आजीविका परियोजना: पोर्टल के इंतजार में दो साल से अटका SHG का ब्याज अनुदान
Ravi Awasthi | Jan 02, 2026, 23:46 IST
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भ्रष्टाचार के आरोपों से छवि सुधारने के प्रयास में MPSRLM के अधिकारी सतर्क हो गए हैं। इस सतर्कता का खामियाजा लाखों SHG की महिलाएं भुगत रही हैं।
BHOPAL.भ्रष्टाचार के आरोपों से छवि सुधारने की कोशिश में MPSRLM (मध्य प्रदेश ग्रामीण आजीविका डे–परियोजना ) अफसर अब सतर्क हो गए हैं। इस सतर्कता की सबसे बड़ी कीमत प्रदेश की लाखों स्व-सहायता समूह (SHG) की महिलाएं चुका रही हैं।
पारदर्शिता के नाम पर नए पोर्टल के अभाव में पिछले दो साल से 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान रोक दिया गया है। नतीजतन, समूहों को बैंक ऋण पर पूरी 7 प्रतिशत ब्याज राशि खुद चुकानी पड़ रही है। अधिक ब्याज दर के कारण कई समूह समय पर किस्तें नहीं चुका पा रहे हैं और नए ऋण के योग्य नहीं रह गए हैं।
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साल 2017-18 में राज्य सरकार ने स्व-सहायता समूहों के बैंक ऋण पर 4 प्रतिशत से अधिक ब्याज शासन द्वारा अदा करने का निर्णय लिया था। इस फैसले से ग्रामीण महिलाओं का उत्साह बढ़ा। नतीजतन, एसएचजी का बैंक ऋण तेजी से बढ़ा। वर्ष 2019-20 में जहां कुल ऋण 303 करोड़ रुपए था। वहीं, 2023-24 तक यह बढ़कर 3584 करोड़ रुपए हो गया। यह वृद्धि करीब 12 गुना है।
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समूहों का कर्ज बढ़ने के साथ सरकार पर ब्याज अनुदान का बोझ भी बढ़ा। बीते साल विभागीय अफसरों ने यह कहकर ब्याज अनुदान की अदायगी रोक दी कि समूहों के ऋण का लेखा-जोखा रखने के लिए नया पोर्टल बनाया जाएगा।
स्थिति यह है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में अनुदान मद का बजट लेप्स हो गया, लेकिन बैंकों को भुगतान नहीं किया गया। मौजूदा वित्तीय वर्ष में भी यही हाल है, जबकि पोर्टल अब तक अस्तित्व में नहीं आया।
एमपी ग्रामीण आजीविका डे-परियोजना के अफसर अब भी पोर्टल बनाने के लिए एजेंसी तलाश रहे हैं। सूत्रों के अनुसार यह जिम्मेदारी एमपीएसईडीसी को सौंपी जा सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय लंबित है।
पोर्टल कब तक तैयार होगा, इसकी कोई समय-सीमा तय नहीं है। विभाग ब्याज अनुदान बैंक-लिंक पोर्टल के साथ-साथ एसएचजी से जुड़ी सभी गतिविधियों के लिए तीन अलग-अलग सॉफ्टवेयर विकसित करना चाहता है। पारदर्शिता की इस ई-तकनीकी तैयारी के बीच अनुदान की राशि फंसी हुई है।
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पिछले और मौजूदा वित्तीय वर्ष में प्रदेश के 2 लाख 42 हजार 817 समूहों ने करीब 48 लाख रुपये का ऋण बैंकों से लिया। अनुदान बंद होने से इन समूहों को पूरी 7 प्रतिशत ब्याज राशि चुकानी पड़ रही है, जो कई समूहों के लिए घाटे का सौदा बन गई है।
सूत्र बताते हैं कि कई समूहों ने ब्याज अनुदान की उम्मीद में ऋण लिया था, लेकिन अब बढ़ते ब्याज के कारण वे किस्तें चुकाने में भी असमर्थ हो रहे हैं।
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अधिकृत आंकड़ों के अनुसार फरवरी तक प्रदेश में 4 लाख 87 हजार 291 स्व-सहायता समूह थे, जो अब बढ़कर 5 लाख से अधिक हो चुके हैं। इनसे करीब 62 लाख ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हैं। वर्ष 2024-25 में 1.34 लाख और मौजूदा वर्ष में अब तक 1.08 लाख समूहों ने बैंक ऋण लिया है।
