल बहुत धीमी है। एक साल पहले सुशासन तिहार के दौरान दुर्ग की जनपद अध्यक्ष ने सीईओ रूपेश पांडे की शिकायत की। शिकायत पर कार्रवाई एक साल बाद हुई। कुछ दिन पहले बीजेपी विधायक ने भी सीईओ को हटाने के लिए सीएम को पत्र लिखा। तब भी कुछ नहीं हुआ। अब जाकर रूपेश पांडे के खिलाफ एक्शन हुआ।
भूपेश से क्यों मिले रुपेश :
पांडे तो बीजेपी के खास अफसर रहे हैं,वे तो बीजेपी के ही आदमी कहलाते थे। लेकिन प्रताड़ित होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के पास आए। भूपेश बघेल के दरवाजे सबके लिए खुले हैं। वहीं बीजेपी प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कहा कि 45 डिग्री के तापमान में मुख्यमंत्री सहित जनप्रतिनिधिगण का सुशासन तिहार के माध्यम से जनता की समस्याओं सुनना और समाधान करना कांग्रेस को नागवार गुजरा।कुछ पंजा छाप अधिकारियों को कांग्रेस ने इस कार्य में बाधा डालने का ठेका भी दिया जिसे रूपेश पांडे ने प्रमाणित भी किया।निलंबित होते ही वह भूपेश बघेल के पास गए।किसी दल की विचारधारा से प्रेरित होना बुरा नहीं परंतु काम पर उसका असर होना बुरा है।
सुशासन की कछुआ चाल :
पत्र में लिखा कि पांडे ने कहा कि मैं मंडल अध्यक्ष को नहीं जानता,जो उखाड़ना है उखाड़ लो। वे कर्मचारियों और लोगों से अभद्र व्यवहार करते हैं। कमीशन के लिए ठेकेदार को रखा है। जनपद पंचायत अध्यक्ष ने पांडे के तबादले की मांग की थी। लेकिन यह बात आई गई हो गई। पिछले सुशासन तिहार से इस साल का सुशासन तिहार आ गया। एक साल बाद अब जाकर सुशासन का एक्शन हुआ है।
बीजेपी विधायक की चिट्ठी :
अब कांग्रेस कहती है कि आखिर विधायक मौन क्यों रहे हो सकता है उनके कार्यकर्ताओं की ही कोई गलती हो। अमित चिमनानी कहते हैं कि रूपेश पांडे एवं सभी अधिकारीगण का दायित्व जनता की सेवा करना है उन्हें धमकाना नहीं।रूपेश पांडे के खिलाफ कुछ शिकायतें पहले भी आई थी समय समय पर उन्हें अपना जनता के कार्यों को गंभीरता से लेने आगाह भी किया गया था एवं अब जब वो सार्वजनिक स्थानों पर भी मर्यादाएं तोड़ने लगे ,जनता को धमकाने लगे ,यह आचरण स्वीकारयोग्य नहीं है इसलिए उनको निलंबित किया गया है।
FAQ
- रुपेश पांडे को क्यों सस्पेंड किया गया?
उत्तर: सुशासन तिहार में ग्रामीणों से अभद्र भाषा में बात करने का वीडियो वायरल होने पर। - सुशासन दिवस (तिहार) भारत में किसकी जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है?
Ans: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती (25 दिसंबर) के उपलक्ष्य में। - प्रशासनिक शब्दावली में जनपद पंचायत पंचायती राज व्यवस्था का कौन सा स्तर है?
Ans: यह पंचायती राज व्यवस्था का मध्यवर्ती (दूसरा) स्तर है, जो ब्लॉक (विकासखंड) स्तर पर कार्य करता है।
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