रिटायर्ड अधिकारी शोभाराम धारीवाल और सिंघानिया ग्रुप ने बनाई बेनामी संपत्ति, भोपाल कोर्ट में चार केस दर्ज
Amresh Kushwaha | Apr 27, 2026, 09:43 IST
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आयकर विभाग ने भोपाल की विशेष सीबीआई कोर्ट में बेनामी संपत्ति के चार केस दर्ज किए हैं। इनमें रिटायर्ड कृषि अधिकारी शोभाराम धारीवाल की 54 और सिंघानिया ग्रुप के पदम सिंघानिया की 21 बेनामी संपत्तियां शामिल हैं।
News In Short
- आयकर विभाग ने भोपाल की विशेष कोर्ट में चार बेनामी संपत्ति केस दायर किए।
- रिटायर्ड कृषि अधिकारी शोभाराम धारीवाल और उनके परिवार पर तीन केस हैं।
- सिंघानिया ग्रुप के पदम सिंघानिया पर नौकर के नाम संपत्ति खरीदने का आरोप है।
- कुल 75 बेनामी संपत्तियों की पहचान जांच में हुई है।
- अगली सुनवाई की तारीख 19 मई 2026 तय की गई है।
News In Detail
75 बेनामी संपत्तियों का मामला
चारों मामलों में एक बात सांझी है। किसी और के नाम पर संपत्ति खरीदी गई, जबकि असली पैसा किसी और का था। यही बेनामी लेनदेन कहलाता है और यह कानूनी रूप से अपराध है।
5 करोड़ की संपत्ति, दिखाई थी सिर्फ 63 लाख की
आयकर विभाग की जांच में पता चला कि शोभाराम ने नौकरी के दौरान हुई अवैध कमाई को छुपाने के लिए परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियां खरीदी थी। उनके बेटे कोमेंद्र के नाम 29 संपत्तियां दर्ज हैं। बेटे सोमेंद्र के नाम 19 और पत्नी कपूरी देवी के नाम छह संपत्तियां खरीदी गईं। इस तरह कुल 54 संपत्तियां परिवार के नाम पर बेनामी तरीके से खरीदी गईं।
जब नाबालिग बेटों के नाम हुई खरीदारी
साफेमा (SAFEMA - Smugglers and Foreign Exchange Manipulators (Forfeiture of Property) Act) यानी अपीलीय ट्रिब्यूनल ने साल 2024 में इस मामले में फैसला सुनाया था। ट्रिब्यूनल ने माना कि शोभाराम धारीवाल ही इन सभी संपत्तियों के असली मालिक हैं। बेटे सोमेंद्र, कोमेंद्र और पत्नी कपूरी देवी को इन संपत्तियों का बेनामीदार (Benamidaar) घोषित किया गया।
नौकर के नाम 21 संपत्ति, फिर बेटे को ट्रांसफर
इनमें से 16 संपत्तियां शहडोल में और छह उमरिया जिले में हैं। इसके अलावा पांच और संपत्तियां सुखलाल के नाम पर खरीदीं और बाद में उन्हें अपने बेटे के नाम ट्रांसफर करवा लिया। आयकर विभाग ने इस मामले में पदम सिंघानिया को असली मालिक और सुखलाल बैगा को बेनामीदार बताया है।
कोर्ट में दर्ज हुए चारों केस
बेनामी कानून क्या है?
यह कानून उन लोगों पर लगाम लगाने के लिए बनाया गया है जो काले धन को छुपाने के लिए दूसरों के नाम पर संपत्ति खरीदते हैं। इस मामले में दोनों आरोपियों पर यही जुर्म है।
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