महिला एवं बाल विकास विभाग में रात गुजारने का ऑफर, जांच में सही मिले आरोप
VINAY VERMA | Jul 03, 2026, 17:34 IST
महिला एवं बाल विकास विभाग में छेड़छाड़ 2026
छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग में दंतेवाड़ा के तत्कालीन DPO पर दो महिला कर्मचारियों ने लैंगिक उत्पीड़न के आरोप लगाए। जांच में आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना, जिसके बाद उन्हें निलंबित किया गया। अब निलंबन के बाद नई पोस्टिंग पर सवाल उठ रहें हैं।
छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग से ऐसी जांच रिपोर्ट सामने आई है, जिसने सरकारी दफ्तरों में महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दंतेवाड़ा में पदस्थ तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) वरुण नागेश पर दो महिला कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न के आरोप लगाए। छह सदस्यीय आंतरिक शिकायत समिति ने जांच की।
समिति ने आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना। इसके बाद विभाग ने उन्हें निलंबित किया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। निलंबन के दौरान ही उनका तबादला पहले जगदलपुर और फिर रायपुर कर दिया गया। इधर दंतेवाड़ा कलेक्टर देवेश ध्रुव कह रहे हैं कि उनका ट्रांसफर मेरे जिले से बाहर हो गया है, इसलिए इस संबंध में कुछ नहीं बोलना...
जांच रिपोर्ट के मुताबिक पहली शिकायत एक संविदा महिला कर्मचारी ने की। महिला ने बताया कि डीपीओ ने उसे केबिन में बुलाया। कहा कि कलेक्टर उसका अनुबंध नहीं बढ़ाना चाहते। कारण पूछने पर कथित तौर पर कहा, मेरे साथ रात में कहीं चलो… मेरे घर आओ। महिला ने विरोध किया और रोते हुए कमरे से बाहर निकल गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपी पहले भी शारीरिक बनावट पर टिप्पणी करते थे। पानी, खाना और लंच के बहाने बार-बार केबिन में बुलाते थे।
दूसरी महिला अधिकारी ने समिति को बताया कि मार्च क्लोजिंग के काम का बहाना बनाकर उन्हें रविवार को कार्यालय बुलाया गया। पहले सामान्य बातचीत हुई। फिर कथित तौर पर आरोपी ने कहा, आज रात यहीं रुकना है…मेरे साथ। महिला ने मना किया तो जवाब मिला, तुम्हारे पति तो यहां रहते नहीं हैं। महिला भी रोते हुए कार्यालय से घर लौट गई। रिपोर्ट में दर्ज है कि आरोपी महिला के पारिवारिक हालात की जानकारी का भी कथित तौर पर गलत फायदा उठाने की कोशिश करता था।
जांच सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं रही। समिति ने कई कर्मचारियों और अधिकारियों के बयान दर्ज किए। कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी देखे गए। रिपोर्ट में कहा गया कि स्वतंत्र गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों से शिकायतों की पुष्टि होती है। समिति ने माना कि दोनों मामलों में लैंगिक अनुकूलता की मांग की गई। यह मामला कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के दायरे में आता है।
पूरी जांच के दौरान वरुण नागेश ने सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पहली महिला को केवल अनुबंध और वेतन संबंधी जानकारी देने के लिए बुलाया था। दूसरी महिला को मार्च क्लोजिंग के काम से कार्यालय बुलाया गया था। उन्होंने रात रुकने या आपत्तिजनक टिप्पणी करने की बात से साफ इनकार किया। हालांकि समिति ने उनके तर्कों को स्वीकार नहीं किया।
नायब तहसीलदार गरिमा प्रधान की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी। रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने वरुण नागेश को निलंबित कर दिया। उन्होंने निलंबन और जांच रिपोर्ट को अदालत में चुनौती दी। इसी बीच निलंबन अवधि में उनका तबादला क्षेत्रीय महिला प्रशिक्षण संस्थान, जगदलपुर कर दिया गया। बाद में उन्हें रायपुर बुलाकर राज्य स्तरीय संसाधन केंद्र में उप संचालक की जिम्मेदारी दे दी गई। सूत्रों के मुताबिक इस तबादले के लिए उच्च स्तर पर अनुशंसा भी हुई।
महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान का जिम्मा संभालता है। ऐसे विभाग में ही लैंगिक उत्पीड़न के आरोप सही पाए जाना गंभीर मामला है। इससे बड़ा सवाल यह है कि जिस अधिकारी के खिलाफ आंतरिक समिति ने आरोप सही माने, उसे निलंबन के दौरान ही नई जिम्मेदारी कैसे मिल गई? क्या जांच रिपोर्ट का असर सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया? या फिर सिस्टम ने आरोपी अफसर को बचाने का रास्ता निकाल लिया?
अश्लील मैसेज भेजता था प्रोफेसर, पिटाई की बाद विभागीय जांच की तलवार
बुजुर्गों को फंसाने वाली हनी ट्रैप गिरोह का भांडाफोड़, अश्लील वीडियो बनाकर करते थे ब्लैकमेल
यौन उत्पीड़न मामले में DGP ने 2 IPS की जांच टीम बनाई, CM साय बोले-गलती की माफी नहीं मिलेगी
आईपीएस रतनलाल डांगी पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप, योग प्रशिक्षिका के आरोप पर जांच शुरू
समिति ने आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना। इसके बाद विभाग ने उन्हें निलंबित किया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। निलंबन के दौरान ही उनका तबादला पहले जगदलपुर और फिर रायपुर कर दिया गया। इधर दंतेवाड़ा कलेक्टर देवेश ध्रुव कह रहे हैं कि उनका ट्रांसफर मेरे जिले से बाहर हो गया है, इसलिए इस संबंध में कुछ नहीं बोलना...
कलेक्टर अनुबंध नहीं बढ़ा रहे... रात मेरे साथ गुजारो
पति यहां नहीं रहते... मेरे साथ रात रुको
गवाह और कॉल डिटेल्स ने पलटा मामला
आरोप नकारे, लेकिन जांच में नहीं मिली राहत
जांच के बाद निलंबन, फिर रायपुर पोस्टिंग
अब उठ रहे बड़े सवाल
5 बड़ी बातें
- 6 सदस्यीय समिति ने जांच में आरोपों को सही माना।
- दो महिला कर्मचारियों ने लैंगिक उत्पीड़न के आरोप लगाए।
- गवाहों और कॉल डिटेल्स को समिति ने महत्वपूर्ण माना।
- निलंबन के बाद जगदलपुर और फिर रायपुर पोस्टिंग मिली।
- महिला एवं बाल विकास विभाग में महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल ।
ये खबरें भी पढ़ें...
बुजुर्गों को फंसाने वाली हनी ट्रैप गिरोह का भांडाफोड़, अश्लील वीडियो बनाकर करते थे ब्लैकमेल
यौन उत्पीड़न मामले में DGP ने 2 IPS की जांच टीम बनाई, CM साय बोले-गलती की माफी नहीं मिलेगी
आईपीएस रतनलाल डांगी पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप, योग प्रशिक्षिका के आरोप पर जांच शुरू
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
By VINAY VERMA
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
By Ashish Bhardwaj