धार भोजशाला विवाद: मुस्लिम पक्ष का आरोप, ASI सर्वे में मानकों का पालन नहीं, कार्बन डेटिंग भी नहीं

Jitendra Shrivastava | May 11, 2026, 22:47 IST
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bhojshala (3)
Photograph: (THESOOTR)

धार भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष ने ASI सर्वे को अनुचित बताया। इंदौर हाई कोर्ट में कार्बन डेटिंग न होने और मानकों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया।

ऐसे समझें पूरा मामाला...

  • ASI सर्वे में तय मानकों का पालन नहीं हुआ।
  • मूर्तियां साफ की हुई निकलीं- आरोप।
  • कार्बन डेटिंग न होने पर उठे सवाल।
  • सलमान खुर्शीद वीडियो से कोर्ट में जुड़े।
  • मुस्लिम पक्ष ने उच्च जांच की मांग की।
मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला विवाद (Bhojshala Dispute) एक बार फिर सुर्खियों में है। इंदौर हाई कोर्ट (Indore High Court) में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने ASI सर्वे (ASI Survey) को पूरी तरह अनुचित बताया। कार्बन डेटिंग (Carbon Dating) न होने और मानकों की अनदेखी पर कड़े सवाल उठाए गए हैं।

भोजशाला विवाद की सुनवाई

धार भोजशाला विवाद (Dhar Bhojshala Dispute) की सुनवाई अंतिम दौर में है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में यह मामला चल रहा है। सोमवार को मुस्लिम पक्ष ने अपने तर्क प्रस्तुत किए। इंदौर हाई कोर्ट (Indore High Court) के समक्ष कई अहम दलीलें रखी गईं। मुस्लिम पक्ष ने ASI सर्वे (ASI Survey) को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने उचित जांच करवाने की मांग की।

ASI सर्वे पर उठे गंभीर सवाल

मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता तौसीफ वारसी ने कड़े तर्क दिए। उन्होंने कहा कि भोजशाला ASI सर्वे (ASI Survey) पूरी तरह अनुचित है। कोर्ट के आदेश पर हुए सर्वे में तय मापदंड नहीं अपनाए गए। यह कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी है। इसलिए इस सर्वे की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। मुस्लिम पक्ष ने इसे न्यायिक प्रक्रिया की अवमानना भी बताया।

मूर्तियां साफ मिलीं- विवाद गहराया

भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) में खुदाई के दौरान मूर्तियां मिलीं। मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि ये मूर्तियां पहले से साफ की हुई थीं। यह सर्वे की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अधिवक्ता वारसी ने कहा यह सुनियोजित तरीके से किया गया। यदि सामग्री छेड़ी गई हो तो सर्वे का कोई महत्व नहीं रहता। यह मामला और भी विवादास्पद हो गया है।

कार्बन डेटिंग न होना बड़ा मुद्दा

मुस्लिम पक्ष ने कार्बन डेटिंग (Carbon Dating) न होने को बड़ा मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि ASI को इसका स्पष्ट निर्देश था। लेकिन ASI ने कार्बन डेटिंग करवाई ही नहीं। यह तकनीकी चूक नहीं बल्कि जानबूझकर की गई अनदेखी है। कार्बन डेटिंग से सामग्री की वास्तविक आयु का पता चलता। इसके बिना सर्वे की रिपोर्ट अधूरी और अविश्वसनीय है।

वजू खाना और परिसर पर सवाल

भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) में वजू खाना भी मौजूद था। इसे लेकर भी मुस्लिम पक्ष ने सवाल उठाए। अधिवक्ता ने कहा कि इस पहलू को नजरअंदाज किया गया। परिसर में मौजूद ऐतिहासिक संरचनाओं की जांच जरूरी है। एकतरफा जांच से सच्चाई सामने नहीं आ सकती। न्यायपूर्ण निर्णय के लिए निष्पक्ष सर्वे जरूरी है।

सलमान खुर्शीद की वीडियो दलील

वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद (Senior Advocate Salman Khurshid) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े। उन्होंने भी ASI सर्वे (ASI Survey) पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। उनकी दलीलें इंदौर हाई कोर्ट (Indore High Court) में प्रभावी रहीं। यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर वरिष्ठ अधिवक्ताओं का ध्यान खींच रहा है। कोर्ट में दोनों पक्षों की मजबूत उपस्थिति दर्ज है।

याचिकाकर्ता की आपत्ति

मुस्लिम पक्ष के याचिकाकर्ता अब्दुल समद (Abdul Samad) ने अपना अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि सर्वे के दौरान ही ASI के समक्ष आपत्ति ली गई थी। लेकिन ASI ने उनकी किसी भी आपत्ति का निराकरण नहीं किया। यह रवैया न्यायपूर्ण नहीं कहा जा सकता। सभी आपत्तियां अब कोर्ट के सामने प्रस्तुत की गई हैं। न्यायालय (Court) से निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद जताई गई है।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

मुस्लिम पक्ष (Muslim Side) ने उच्च स्तरीय जांच (High-Level Investigation) की मांग की है। उन्होंने कहा कि ASI की रिपोर्ट पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता।

तय मानकों के उल्लंघन की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। कोर्ट को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्देशों का पालन हो। भोजशाला विवाद (Bhojshala Dispute) का निष्पक्ष समाधान जरूरी है। देश की जनता न्यायालय से न्याय की उम्मीद रखती है।

FAQ

  1. मुस्लिम पक्ष ने भोजशाला ASI सर्वे पर क्या आपत्ति उठाई?
    मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता तौसीफ वारसी ने इंदौर हाई कोर्ट (Indore High Court) में कहा कि ASI सर्वे (ASI Survey) पूरी तरह अनुचित था। कोर्ट के आदेश पर करवाए गए सर्वे में तय मापदंडों का पालन नहीं किया गया। भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) से निकली मूर्तियां पहले से साफ की हुई अवस्था में मिलीं, जो सर्वे की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाती हैं। इसके अलावा, निर्देशित कार्बन डेटिंग (Carbon Dating) भी नहीं करवाई गई।
  2. कार्बन डेटिंग न होने का क्या महत्व है?
    कार्बन डेटिंग (Carbon Dating) एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिससे पुरातात्विक सामग्री की वास्तविक आयु का पता चलता है। धार भोजशाला विवाद (Dhar Bhojshala Dispute) में यह जानना जरूरी था कि परिसर से मिली सामग्री कितनी पुरानी है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि ASI को कार्बन डेटिंग के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। लेकिन ASI ने इस आदेश का पालन नहीं किया, जिससे सर्वे रिपोर्ट की विश्वसनीयता संदिग्ध हो जाती है।
  3. भोजशाला मामले में अब आगे क्या होगा?
    भोजशाला विवाद (Bhojshala Dispute) की सुनवाई अपने अंतिम दौर में है। मुस्लिम पक्ष ने इंदौर हाई कोर्ट (Indore High Court) से ASI सर्वे (ASI Survey) की उच्च स्तरीय जांच (High-Level Investigation) की मांग की है। वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) सहित कई कानूनी विशेषज्ञ इस मामले में शामिल हैं। कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर अंतिम निर्णय लेगा। यह फैसला धार्मिक और पुरातात्विक दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण होगा।
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