एमपी के 11 जिले सूखे की कगार पर, धार में 52 फीसदी कम बारिश, सीएम मोहन यादव से नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कर दी ये बड़ी मांग

Jitendra Shrivastava | Oct 06, 2026, 20:13 IST
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मध्यप्रदेश में बारिश की कमी से फील्ड सर्वे की मांग
मध्यप्रदेश में बारिश की कमी से फील्ड सर्वे की मांग

BHOPAL. मध्यप्रदेश में मौसम विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक 11 जिले सूखे की कगार पर हैं। इनमें इंदौर और उज्जैन भी शामिल हैं। आलीराजपुर में सबसे ज्यादा 52 फीसदी कम बारिश हुई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने धार को सूखा घोषित करने और खरीफ फसल सर्वे की मांग की है। सरकार फील्ड सर्वे के बाद फैसला लेगी।

मध्य प्रदेश मानसून 2026 का हाल

Madhya Pradesh Monsoon 2026 कमजोर रहा है। प्रदेश में सामान्य बारिश 37.3 इंच होती है। इस बार 35.8 इंच पानी गिरा। यह सामान्य से करीब 4 फीसदी कम है, लेकिन औसत पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। कुछ जिलों में हालत बहुत खराब है।

आलीराजपुर, धार और झाबुआ सबसे कम बारिश वाले टॉप-5 जिलों में हैं। आलीराजपुर सबसे नीचे है, जहां 52 फीसदी कम बारिश हुई। मध्यप्रदेश में कम बारिश का असर सिर्फ खेतों तक नहीं रुकेगा। आलीराजपुर जैसे जिलों में पीने के पानी पर भी असर होगा।

11 में से 9 जिले सूखाग्रस्त के पैमाने पर आ रहे हैं। ये हैं इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर। शाजापुर और पांढुर्णा इस पैमाने से सिर्फ 3 फीसदी दूर हैं।

पांढुर्णा में किसानों ने रोका काफिला

4 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पांढुर्णा पहुंचे थे। यहां किसानों ने उनका काफिला रोक लिया। उनके हाथों में सूखी और मुरझाई फसलें थीं। किसानों ने जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की। उन्होंने कृषि कर्ज माफ करने को भी कहा।

मुख्यमंत्री नीचे उतरे और किसानों की समस्याएं सुनीं। सोयाबीन, मूंग और मक्का समेत खरीफ (बारिश के मौसम की) फसलों को नुकसान हुआ है। आने वाले रबी (सर्दी की) फसल सीजन में पानी की दिक्कत ज्यादा हो सकती है।

10 साल में तीसरी बार ऐसे हालात

अब जरा पीछे चलते हैं। मध्यप्रदेश में सूखा 2015 के बाद अब 2026 में फिर बन रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 10 साल में तीसरी बार ऐसे हालात हैं। इस बार दोहरी मार है। बारिश छितराई रही और कुल पानी भी सामान्य से कम गिरा। पिछले साल 51 जिलों में कोटे से ज्यादा बारिश हुई थी। इस बार सिर्फ 25 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी गिरा है।

सूखा घोषित करने की प्रक्रिया

Drought Declaration Process यानी सूखा घोषित करने का तरीका सिर्फ बारिश पर नहीं टिका। बारिश की कमी के साथ बोवनी (बुआई) का रकबा देखा जाता है। फसल की स्थिति, मिट्टी की नमी, भूजल और जलाशयों का पानी भी परखा जाता है।

इसके बाद प्रभावित इलाकों में फील्ड सर्वे और ग्राउंड वेरिफिकेशन (जमीनी जांच) होता है। जिला प्रशासन रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजता है। शासन सभी रिपोर्ट और संकेतकों की जांच करके फैसला लेता है। फैसला होने पर प्रभावित जिले, तहसील या इलाके की अधिसूचना जारी होती है। खरीफ सूखे की घोषणा के लिए 31 अक्टूबर तक का प्रावधान है।

मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक बताते हैं कि पैमाना 26 फीसदी का है। सामान्य से इतनी कम बारिश पर सरकार जिले को सूखाग्रस्त घोषित करती है।

MP, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मौसम का बदला मिजाज: दिन में चुभती धूप, रात में गुलाबी ठंड | Weather Update: MP, Chhattisgarh and Rajasthan witness weather change: Scorching sun during the day, pleasant chill at night
Weather Update: MP, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मौसम ने बदली करवट, दिन में पड़ रही चुभती धूप, रात में गुलाबी ठंड
03 Oct 2026 ,
By Amresh Kushwaha
Weather Update: मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान से मानसून की विदाई शुरू हो गई है। तीनों राज्यों में दिन में तेज धूप और रात में ठंडक है। राजस्थान के पिलानी में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। वहीं एमपी के अमरकंटक में रात का पारा 17.1 डिग्री रहा। छत्तीसगढ़ में भी मौसम अब पूरी तरह सूखा रहने वाला है। अगले कुछ दिनों तक बारिश के आसार नहीं हैं।
Weather Update: मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान से मानसून की विदाई शुरू हो गई है। तीनों राज्यों में दिन में तेज धूप और रात में ठंडक है। राजस्थान के पिलानी में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। वहीं एमपी के अमरकंटक में रात का पारा 17.1 डिग्री रहा। छत्तीसगढ़ में भी मौसम अब पूरी तरह सूखा रहने वाला है। अगले कुछ दिनों तक बारिश के आसार नहीं हैं।

