पहले शिक्षक भर्ती कीजिए फिर फरमान सुनाइए, मास्साब के अंदर भरा सिस्टम पर गुस्सा
Arun Tiwari | Jun 30, 2026, 15:24 IST
पहले शिक्षक भर्ती करो फिर नए फरमान सुनाओ
छत्तीसगढ़ के सरकारी शिक्षक स्कूलों में स्टाफ की कमी, ऑनलाइन हाजिरी, गैर-शैक्षणिक ड्यूटी और शनिवार को पूरे दिन उपस्थिति जैसे आदेशों से नाराज हैं। उनका कहना है कि सरकार पहले रिक्त पद भरे और पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए, तभी नई व्यवस्थाएं लागू हों।
क्यों गुस्सा हैं गुरुजी
शिक्षकों की यह नाराजगी सोशल मीडिया पर बने उनके ग्रुप में सामने आई है। नया शिक्षा सत्र शुरु हो गया है लेकिन स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। इसके बाद भी सरकार शिक्षा में नए नए प्रयोग कर रही है। इन सब बातों को लेकर शिक्षक अपने ग्रुप में खुलकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
सिस्टम से नाराज शिक्षक
शिक्षकों का कहना है कि सरकार पहले खाली पद भरने पर ध्यान दे, उसके बाद समय-सारणी और नई व्यवस्थाओं की बात करे। इन दिनों टीचर्स ग्रुप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रही चर्चाओं में सबसे बड़ा मुद्दा शिक्षकों की कमी बनकर उभरा है। शिक्षकों का कहना है
कि प्रदेश के कई माध्यमिक और हाई स्कूल ऐसे हैं जहां एक या दो शिक्षक ही पूरी व्यवस्था संभाल रहे हैं। उन्हें एक साथ अलग-अलग विषय पढ़ाने, परीक्षा कार्य कराने, रिकॉर्ड तैयार करने और विभागीय निर्देशों का पालन करने जैसी कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई की उम्मीद करना व्यवहारिक नहीं है।
पहले शिक्षकों की कमी पूरी हो
जब तक नियमित भर्ती पूरी नहीं होती, तब तक संविदा के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति कर व्यवस्था को संभाला जा सकता है। केवल शिक्षकों की संख्या ही नहीं, बल्कि स्कूलों के संचालन का तरीका भी असंतोष का कारण बन रहा है। जिन विद्यालयों में एक ही शिक्षक माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक दोनों स्तरों की कक्षाएं देख रहा है, वहां अलग-अलग पालियों में पढ़ाई कराना बड़ी चुनौती बन गया है।
शिक्षकों का कहना है कि ऐसे स्कूलों में एकल पाली व्यवस्था लागू की जाए, ताकि उपलब्ध शिक्षक बेहतर तरीके से विद्यार्थियों को पढ़ा सकें। उनका कहना है कि बिना संसाधन बढ़ाए केवल समय-सारणी बदल देने से न तो शिक्षक का बोझ कम होगा और न ही बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी।
शनिवार को उपस्थिति जरुरी
शिक्षकों का मानना है कि यह केवल सुविधा का प्रश्न नहीं, बल्कि सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों और कार्य-जीवन संतुलन का भी मुद्दा है। वहीं शिक्षक संगठनों की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में आ गई है।
कई शिक्षकों का आरोप है कि संगठन वास्तविक मुद्दों पर अपेक्षित दबाव बनाने के बजाय औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित होते जा रहे हैं। कुछ पदाधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया और शिक्षक समूहों में उठ रही आवाजें संगठन तक पहुंच रही हैं और इन्हें विभाग के सामने मजबूती से रखने की तैयारी की जानी चाहिए।
क्या कहतें हैं एक्सपर्ट
इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और सीखने की गुणवत्ता पर दिखाई देता है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार और विभाग को शिक्षक और विद्यार्थी को आमने-सामने खड़ा करने के बजाय शिक्षा व्यवस्था की मूल समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। यदि समय रहते रिक्त पदों पर नियुक्तियां, कार्यभार का बंटवारा और बेहतर कार्य परिस्थितियां हों तो इसका सबसे बड़ा लाभ बच्चों को मिलेगा।
IMP FACTS
स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी सबसे बड़ा मुद्दा है।
कई स्कूल केवल एक या दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं।
शिक्षकों पर पढ़ाई के साथ रिकॉर्ड, परीक्षा और सरकारी कार्यों का बोझ है।
शिक्षक पहले रिक्त पद भरने और फिर नई व्यवस्थाएं लागू करने की मांग कर रहे हैं।
माध्यमिक स्कूलों में कम से कम 4 शिक्षक नियुक्त करने की मांग है।
हाई स्कूलों में प्रधानाचार्य सहित 6 व्याख्याता मांगे गए हैं।
उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में प्रधानाचार्य सहित 17 व्याख्याताओं की मांग है।
नियमित भर्ती तक संविदा शिक्षकों की नियुक्ति का सुझाव दिया गया है।
एकल शिक्षक वाले स्कूलों में एक पाली की व्यवस्था की मांग है।
शनिवार को पूरे दिन स्कूल लगाने के आदेश से भी नाराजगी बढ़ी है।
शिक्षकों का कहना है कि स्टाफ की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
FAQ
- छत्तीसगढ़ के शिक्षक सरकार से नाराज क्यों हैं?
शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इसके बावजूद ऑनलाइन हाजिरी, ड्रॉपआउट बच्चों की तलाश, सरकारी ड्यूटी और नए आदेश लगातार लागू किए जा रहे हैं। - शिक्षक स्कूलों में कितने स्टाफ की मांग कर रहे हैं?
शिक्षकों की मांग है कि माध्यमिक स्कूलों में कम से कम चार शिक्षक, हाई स्कूलों में प्रधानाचार्य सहित छह व्याख्याता और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में 17 व्याख्याता नियुक्त किए जाएं। - शनिवार को पूरे दिन स्कूल लगाने के आदेश का विरोध क्यों हो रहा है?
शिक्षकों का कहना है कि शनिवार को बैंक, सरकारी कार्यालय और पारिवारिक काम निपटाए जाते हैं। पूरे दिन स्कूल में उपस्थिति अनिवार्य होने से उनका कार्य-जीवन संतुलन प्रभावित होगा।
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