जेब में पैसे, फोन में UPI, फिर भी छत्तीसगढ़ में RTI लगाना नामुमकिन

Aishwarya Dwivedi | Apr 19, 2026, 10:19 IST
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छत्तीसगढ़ ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल पर नेट बैंकिंग से 10 रुपये फीस जमा करने की अनिवार्यता है। जो लोगों के लिए बड़ी बाधा बन गई है। यूपीआई विकल्प न होने से हजारों आवेदन अधूरे लटके हैं।

NEWS IN SHORT

  • आरटीआई शुल्क भुगतान में केवल नेट बैंकिंग विकल्प उपलब्ध
  • यूपीआई और क्यूआर कोड सुविधा का अभाव बना समस्या
  • इंटरनेट बैंकिंग न होने से लोग आवेदन नहीं कर पा रहे
  • अन्य राज्यों में यूपीआई से आसान शुल्क भुगतान व्यवस्था
  • सूचना आयोग ने जल्द सुधार का दिया आश्वासन

NEWS IN DETAIL

आज के दौर में जब गली-मोहल्ले के छोटे दुकानदार से लेकर बड़े मॉल तक 10-20 रुपये का भुगतान एक क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन करके सेकंडों में हो जाता है, वहीं छत्तीसगढ़ में सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगना किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं है। राज्य के ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल पर महज 10 रुपये की फीस जमा करने के लिए आधुनिक भुगतान विकल्पों का न होना आम जनता के लिए एक बड़ी दीवार बन गया है।

नेट बैंकिंग की अनिवार्यता बनी सिरदर्द

छत्तीसगढ़ सरकार के ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल ([https://rtionline.cg.gov.in/](https://rtionline.cg.gov.in/)) पर पंजीकरण से लेकर आवेदन भरने तक की प्रक्रिया तो आसान है, लेकिन असली बाधा अंतिम चरण में आती है। वर्तमान में पोर्टल पर आवेदन शुल्क जमा करने के लिए केवल नेट बैंकिंग का विकल्प दिया गया है।

जहां आज के स्मार्टफोन युग में अधिकांश लोग यूपीआई (UPI), गूगल पे या फोन पे का उपयोग करते हैं। बहुत कम लोग ऐसे हैं जो नेट बैंकिंग का आईडी-पासवर्ड याद रखते हैं या इसका उपयोग करते हैं। ऐसे में जिनके पास इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा नहीं है, वे चाहकर भी अपना आवेदन सबमिट नहीं कर पा रहे हैं। कई आवेदक पोर्टल पर लॉगिन कर पूरी जानकारी भरते हैं, विभाग चुनते हैं और दस्तावेज भी अपलोड करते हैं, लेकिन 10 रुपये के भुगतान के अभाव में उनका आवेदन ड्राफ्ट में ही रह जाता है।

लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन

आरटीआई कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों का आरोप है कि भुगतान की यह जटिल प्रक्रिया कहीं न कहीं सूचना तक पहुंच को सीमित करने का काम कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब देश के लगभग हर सरकारी विभाग, बिजली बिल भुगतान और प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरने में क्यूआर कोड की सुविधा उपलब्ध है, तो सूचना आयोग जैसे महत्वपूर्ण विभाग में इसे अब तक क्यों नहीं जोड़ा गया?

ओडिशा, उत्तर प्रदेश, केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने पहले ही अपने आरटीआई पोर्टल को अपडेट कर लिया है, जहां क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान की सुविधा है। छत्तीसगढ़ में इस सुविधा के न होने से ग्रामीण क्षेत्रों के लोग और तकनीक से कम परिचित वर्ग सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है।

हजारों आवेदन अटके

पोर्टल के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि हजारों लोगों ने वेबसाइट पर पंजीकरण तो कराया है, लेकिन सफल आवेदनों की संख्या उसकी तुलना में कम है। इसका एक बड़ा कारण 'पेमेंट फेलियर' या 'पेमेंट मोड' का न होना बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार एक तरफ डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ अपनी ही सेवाओं में पुराने और सीमित विकल्पों को थोप रही है।

आयोग का आश्वासन: जल्द बदलेगी व्यवस्था

इस तकनीकी समस्या पर छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग की सचिव नीलम नामदेव एक्का ने संज्ञान लिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा की चुनाव ड्यूटी की व्यस्तता के चलते प्रक्रिया में थोड़ी देरी हो रही है। जल्द ही तकनीकी विभाग को निर्देश देकर पोर्टल पर क्यूआर कोड और यूपीआई आधारित भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

निष्कर्ष

सूचना का अधिकार (RTI) लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ है। यदि महज 10 रुपये की फीस जमा करने जैसी छोटी सी तकनीकी बाधा के कारण लोग जानकारी हासिल नहीं कर पा रहे हैं, तो यह सिस्टम की विफलता है। उम्मीद है कि शासन जल्द ही पोर्टल को 'यूजर फ्रेंडली' बनाएगा ताकि डिजिटल इंडिया का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

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