विशेषज्ञ बोले, अभी से करें इंतजाम

जिन जिलों में कम बारिश हुई, वहां पर सरकार को माइक्रो लेवल पर काम की शुरुआत कर देना चाहिए। पानी के इंतजाम, प्रतिबंध आदि पर अभी से नजर रखनी होगी।शैलेंद्र कुमार नायक, मौसम विशेषज्ञ
नायक के मुताबिक सर्दी के बाद गर्मी आने पर दिक्कतें ज्यादा होंगी। सभी जिलों की गिरदावरी रिपोर्ट (फसल खराबी का सरकारी ब्योरा) बनेगी। यह कलेक्टरों के जरिए राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग तक जाएगी।

मध्यप्रदेश में बारिश की कमी
मध्यप्रदेश में बारिश की कमी

उमंग सिंघार की चिट्ठी में क्या है

गंधवानी विधायक और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखा है। उमंग सिंघार की (Umang Singhar Letter) चिट्ठी में धार की कम बारिश और सिंचाई संकट का जिक्र है।

आदिवासी जिला, खेती पर टिकी आजीविका

धार आदिवासी बाहुल्य जिला है और यहां बड़ी संख्या में किसानों की आजीविका कृषि पर निर्भर है।उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष, मध्यप्रदेश विधानसभा
सिंघार के मुताबिक धार में पिछले साल से करीब 42 फीसदी कम बारिश हुई है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं है। सिंचाई के पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। रबी की बोनी प्रभावित होने की आशंका है। इससे किसानों पर आर्थिक संकट गहरा सकता है।

उमंग सिंघार की सरकार से ये मांग...

  • पहली: धार को सूखा प्रभावित घोषित करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो।
  • दूसरी: खरीफ फसल सर्वे कराकर किसानों के नुकसान का आकलन किया जाए।
  • तीसरी: प्रभावित किसानों को राहत पैकेज दिया जाए। चौथी, किसानों को पर्याप्त खाद और बीज उपलब्ध कराए जाएं।

नर्मदा का पानी जलाशयों तक पहुंचे

सिंघार ने बाग ब्लॉक में पाइपलाइन से नर्मदा का पानी पहुंचाने की मांग की है। यह पानी जलाशयों में डाला जाए, ताकि रबी की सिंचाई हो सके। उनकी सूची में इंदिरा गांधी जलाशय और ताराघाटी शामिल हैं। धायडी, खनिअंबा, बरेठा, गेटा और चामझर के जलाशय भी इसमें हैं।

मध्य भारत में थमा बारिश का दौर, राजस्थान में गर्मी के आसार, एमपी-सीजी में मानसून की विदाई | Rainfall stops in Central India, chances of heat in Rajasthan, monsoon withdrawal in MP-CG
Weather Update: मध्य भारत में थमा बारिश का दौर; एमपी-सीजी में विदाई, राजस्थान में गर्मी के आसार
01 Oct 2026 ,
By Amresh Kushwaha
Weather update: मध्य भारत में अब मानसून की विदाई का दौर शुरू हो चुका है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में अगले दो-तीन दिनों में मानसून विदा हो सकता है। मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में आज हल्की बूंदाबांदी के आसार जताए गए हैं। छत्तीसगढ़ में मौसम पूरी तरह सूखा रहेगा और धूप खिली रहेगी। वहीं राजस्थान में इस सीजन करीब बाईस प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है।
Weather update: मध्य भारत में अब मानसून की विदाई का दौर शुरू हो चुका है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में अगले दो-तीन दिनों में मानसून विदा हो सकता है। मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में आज हल्की बूंदाबांदी के आसार जताए गए हैं। छत्तीसगढ़ में मौसम पूरी तरह सूखा रहेगा और धूप खिली रहेगी। वहीं राजस्थान में इस सीजन करीब बाईस प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है।

आश्वासन नहीं, राहत चाहिए

सिंघार ने साफ कहा कि मांग सिर्फ धार तक सीमित नहीं है। जिन जिलों में कम बारिश से किसान प्रभावित हैं, वहां भी सर्वे हो। जरूरत हो तो उन्हें सूखा प्रभावित घोषित किया जाए।

संकट की इस घड़ी में किसानों को सरकार की राहत चाहिए, सिर्फ आश्वासन नहीं।उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष, मध्यप्रदेश विधानसभा

यह खबर क्यों जरूरी है

खेती पर निर्भर परिवारों के लिए बारिश सिर्फ मौसम की खबर नहीं है। यह बोनी, सिंचाई और कमाई का सवाल है। पांढुर्णा के किसान और नेता प्रतिपक्ष, दोनों सूखा घोषित करने की मांग कर चुके हैं। खरीफ सूखे की घोषणा के लिए 31 अक्टूबर तक का प्रावधान है। यह खबर बताती है कि फैसला किस प्रक्रिया से होगा। साथ ही बताती है कि किसानों की आवाज सरकार तक कैसे पहुंच रही है।

FAQ;

  1. मध्य प्रदेश में 2026 का मानसून कैसा रहा?
    मध्य प्रदेश में 2026 का मानसून कमजोर रहा, जहां सामान्य बारिश 37.3 इंच होती है, लेकिन इस बार 35.8 इंच बारिश हुई, जो सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम है।
  2. कम बारिश का मध्य प्रदेश के किसानों पर क्या असर पड़ा है?
    कम बारिश के कारण किसानों को सूखी और मुरझाई फसलें मिली हैं, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। पांढुर्णा के किसानों ने सूखा घोषित करने की मांग की है।
  3. सूखा घोषित करने की प्रक्रिया क्या है?
    सूखा घोषित करने की प्रक्रिया बारिश की कमी के अलावा बोवनी रकबा, फसल की स्थिति, मिट्टी की नमी, भूजल और जलाशयों के स्तर को परखने पर निर्भर करती है। प्रभावित इलाकों में फील्ड सर्वे और ग्राउंड वेरिफिकेशन किया जाता है, जिसके बाद जिला प्रशासन रिपोर्ट बनाता है।
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