बच्चों के भोजन का अधिकार: आधार नहीं तो भी मिले आंगनवाड़ी और मध्याह्न भोजन, भोपाल अधिवेशन में उठी मांग

Sandeep Kumar | Oct 04, 2026, 23:25 IST
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भोपाल अधिवेशन में आधार की बाधा से बच्चों का भोजन नहीं रोकने की मांग उठी।
भोपाल अधिवेशन में आधार की बाधा से बच्चों का भोजन नहीं रोकने की मांग उठी।

भोपाल में 2 से 4 अक्टूबर तक बच्चों के भोजन का अधिकार अधिवेशन चला। इसमें 18 राज्यों के 400 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए। आधार कार्ड न होने पर बच्चा आंगनवाड़ी और मध्याह्न भोजन से वंचित न हो। फेस रिकग्निशन और ई-केवाईसी बंद करने की मांग भी उठी। गर्म पका भोजन देने और निजीकरण रोकने की मांग भी हुई। अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज भी मौजूद रहे।

आधार नहीं तो भी मिले आंगनवाड़ी लाभ

बच्चों के भोजन का अधिकार भोपाल अधिवेशन का प्रमुख मुद्दा रहा। आधार नहीं होने पर भी पोषण सुविधाएं देने की मांग हुई। तकनीकी दिक्कतों से बच्चों का हक नहीं रोकने को कहा गया। अंतिम दिन जारी घोषणा में कई मांगें रखी गईं। घोषणा में मांग रखी गई कि आधार कार्ड न होने पर भी बच्चों को मिड डे मिल मिले। तकनीकी दिक्कतें भी बच्चों के रास्ते की रुकावट न बनें। Anganwadi, mid day meal और छात्रवृत्ति जैसे हक सबको मिलें।

फेस रिकग्निशन और ई-केवाईसी पर रोक

घोषणा में बच्चों के लिए ई-केवाईसी (Electronic Know Your Customer) और फेस रिकग्निशन बंद हों। अनिवार्य ऐप जैसी व्यवस्थाएं भी बंद करने की मांग हुई।

बालाघाट में बच्चों की मौत क्यों? भोपाल अधिवेशन में पोषण संकट और खाद्य सुरक्षा पर उठे सवाल
03 Oct 2026 ,
By Sanjay Dhiman
भोजन के अधिकार अधिवेशन में पोषण के सवाल बहस से गायब बताए गए। बालाघाट में बच्चों की मौत को वक्ताओं ने लंबे पोषण संकट का संकेत कहा। भोपाल के आइकफ आश्रम में 17 राज्यों के 400 से ज्यादा प्रतिनिधि जुटे हैं। खाद्य सुरक्षा, मध्यान्ह भोजन और सामाजिक सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। अंतिम दिन पदयात्रा निकलेगी और मांगपत्र नीति निर्धारकों को भेजा जाएगा।
भोजन के अधिकार अधिवेशन में पोषण के सवाल बहस से गायब बताए गए। बालाघाट में बच्चों की मौत को वक्ताओं ने लंबे पोषण संकट का संकेत कहा। भोपाल के आइकफ आश्रम में 17 राज्यों के 400 से ज्यादा प्रतिनिधि जुटे हैं। खाद्य सुरक्षा, मध्यान्ह भोजन और सामाजिक सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। अंतिम दिन पदयात्रा निकलेगी और मांगपत्र नीति निर्धारकों को भेजा जाएगा।

गर्म भोजन और पीएम पोषण की मांग

मांग रही कि आंगनवाड़ी और स्कूलों में गर्म पका भोजन मिले। यह भोजन स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक सामग्री से बने। घोषणा में आईसीडीएस ( Integrated Child Development Services) का सामाजिक अंकेक्षण मांगा गया। पीएम पोषण का भी प्रभावी सामाजिक अंकेक्षण यानी योजना की जांच हो। बच्चों के भोजन और पोषण की सरकारी योजनाओं का निजीकरण और व्यावसायीकरण रुके। यह भी घोषणा की प्रमुख मांग रही।

