अक्षय बम के लिए आज अहम दिन, बीजेपी में जाने के बाद हत्या के प्रयास केस में पेशी, फैकल्टी का भी केस

कांग्रेस के प्रत्याशी अक्षय बम ऐनवक्त पर 29 अप्रैल को नामांकन वापस लेकर बीजेपी में चले गए। इससे चार दिन पहले 24 अप्रैल को उन पर 17 साल पुराने केस में हत्या के प्रयास 307 की धारा बढाने के आदेश जिला कोर्ट में हो गए थे...

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Sandeep Kumar
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संजय गुप्ता @ INDORE. बीजेपी में जाने के बाद भी अक्षय बम ( Akshay Bom ) को  क्या कोर्ट से राहत मिलेगी? बम पर 10 मई को दो केस को लेकर अहम सुनवाई है। एक मामले में तो खुद उन्हें कोर्ट में पेश होना है। कांग्रेस के प्रत्याशी अक्षय बम ऐनवक्त पर 29 अप्रैल को नामांकन वापस लेकर बीजेपी में चले गए। इससे चार दिन पहले 24 अप्रैल को उन पर 17 साल पुराने केस में हत्या के प्रयास 307 की धारा बढाने के आदेश जिला कोर्ट में हो गए थे। वहीं इसी के साथ फैकल्टी ने परिवाद दायर कर दिया कि उनके पुराने दस्तावेज का उपयोग किया गया है और फर्जी तरीके से कॉलेज की मान्यता ली गई है। इन दोनों ही केस में दस मई यानी आज सुनवाई है। 

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यह लगा है परिवाद

अक्षय के कॉलेज इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ की पुरानी फैकल्टी ने केस लगाया है। उनकी ओर से अधिवक्ता कृष्ण कुमार कुन्हारे और डॉ. रूपाली राठौर ने बताया कि डॉ. कविता दिवे, विशाल पुराणिक, रूपाली व अन्य असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कॉलेज में नौकरी करते थे। सभी ने काफी समय पहले कॉलेज छोड़ दिया था। इसके बाद भी इन्हें अभी तक फैकल्टी दिखाया जा रहा है ताकि कॉलेज की गलत मान्यता बनी रहे।

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सुसाइड करने वाली महिला को भी फैकल्टी बताया हुआ

इनके साथ ही रश्मि शुक्ला नामक फैकल्टी ने नवंबर 2022 में सुसाइड कर लिया था। इसके बावजूद कॉलेज मैनेजमेंट ने वेबसाइट पर नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क के डेटा में असिस्टेंट प्रोफेसर रश्मि शुक्ला, विशाल पुराणिक,आशीष कुमार सोनी, डॉ. माधुरी मोदी, डॉ. योगिता मेनन, डॉ. योगिता चौहान, अमरेश पटेल, नवीन दवे, सौरभ कुमार, डॉ. दिनेश अशोक, डॉ. कविता दुबे, करण जीत कौर, रूपाली को कॉलेज में नियमित नौकरी पर दिखाया। यह डेटा मार्च-अप्रैल 2024 में ही अपलोड किया गया। इन फैकल्टी के दस्तावेज के जरिए नेक रैंकिंग A + एवं ऑटोनोमस स्टेटस भी प्राप्त किया था। इस मामले में परिवाद को लेकर सुनवाई भी 10 मई को होने जा रही है। कोर्ट ने जवाब मांगा है।

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एक छात्रा भी कर चुकी EOW में शिकायत

वहीं कॉलेज की एक लॉ छात्रा ने भी उनके कॉलेज के खिलाफ परेशान करने का आवेदन EOW में दिय था। छानबीन भी शुरू कर दी गई, लेकिन बाद में बम के बीजेपी में जाने के बाद मामला ठंडा पड़ गया। छात्रा ने कॉलेज के चेयरमैन डॉ. अक्षय कांति बम, डायरेक्टर डॉ. मनप्रीत कौर राजपाल, प्रिंसिपल डॉ. विनोद पाटीदार, HOD और HR प्रबंधन के विरुद्ध पुलिस सहित आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में शिकायत दर्ज कराई थी। 

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17 साल पुराने जमीन विवाद में भी उलझे हैं

वहीं बीजेपी में आने से पहले 24 अप्रैल को जिला कोर्ट में सुनवाई के बाद गवाह के बयान के बाद उन पर धारा 307 बढ़ाने यानि हत्या के प्रयास की धारा को लेकर निर्देश हुआ। इस मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। उनके साथ पिता कांति बम भी आरोपी है, उनकी भी अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। 24 अप्रैल को गवाह के बयान के बाद 17 साल पुराने केस में मारपीट, जान से मारने की धमकी देने जैसी धाराओं के साथ 307 बढ़ाने के आदेश हुए थे।

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