सुप्रीम कोर्ट से अक्षय कांति बम को राहत, धारा 307 हत्या के प्रयास का आरोप हटा

Sanjay Gupta | Apr 27, 2026, 19:15 IST
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Akshay kanti bam
Photograph: (thesootr)

INDORE. सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के अक्षय कांति बम और उनके पिता कांतिलाल बम को धारा 307 (हत्या का प्रयास) से मुक्त करते हुए बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है।

News In Short

  • सुप्रीम कोर्ट ने धारा 307 हटाने का आदेश दिया।
  • अक्षय बम को हत्या के प्रयास से मिली राहत।
  • हाईकोर्ट ने पहले बम की याचिका खारिज की थी।
  • 2007 की घटना पर 2024 में लगे थे नए आरोप।
  • बम ने राजनीतिक साजिश का लगाया था आरोप।

News In Detail

इंदौर के चर्चित नेता अक्षय कांति बम (Akshai Kanti Bam) और उनके पिता कांतिलाल बम (Kantilal Bam) को दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ी कानूनी राहत दी है।

करीब दो वर्षों से चले इस मामले में धारा 307 (Section 307 - Attempt to Murder) हटाने का आदेश सुनाया गया। यह फैसला उनके लिए राहत की सांस लेकर आया है और एक लंबे कानूनी संघर्ष पर विराम लगाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत

दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इंदौर के बहुचर्चित नेता अक्षय कांति बम को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने उन पर लगी धारा 307 (Section 307 - Attempt to Murder) हटाने का महत्वपूर्ण आदेश जारी किया।

इस फैसले के साथ ही अक्षय कांति बम और उनके पिता कांतिलाल बम (Kantilal Bam) इस गंभीर आरोप से पूरी तरह मुक्त हो गए। यह निर्णय उनके लिए एक बड़ी कानूनी जीत मानी जा रही है।

धारा 307 का मामला कब और कैसे शुरू हुआ

यह मामला मूलतः 4 अक्टूबर 2007 की एक घटना से जुड़ा था। उस समय इस घटना में हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) की धारा नहीं लगाई गई थी।

वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) से ठीक पहले इस मामले में धारा 307 और धारा 149 जोड़ने का आवेदन दिया गया। सेशन कोर्ट और बाद में हाईकोर्ट (High Court) ने इस आवेदन को स्वीकार कर लिया था।

राजनीतिक साजिश का लगाया आरोप

अक्षय कांति बम ने हाईकोर्ट में यह दलील दी कि वे उस समय कांग्रेस (Congress) के लोकसभा प्रत्याशी थे। उन्होंने कहा कि युनुस गुड्डु ने राजनीतिक साजिश (Political Conspiracy) के तहत यह आवेदन दिया। इसी दबाव के चलते उन्हें अपना नामांकन वापस लेना पड़ा। बम ने एक शपथपत्र में इस साजिश के लिए मध्यप्रदेश भाजपा (MP BJP) को भी जिम्मेदार ठहराया था।

हाईकोर्ट ने याचिका की थी खारिज

एमपी की इंदौर हाईकोर्ट बेंच ने बम की याचिका पूरी तरह खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा कि प्रारंभिक विवरण में ही आरोपी का बंदूक लेकर आना और गोली मारने का उल्लेख था।

तत्कालीन जांच अधिकारी ने घटनास्थल से बंदूक जब्त भी की थी। इस आधार पर हाईकोर्ट ने धारा 307 और धारा 149 के ट्रायल के आदेश को सही माना था।

शपथपत्र में खुद किया था खुलासा

इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब बम ने खुद अपने शपथपत्र (Affidavit) में भाजपा पर साजिश का आरोप लगाया। यह शपथपत्र तब दिया गया जब वे भाजपा में जा चुके थे।

यह खुलासा मीडिया में सामने आने के बाद बम ने हाईकोर्ट से पुरानी याचिका वापस ली। इसके बाद नई याचिका में शपथपत्र बदलकर भाजपा का नाम हटा दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और राहत

आखिरकार अक्षय कांति बम और उनके पिता कांतिलाल बम ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की गहन सुनवाई के बाद धारा 307 (Attempt to Murder) हटाने का आदेश दिया।

यह फैसला न केवल उनके लिए राहत है, बल्कि इस लंबे कानूनी विवाद का भी अंत करता है। करीब दो वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद इस परिवार को न्याय मिला है।

इंदौर के अक्षय कांति बम चर्चा में दो वजहों से आए...

पहला- 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहते हुए उन्होंने आखिरी दिन नामांकन वापस लेकर बाद में भाजपा का दामन थाम लिया।
दूसरा- उनके खिलाफ 17 साल पुराने एक मामले में अदालत ने हत्या के प्रयास की धारा जोड़ने और बाद में गिरफ्तारी वारंट जारी करने जैसी कार्रवाई की।

1. चुनावी एंट्री

अक्षय कांति बम इंदौर लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार थे और शुरुआत में उन्हें बीजेपी के खिलाफ मजबूत दांव माना जा रहा था। जैन समुदाय से आने के कारण कांग्रेस को उनसे खास उम्मीदें थीं।

2. नामांकन वापस लेना

29 अप्रैल 2024 को उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया, जिससे इंदौर में राजनीतिक हलचल मच गई। उसी के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने का फैसला किया।

3. पुराना केस फिर चर्चा में

उनके नामांकन के दिन ही एक 17 साल पुराने जमीन विवाद वाले मामले में उनके खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा 307 जोड़ने का आदेश आया। रिपोर्टों के मुताबिक यह फैसला 24 अप्रैल 2024 को हुआ और इसी ने उनके राजनीतिक संकट को और बढ़ाया।

4. कोर्ट की आगे की कार्रवाई

बाद में इंदौर की अदालत ने इसी मामले में अक्षय कांति बम और अन्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। कोर्ट ने उन्हें 5 जून 2024 को पेश होने को कहा था।

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