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News in Short
- गरीबों को मुफ्त इलाज देने वाली योजना को अस्पताल प्रबंधन और अधिकारियों ने कमाई का जरिया बना लिया है।
- आयुष्मान कार्ड पर मरीजों को भर्ती कर इलाज से कमाई के लिए एमपी में इंपैनलमेंट की होड़ लगी है।
- स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम के निरीक्षण में भी इलाज की आड़ में जारी हेराफेरी सामने आ चुकी है।
- इंपैनलमेंट कमेटी कभी भी अस्पताल को कमियां गिनाकर कर बाहर देती हैं। सुविधा बताकर इंपैनलमेंट देती है।
- पांच लाख के निशुल्क इलाज के नाम पर अधिकारी-अस्पताल मिलकर सरकारी अनुदान लूट रहे हैं।
News in Detail
केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना मध्य प्रदेश में मूल दिशा से भटक गई है। अस्पताल इलाज के नाम पर रुपए बटोरने में जुट गए हैं। साल 2025 में प्रदेश में आयुष्मान से इलाज पर सरकार ने 1400 करोड़ रुपए से ज्यादा रुपए खर्च किए हैं। इनमें से 800 करोड़ रुपए से ज्यादा निजी अस्पतालों को मिले हैं। द सूत्र की पड़ताल में भी आयुष्मान योजना के नाम पर चल रहे खेल के कई तथ्य सामने आए हैं।
पहले बाहर फिर कर लिया इंपैनल
5 दिसंबर 25 को हुई इम्पैनलमेंट कमेटी ने 15 अस्पतालों को आदेश क्रमांक एबी/ 2025/ 8406 के जरिए सूची से बाहर किया था। इसी दिन एक दूसरा आदेश जारी किया गया। इसका नंबर एबी/2025/ 8408 है। इस आदेश में अस्पतालों के प्रदर्शन के आधार पर हितग्राहियों को सुविधाएं मुहैया करने का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद इन्हीं अस्पतालों को 3 साल के लिए सूची में जोड़ दिया गया।
एक दिन में दो विरोधाभासी आदेश
इंपैनलमेंट समिति के आदेश निरामय की कारगुजारी उजागर करते हैं। कमेटी ने पहले नर्मदापुरम के अमृत हार्ट केयर अस्पताल और मंदसौर के अनुयोग हॉस्पिटल में संसाधनों और स्पेशलिस्ट की कमी बताई थी। इसके बाद कमेटी ने इन दोनों अस्पतालों को सूची से बाहर कर दिया था। अब उसी कमेटी ने इनमें इलाज और मरीजों के उपचार को बेहतर बताया है। इसी आधार पर इन दोनों अस्पतालों को फिर से सूची में शामिल कर लिया गया है।
आईसीयू में भर्ती दिखाकर बढ़ा रहे बिल
योजना के तहत भर्ती मरीज का बिल बढ़ाने की हेराफेरी निरामय टीम के निरीक्षण में पिछले महीने ही सामने आ चुकी है। इसके बाद मेट्रो सिटी अस्पताल, सूर्यांश मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल, साईं अस्पताल भगवती नर्सिंग होम, एमडीसी अस्पताल और प्रभु प्रेम नेत्रालय अस्पताल का इंपैनलमेंट रद्द किया गया है। अधिकारियों को कई सामान्य मरीज जरूरत के बिना ही आईसीयू में भर्ती मिले थे।
सामने आ चुका है लेनदेन का खेल
पिछले महीने आयुष्मान निरामय योजना में इंपैनलमेंट के नाम पर अधिकारियों के लेनदेन का मामला सामने आ चुका है। इस संबंध में निरामय के अधिकारी के कर्मचारी का लेनदेन की बातचीत का ऑडियो- वीडियो भी वायरल हुआ था। इन खुलासों के बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई की। आयुष्मान विभाग के अधिकारी छोटेलाल सिंह को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही महाप्रबंधक इंद्रजीत सिकरवार सहित अन्य अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है। योजना के नाम पर दलाली का खेल पूरे प्रदेश में चल रहा है।
आयुष्मान योजना नहीं, कारू का खजाना
मध्य प्रदेश की साढ़े 8 करोड़ की आबादी में 4.85 करोड़ आयुष्मान कार्डधारी हैं। साल 2025 में मध्य प्रदेश में आयुष्मान कार्डधारियों के इलाज पर सरकार ने 1477 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए हैं। इनमें से आधी से ज्यादा राशि निजी अस्पतालों में इलाज पर खर्च हुई है। यानी इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों के खजाने में 800 करोड़ से ज्यादा राशि पहुंची है।
आयुष्मान योजना का सरकारी बजट कारू के खजाने से कम नहीं है। तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आयुष्मान योजना के तहत इंपैनल होने के लिए निजी अस्पतालों में होड़ क्यों लगी है। निजी अस्पतालों के प्रबंधक क्यों आयुष्मान निरामय के अधिकारियों के चक्कर लगाते हैं। क्यों इंपैनलमेंट कमेटी में जोड़- तोड़ का खेल चल रहा है।
जल्द गड़बड़ियों पर लग जाएगा अंकुश
आयुष्मान भारत सीईओ डॉ. योगेश भरसट का कहना है अनियमतताओं को जल्द ठीक कर लेंगे। पारदर्शी व्यवस्था बना रहे हैं। संसाधन और अनियमितता वाले अस्पताल सूचीबद्ध ना हो इसके लिए भी सिस्टम विकसित कर रहे हैं। अनियमिततापूर्ण कोई इंपैनलमेंट हुआ है तो उस पर कार्रवाई करेंगे। ऐसे कर्मचारियों को आयुष्मान भारत से हटाया भी गया है।
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