बालाघाट में अज्ञात बीमारी से 8 बच्चों की मौत, दिग्विजय ने सरकार पर उठाए सवाल

Pawan Modiya | Aug 12, 2026, 23:55 IST
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बालाघाट में मौतें
बालाघाट में मौतें

बालाघाट के बिरसा क्षेत्र में अज्ञात बीमारी से बच्चों की मौत जारी है। अब तक 8 मौतों की पुष्टि हुई है। दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को पत्र लिखा। उन्होंने जांच, मुआवजे और गंभीर बच्चों को एयरलिफ्ट कराने की मांग की।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बालाघाट के बिरसा क्षेत्र में अज्ञात बीमारी से बच्चों की मौत हो रही है।
  • अब तक आठ बच्चों की मौत की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने की है।
  • प्रभावित बच्चों में बुखार, निमोनिया और खून की कमी जैसे लक्षण मिले।
  • पुणे की लैब में भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट अभी नहीं आई।
  • दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से जांच और एयरलिफ्ट की मांग की।

बालाघाट में बढ़ा संकट

मध्य प्रदेश के बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला गंभीर हो गया है।बिरसा ब्लॉक के आदिवासी इलाकों में बीमारी का असर दिख रहा है।यहां अडोरी और मछुरदा पंचायत के गांव प्रभावित बताए गए हैं।इन इलाकों में बैगा आदिवासी परिवार बड़ी संख्या में रहते हैं।

बीमारी की वजह अभी तक पूरी तरह सामने नहीं आई है।इलाज के दौरान तीन साल की प्रियंका धुर्वे की मौत हुई।प्रियंका को 9 अगस्त को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।उसने 11 अगस्त की रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने उसकी मौत की पुष्टि की।उनके अनुसार बच्ची कई बीमारियों से ग्रसित थी।डॉक्टरों ने बच्ची को बचाने की कोशिश की थी।लेकिन इलाज के दौरान उसकी हालत नहीं सुधरी।

प्रियंका की मौत के बाद आंकड़ा आठ तक पहुंच गया।इन मौतों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।प्रभावित गांवों में परिवार अपने बच्चों को लेकर डरे हैं।

किन बच्चों की मौत हुई

अज्ञात बीमारी से अब तक आठ बच्चे दम तोड़ चुके हैं।इनमें लमनिन धुर्वे और साहिल धुर्वे शामिल हैं।पूजा धुर्वे और सचिन मरकाम की भी मौत हुई।प्रीति मरकाम और अरविंद धुर्वे ने भी दम तोड़ा।मंगली मरकाम और प्रियंका धुर्वे की भी मौत हुई।

मौतों का सिलसिला पिछले कई हफ्तों से सामने आ रहा है।कुछ बच्चों की मौत जून और जुलाई में हुई थी।इसके बाद अगस्त में भी मौतें सामने आईं।

इन घटनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।हालांकि बीमारी की अंतिम वजह अभी तय नहीं हुई है।स्वास्थ्य विभाग जांच रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है।

बच्चों में मिले गंभीर लक्षण

प्रभावित बच्चों में कई तरह के लक्षण मिले हैं।जबलपुर मेडिकल कॉलेज की टीम ने भी क्षेत्र का दौरा किया।स्थानीय डॉक्टरों ने भी बीमार बच्चों की जांच की है।

जांच में निमोनिया जैसे लक्षण कई बच्चों में मिले।कुछ बच्चों में खून की कमी भी पाई गई।कई बच्चों में शरीर में पानी की कमी दिखी।कुछ मामलों में किडनी प्रभावित होने के संकेत मिले।

बच्चों में तेज बुखार की शिकायत भी सामने आई।सर्दी और खांसी की समस्या भी बताई गई।कुछ बच्चों में खुजली और त्वचा संबंधी परेशानी मिली।मलेरिया जैसे लक्षण भी कुछ बच्चों में देखे गए।

इन लक्षणों के आधार पर बीमारी तय नहीं हुई है।डॉक्टर अभी जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।इसी वजह से बीमारी को अज्ञात बताया जा रहा है।

बीमारी की असली वजह जानने के लिए नमूने लिए गए।इन नमूनों को जांच के लिए पुणे भेजा गया है।रिपोर्ट कब आएगी, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं है।

दिग्विजय ने CM को लिखा पत्र

बच्चों की मौत पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने चिंता जताई।उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजा है।पत्र में उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की।

दिग्विजय सिंह ने इसे गंभीर लापरवाही का मामला बताया।उन्होंने राज्य स्तर से जांच कराने की मांग रखी।उन्होंने दोषी अमले पर कार्रवाई की मांग भी की।