आज से एमपी में सात दिन तक बंद रहेंगी राशन दुकानें, कमीशन 200 रुपए करने की विवाद में फंसा गरीबों का राशन
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By Amresh Kushwaha
मध्य प्रदेश राशन विक्रेता संघ ने 1 से 7 अक्टूबर तक राशन दुकानों की हड़ताल का ऐलान किया है। राशन दुकानों की स्ट्राइक में भोपाल की 400 और प्रदेश की करीब 26 हजार दुकानें शामिल होंगी। राशन दुकानें बंद रहने से राशन वितरण नहीं होगा। दुकानदार 90 रुपए प्रति क्विंटल कमीशन से नाराज हैं। इसका सीधा असर गरीबों का राशन लेने वालों पर पड़ेगा।
मध्य प्रदेश राशन विक्रेता संघ ने 1 से 7 अक्टूबर तक राशन दुकानों की हड़ताल का ऐलान किया है। राशन दुकानों की स्ट्राइक में भोपाल की 400 और प्रदेश की करीब 26 हजार दुकानें शामिल होंगी। राशन दुकानें बंद रहने से राशन वितरण नहीं होगा। दुकानदार 90 रुपए प्रति क्विंटल कमीशन से नाराज हैं। इसका सीधा असर गरीबों का राशन लेने वालों पर पड़ेगा।

बच्चों का पोषण और मातृत्व लाभ

बच्चों का पोषण सुधारने के लिए घोषणा में कई कदम गिनाए गए। आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में आंगनवाड़ी केंद्र बढ़ाने की मांग हुई। इन केंद्रों की बुनियादी सुविधाएं भी बेहतर करने को कहा गया।

स्कूलों के 200 मीटर में जंक फूड बंद हो

स्कूलों के आसपास 200 मीटर तक जंक फूड की बिक्री रोकने की मांग हुई। स्कूलों में किचन गार्डन बनाने की मांग भी रखी गई। मातृत्व लाभ सार्वभौमिक यानी सबके लिए और बिना शर्त अधिकार बने। असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को भी पर्याप्त मातृत्व अवकाश और आय सहायता मिले।

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
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By Jitendra Shrivastava
BHOPAL. भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रविवार रात छात्रों का हंगामा हुआ। कटारा हिल्स बायपास स्थित इस हॉस्टल में खाने में कीड़े मिलने का आरोप है। छात्रों ने कॉकरोच मिलने की भी बात कही। शिकायत के बाद भी सुधार न होने की बात कही गई। कटारा हिल्स पुलिस मौके पर पहुंची। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने कहा, शिकायत नहीं मिली। फिर भी जांच टीम भेजी जाएगी।
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प्रवासी और बेघर बच्चों का हक

घोषणा में विस्थापित, प्रवासी, बेघर और सड़कों पर रहने वाले बच्चों का जिक्र है। इन बच्चों को पहचान और पते की बाध्यता के बिना सुविधाएं मिलें। ये सुविधाएं भोजन, पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा की हैं।

आश्रय, सामुदायिक रसोई और क्रेच की मांग

जरूरत वाले क्षेत्रों में सालभर चलने वाले आश्रय और सामुदायिक रसोई की मांग हुई। प्रवासी परिवारों के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी, क्रेच और स्कूल की व्यवस्था मांगी गई। क्रेच यानी दिन में बच्चों की देखभाल का केंद्र।

अधिवेशन में कौन-कौन आया

अधिवेशन में प्रख्यात अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज शामिल हुए। सीटू (Centre of Indian Trade Unions) की राष्ट्रीय सचिव ए. आर. सिंधु आईं। वे ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स की महासचिव भी हैं। राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा और विधायक ओंकार मरकाम भी मौजूद रहे। सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, शोधकर्ता और जमीनी कार्यकर्ता भी इसमें शामिल थे।

घोषणा-पत्र पर चर्चा में कविता श्रीवास्तव, माधुरी कृष्णास्वामी और आशा मिश्रा ने भाग लिया। आयशा, राजशेखर और अभियान के वरिष्ठ साथियों ने भी हिस्सा लिया। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने भी चर्चा में हिस्सा लिया। तीन दिन के सत्रों में कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

इनमें कुपोषण, भूख, आंगनवाड़ी, मध्याह्न भोजन और मातृ एवं बाल पोषण शामिल थे। भेदभाव, विस्थापन, डिजिटलीकरण, कृषि और जलवायु परिवर्तन पर भी बात हुई। सत्रों में उठे मुद्दों को समेटकर एक घोषणा जारी की गई। इसका नाम बच्चों के भोजन के अधिकार पर तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन की घोषणा है।

अधिवेशन में लिए गए तीन फैसले

अधिवेशन में तीन फैसले लिए गए। पहला, राष्ट्रीय स्तर पर आंगनवाड़ी ठीक करो अभियान चलेगा। दूसरा, राज्यों में बच्चों के भोजन के अधिकार पर अधिवेशन होंगे। तीसरा, राष्ट्रीय स्तर पर साझा कार्रवाई की जाएगी। ये मांगें अब सरकारों और योजना चलाने वालों के सामने हैं। सोचिए एक बार। क्या आधार के बिना भी हर बच्चे की थाली तक भोजन पहुंचेगा?
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