महिला बाल विकास विभाग में भ्रष्टाचार, रेडी-टू-ईट से कन्या विवाह तक गड़बड़ी

VINAY VERMA | Jul 18, 2026, 12:17 IST
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WCD-भ्रष्टाचार-रेडी-टू-ईट-विवाह-घोटाला
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रायपुर के धरसींवा में महिला एवं बाल विकास विभाग की अफसर स्नेहलता गौतम पर पोषण आहार और कन्या विवाह योजना में वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं, जो जांच में सही पाए गए।

समझें क्या है पूरा मामला

  • पोषण राशि सभी केंद्रों तक नहीं पहुंची।
  • हॉट कुक्ड मील में वसूली के आरोप।
  • ढुलाई खर्च सहायिकाओं से भरवाने का दावा।
  • कन्या विवाह योजना में अवैध वसूली की शिकायत।
  • जांच में आरोप सही मिले, कार्रवाई अब भी अधूरी।

आंगनबाड़ी व्यवस्था पर सवाल

महिला एवं बाल विकास विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला सिर्फ अनियमितता का नहीं, बल्कि बच्चों के हक, आंगनबाड़ी व्यवस्था और जांच रिपोर्ट को दबाने के आरोपों तक पहुंच गया है। धरसींवा-1 की परियोजना अधिकारी स्नेहलता गौतम को विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में दर्ज आरोप बेहद गंभीर हैं। खास बात यह है कि संभागीय संयुक्त संचालक की जांच में शिकायतों को प्रथम दृष्टया सही भी पाया गया। इसके बावजूद अब तक अंतिम कार्रवाई नहीं होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

रेडी-टू-ईट से लेकर पोषण योजना तक सवाल

पोषण योजना के तहत प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को 1500 रुपये दिए जाने थे। लेकिन आरोप है कि यह राशि सभी केंद्रों तक नहीं पहुंची। केवल 112 केंद्रों को ही भुगतान किया गया। इससे बाकी केंद्रों के बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ा। आरोप यह भी है कि बच्चों के पोषण से जुड़ी योजनाओं के संचालन में गंभीर लापरवाही बरती गई।

हॉट कुक्ड मील में भी वसूली का खेल

शिकायतों में दावा किया गया है कि जनवरी और फरवरी 2026 में आयोजित हॉट कुक्ड मील कार्यक्रम के दौरान 28 आंगनबाड़ी केंद्रों से दो-दो बार 56 रुपये यानी कुल 112 रुपये प्रति केंद्र वसूले गए। इतना ही नहीं, सहायिकाओं को राशन ढुलाई का खर्च अपनी जेब से उठाने के लिए मजबूर किया गया। आरोप है कि परिवहन मद की राशि में भी 50 प्रतिशत हिस्सा मांगा जाता था। यदि ये आरोप सही हैं तो सवाल सिर्फ गड़बड़ी का नहीं, बल्कि सरकारी योजना में वसूली के संगठित खेल का है।

महिला बाल विकास विभाग में भ्रष्टाचार
महिला बाल विकास विभाग में भ्रष्टाचार


कन्या विवाह योजना भी नहीं बची

नोटिस में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का भी जिक्र है। आरोप है कि इस योजना के आयोजन के दौरान 5 हजार से 10 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि कार्यक्रम के बाद बची सामग्री में से अपने घर के लिए साड़ी तक मांगने का दबाव बनाया गया। यदि जांच में ये तथ्य साबित होते हैं तो यह सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।

जांच में आरोप सही, फिर कार्रवाई क्यों नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यहीं खड़ा होता है। विभाग के नोटिस में साफ लिखा है कि संभागीय संयुक्त संचालक की जांच में शिकायतें प्रथम दृष्टया सत्य पाई गई हैं। यानी जांच एजेंसी ने आरोपों को पूरी तरह खारिज नहीं किया। इसके बावजूद अब तक अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई सामने नहीं आई। विभाग ने केवल कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि जांच रिपोर्ट के बाद भी फैसला लंबित क्यों है? बच्चों के हक का अनाज खाने वालों पर कार्रवाई क्यो नहीं हो रही?

नहीं दिया जवाब तो एकतरफा कार्रवाई

महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्नेहलता गौतम को 15 दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए थे। नोटिस में साफ कहा गया था कि समय पर जवाब नहीं मिलने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम के तहत एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन एक महीने से ज्यादा हो चुके हैं।

अब विभाग की जवाबदेही पर नजर

यह मामला सिर्फ एक परियोजना अधिकारी तक सीमित नहीं रह गया। सवाल पूरे सिस्टम पर उठ रहे हैं। यदि जांच रिपोर्ट में शिकायतें सही मिली थीं, तो कार्रवाई में देरी क्यों हो हुई? क्या विभाग अपने ही अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रहा हैै? अब सभी की नजर विभाग के अगले कदम पर टिकी है। अंतिम फैसला ही तय करेगा कि बच्चों और आंगनबाड़ी व्यवस्था से जुड़े इस मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

FAQ

  1. स्नेहलता गौतम कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
    उत्तर: स्नेहलता गौतम रायपुर के धरसींवा-1 में महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी हैं। उन पर रेडी-टू-ईट, हॉट कुक्ड मील और मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं।
  2. छत्तीसगढ़ में 'मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना' का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    उत्तर: इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब, निराश्रित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इसके तहत सामूहिक विवाह का आयोजन किया जाता है ताकि फिजूलखर्ची को रोका जा सके।
  3. छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम के तहत किसी शासकीय अधिकारी को 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) क्यों जारी किया जाता है?
    उत्तर: जब किसी शासकीय सेवक पर कर्तव्यों में लापरवाही, वित्तीय अनियमितता या अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप लगते हैं, तो एकपक्षीय कार्रवाई से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का वैधानिक अवसर देने के लिए यह नोटिस जारी किया जाता है।

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