उन्होंने दूषित पानी को लेकर भी सवाल उठाए।उन्होंने पानी और संक्रमण से बीमारी फैलने की बात कही।हालांकि बीमारी की वजह की आधिकारिक पुष्टि बाकी है।

उन्होंने प्रभावित गांवों में तत्काल चिकित्सा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की।स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव को वहां भेजने की मांग की।उन्होंने मेडिकल विशेषज्ञों के साथ कैंप लगाने को कहा।

दिग्विजय ने मुख्यमंत्री से तत्काल कार्रवाई मांगी है।उनका कहना है कि प्रभावित परिवार बड़ी परेशानी में हैं।

मुआवजे की भी मांग

दिग्विजय सिंह ने मृत बच्चों के परिवारों के लिए मुआवजा मांगा।उन्होंने प्रत्येक परिवार को दस लाख रुपए देने की मांग की।
यह राशि मुख्यमंत्री सहायता कोष से देने की मांग है।

उन्होंने गंभीर बीमार बच्चों के इलाज पर भी जोर दिया।दिग्विजय सिंह ने बच्चों को एयरलिफ्ट कराने की मांग की।उन्होंने नागपुर, रायपुर या भोपाल भेजने का सुझाव दिया।

उनके अनुसार गंभीर बच्चों का बेहतर इलाज जरूरी है।उन्होंने इलाज का पूरा खर्च सरकार से उठाने की मांग की।

यह मांग ऐसे समय आई है, जब मौतें जारी हैं।इलाके में बीमारी की वास्तविक वजह सामने नहीं आई है।ऐसे में बेहतर इलाज और निगरानी अहम हो जाती है।

मौतों के आंकड़े पर अंतर

इस मामले में मौतों के आंकड़े को लेकर अंतर सामने आया है।स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी रिपोर्टों में आठ मौतें बताई गई हैं।वहीं दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में 11 मौतों का दावा किया।उन्होंने चार मौतों की जानकारी छिपाने का आरोप भी लगाया।
यह दावा उनके पत्र के आधार पर सामने आया है।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

बिरसा क्षेत्र जिला मुख्यालय से काफी दूर बताया गया है।प्रभावित गांव करीब 100 किलोमीटर दूर बताए गए हैं।दूरी के कारण गंभीर मरीजों की निगरानी मुश्किल हो सकती है।

बीमारी के बढ़ते असर ने प्रशासन की चुनौती बढ़ाई है।सबसे बड़ी जरूरत बच्चों की समय पर जांच है।गंभीर मरीजों को तुरंत बेहतर अस्पताल पहुंचाना भी जरूरी है।

गांवों में स्वास्थ्य टीमों की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण होगी।पानी के स्रोतों की जांच भी अहम मानी जा रही है।फिलहाल पुणे की जांच रिपोर्ट पर नजर है।रिपोर्ट से बीमारी की वजह समझने में मदद मिल सकती है।इसके बाद उपचार की दिशा भी ज्यादा स्पष्ट होगी।

जरूरी FAQ

बालाघाट में बच्चों की मौत का कारण क्या है?

बीमारी की अंतिम वजह अभी सामने नहीं आई है।बच्चों में बुखार, निमोनिया और खून की कमी जैसे लक्षण मिले।डिहाइड्रेशन और किडनी प्रभावित होने के संकेत भी मिले।मलेरिया और त्वचा संबंधी लक्षण भी सामने आए हैं।बीमारी की पुष्टि के लिए नमूने पुणे भेजे गए हैं।रिपोर्ट आने के बाद कारण ज्यादा स्पष्ट होगा।

बालाघाट में अब तक कितने बच्चों की मौत हुई?

उपलब्ध स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्टों में आठ मौतें बताई गई हैं।इनमें प्रियंका धुर्वे की मौत 11 अगस्त की रात हुई।वहीं दिग्विजय सिंह ने 11 बच्चों की मौत का दावा किया।इसलिए सरकारी आंकड़े और राजनीतिक दावे अलग हैं।अंतिम संख्या जांच और प्रशासनिक पुष्टि के बाद स्पष्ट होगी।

दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से क्या मांग की?

दिग्विजय सिंह ने राज्य स्तरीय जांच की मांग की है।उन्होंने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी रखी।उन्होंने मृत बच्चों के परिवारों को दस लाख रुपए मांगे।गंभीर बच्चों को एयरलिफ्ट कराने की मांग भी की।उन्होंने नागपुर, रायपुर या भोपाल में इलाज सुझाया।इलाज का खर्च सरकार से उठाने की मांग की।

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