ये महिलाएं पोषण आहार, स्कूल ड्रेस सिलाई और अन्य छोटे-मोटे व्यवसायों के जरिए आजीविका चला रही हैं। लेकिन ब्याज अनुदान रुकने से उनकी आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है।
स्व-सहायता समूह की महिलाएं: SHG ( self-help group) समूहों की ब्याज अनुदान अदायगी पर रोक को लेकर परियोजना के जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। परियोजना के कुछ अधिकारियों ने कहा कि यह शासन का निर्णय है। वहीं परियोजना सीईओ हर्षिका सिंह भी इस मामले में कुछ कहने को तैयार नहीं। उनका पक्ष जानने व्हाट्स एप संदेश भी भेजा गया,लेकिन इसका भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
बता दें के मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका डे-परियोजना भ्रष्टाचार व अवैध नियुक्तियों के लिए बदनाम रहा है। परियोजना के पूर्व सीईओ ललित मोहन बेलवाल व अन्य के खिलाफ ईओडब्लयू में प्रकरण भी दर्ज है।
पारदर्शिता के नाम पर नए पोर्टल के अभाव में पिछले दो साल से 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान रोक दिया गया है। नतीजतन, समूहों को बैंक ऋण पर पूरी 7 प्रतिशत ब्याज राशि खुद चुकानी पड़ रही है। अधिक ब्याज दर के कारण कई समूह समय पर किस्तें नहीं चुका पा रहे हैं और नए ऋण के योग्य नहीं रह गए हैं।
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सरकार के फैसले से बढ़ा था उत्साह,अब संकट
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दो साल से बंद है ब्याज अनुदान
स्थिति यह है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में अनुदान मद का बजट लेप्स हो गया, लेकिन बैंकों को भुगतान नहीं किया गया। मौजूदा वित्तीय वर्ष में भी यही हाल है, जबकि पोर्टल अब तक अस्तित्व में नहीं आया।
आग बुझाने, कुंआ खोदने की तैयारी
पोर्टल कब तक तैयार होगा, इसकी कोई समय-सीमा तय नहीं है। विभाग ब्याज अनुदान बैंक-लिंक पोर्टल के साथ-साथ एसएचजी से जुड़ी सभी गतिविधियों के लिए तीन अलग-अलग सॉफ्टवेयर विकसित करना चाहता है। पारदर्शिता की इस ई-तकनीकी तैयारी के बीच अनुदान की राशि फंसी हुई है।
विधायक निधि में भ्रष्टाचार, भाजपा ने विधायक डांगा को दिया दूसरा नोटिस
पारदर्शिता के फेर में फंसे समूह
सूत्र बताते हैं कि कई समूहों ने ब्याज अनुदान की उम्मीद में ऋण लिया था, लेकिन अब बढ़ते ब्याज के कारण वे किस्तें चुकाने में भी असमर्थ हो रहे हैं।
भागीरथपुरा कांड: मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर में सख्त निगरानी के आदेश
5 लाख से अधिक SHG, 62 लाख महिलाएं जुड़ी
ये महिलाएं पोषण आहार, स्कूल ड्रेस सिलाई और अन्य छोटे-मोटे व्यवसायों के जरिए आजीविका चला रही हैं। लेकिन ब्याज अनुदान रुकने से उनकी आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है।
जिम्मेदार अफसरों ने साधी चुप्पी
बता दें के मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका डे-परियोजना भ्रष्टाचार व अवैध नियुक्तियों के लिए बदनाम रहा है। परियोजना के पूर्व सीईओ ललित मोहन बेलवाल व अन्य के खिलाफ ईओडब्लयू में प्रकरण भी दर्ज है।
साल दर साल बढ़ा एसएचजी का बैंक ऋण
| वर्ष | ऋणी समूह | ऋण राशि (लाख ₹) | बकाया अनुदान राशि |
|---|---|---|---|
| 2022-23 | 1.10 लाख | 27.09 | — |
| 2023-24 | 1.27 लाख | 27.10 | — |
| 2024-25 | 1.34 लाख | 28.82 | करीब 41 करोड़ |
| 2025-26 (दिसंबर तक) | 1.08 लाख | 19.39 | करीब 35 करोड़ |
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