शक्कर 75 रुपए किलो, मंत्री राकेश शुक्ला बोले शक्कर छोड़ो, वंदेमातरम पर बात करो
Sanjay Dhiman | Aug 23, 2026, 17:03 IST
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अशोकनगर में शक्कर की बढ़ती कीमतों पर प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला से सवाल हुआ। मंत्री ने महंगाई और शक्कर के बजाए वंदे मातरम, वैश्विक परिस्थितियों पर बात करने को कहा। उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधा।
अशोकनगर में शक्कर की कीमत 75 रुपए किलो तक पहुंच गई है। रक्षाबंधन से पहले यह उछाल आम परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। मीडिया ने जब प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला से महंगाई पर सवाल किया, तो उन्होंने सीधा जवाब देने की बजाय बात मोड़ दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष को महंगाई नहीं, वंदेमातरम के अपमान पर बोलना चाहिए। मंत्री के इस जवाब ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
मध्य प्रदेश में त्योहारी सीजन शुरू होते ही शक्कर के दाम आसमान छूने लगे हैं। तीन दिन पहले तक बाजार में शक्कर 62 रुपए किलो के आसपास थी। अब यह बढ़कर 75 रुपए किलो हो चुकी है।
दाम बढ़ते ही लोगों ने सस्ते विकल्प के लिए मॉल का रुख किया। मॉल में 57 रुपए किलो वाली शक्कर का पूरा स्टॉक कुछ ही घंटों में खत्म हो गया। हालत यह है कि अब ऑनलाइन बुकिंग पर भी शक्कर उपलब्ध नहीं दिख रही है।
शक्कर महंगी होने का असर सीधा चाय और बेकरी आइटम्स पर पड़ा है। मिठाइयों की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई है। इससे रक्षाबंधन से पहले घरों का पूरा बजट गड़बड़ा गया है।
शनिवार को अशोकनगर के प्रभारी मंत्री व ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला दौरे पर पहुंचे थे। इसी दौरान मीडिया ने उनसे बढ़ती महंगाई पर सवाल किया। मंत्री ने जनता को राहत का भरोसा देने की जगह अलग ही तर्क दे दिया।
उन्होंने महंगाई को सीधे विश्व युद्ध की स्थिति से जोड़ दिया। मंत्री का कहना था कि आज दुनिया में युद्ध जैसे हालात हैं। उन्होंने इसे ही महंगाई बढ़ने की बड़ी वजह बताया।
मंत्री ने इसी सवाल के जवाब में कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष युवाओं को गलत दिशा में भटका रहा है। उनके मुताबिक विपक्ष को महंगाई की जगह वंदेमातरम के अपमान पर बोलना चाहिए।
मंत्री ने आगे कहा कि महंगाई नियंत्रण जरूरी है, लेकिन वंदेमातरम भी उतना ही जरूरी है। उनका तर्क था कि जब देश रहेगा, तभी हम भी रहेंगे। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
शक्कर की कीमतें भले बढ़ रही हों, लेकिन गन्ना किसानों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। आइए जानते हैं किसानों के सामने कौन सी पांच बड़ी चुनौतियां हैं।
पहली चुनौती मौसम और सिंचाई से जुड़ी है। असामान्य बारिश और सिंचाई साधनों की कमी फसल को नुकसान पहुंचाती है। दूसरी समस्या यह है कि गन्ना पूरे साल खेत में लगा रहता है, इसलिए किसान दूसरी फसल नहीं ले पाते।
तीसरी दिक्कत उचित भाव न मिलने की है। लागत की तुलना में गन्ने की कीमत अक्सर कम रहती है। चौथी चुनौती कटाई के समय मजदूरों की कमी है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं। पांचवीं और सबसे बड़ी समस्या भुगतान में देरी है, क्योंकि मिलों से समय पर पैसा न मिलने से किसानों की पूंजी अटक जाती है।
मंत्री के इस जवाब के बाद आम लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि उन्हें महंगाई से राहत चाहिए, बयानबाजी नहीं। रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर मिठाई और शक्कर की बढ़ती कीमत सीधे घर के बजट पर असर डाल रही है।
आने वाले दिनों में अगर शक्कर के दाम ऐसे ही बढ़ते रहे, तो आम परिवारों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार महंगाई पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।
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शक्कर के दाम में उछाल क्यों
दाम बढ़ते ही लोगों ने सस्ते विकल्प के लिए मॉल का रुख किया। मॉल में 57 रुपए किलो वाली शक्कर का पूरा स्टॉक कुछ ही घंटों में खत्म हो गया। हालत यह है कि अब ऑनलाइन बुकिंग पर भी शक्कर उपलब्ध नहीं दिख रही है।
शक्कर महंगी होने का असर सीधा चाय और बेकरी आइटम्स पर पड़ा है। मिठाइयों की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई है। इससे रक्षाबंधन से पहले घरों का पूरा बजट गड़बड़ा गया है।
मंत्री का महंगाई पर बयान
उन्होंने महंगाई को सीधे विश्व युद्ध की स्थिति से जोड़ दिया। मंत्री का कहना था कि आज दुनिया में युद्ध जैसे हालात हैं। उन्होंने इसे ही महंगाई बढ़ने की बड़ी वजह बताया।
वंदेमातरम को लेकर तर्क
मंत्री ने आगे कहा कि महंगाई नियंत्रण जरूरी है, लेकिन वंदेमातरम भी उतना ही जरूरी है। उनका तर्क था कि जब देश रहेगा, तभी हम भी रहेंगे। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
गन्ना किसानों की पांच चुनौतियां
पहली चुनौती मौसम और सिंचाई से जुड़ी है। असामान्य बारिश और सिंचाई साधनों की कमी फसल को नुकसान पहुंचाती है। दूसरी समस्या यह है कि गन्ना पूरे साल खेत में लगा रहता है, इसलिए किसान दूसरी फसल नहीं ले पाते।
तीसरी दिक्कत उचित भाव न मिलने की है। लागत की तुलना में गन्ने की कीमत अक्सर कम रहती है। चौथी चुनौती कटाई के समय मजदूरों की कमी है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं। पांचवीं और सबसे बड़ी समस्या भुगतान में देरी है, क्योंकि मिलों से समय पर पैसा न मिलने से किसानों की पूंजी अटक जाती है।
जनता और बाजार पर असर
आने वाले दिनों में अगर शक्कर के दाम ऐसे ही बढ़ते रहे, तो आम परिवारों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार महंगाई पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।
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