भोजशाला विवाद : वकीलों की हड़ताल से नहीं खुल सका ASI का बंद लिफाफा, अगली सुनवाई 18 फरवरी को
Sanjay Gupta | Feb 16, 2026, 09:08 IST
bhojshala case indore high court hearing asi survey report
भोजशाला विवाद पर सोमवार 16 फरवरी को होने वाली सुनवाई टाल दी गई। प्रदेश में वकीलों की हड़ताल के कारण इंदौर हाईकोर्ट यह सुनवाई टाल दी है। अब अगली सुनवाई 18 फरवरी को तय की गई है।
धार भोजशाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 28 जनवरी को अहम आदेश दिया था। निर्देश दिए गए थे कि हाईकोर्ट इंदौर में ही इस मामले की सुनवाई की जाए। साथ ही, सभी पक्षकारों को ASI (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट भी देने को भी कहा था। बता दें कि यह रिपोर्ट बंद लिफाफे में कोर्ट के सामने पेश की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज, 16 फरवरी को यह केस इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच में लिस्ट हुआ था। सुनवाई में ही इस रिपोर्ट का खुलासा भी होना था। हालांकि वकीलों के हड़ताल पर होने के कारण सुनवाई टाल दी गई।
सुनवाई जज विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की कोर्ट में होनी थी। हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया कि आज की सुनवाई वकीलों की हड़ताल के कारण स्थगित हो गई है। इस सुनवाई की अगली तारीख 18 फरवरी दी गई है।
ASI ने हिंदू पक्ष के आवेदन पर वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसे 15 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया था। वहीं मुस्लिम पक्ष ने बताया कि जब तक पहले के मामलों की सुनवाई नहीं होती, हम उसी बात पर बने रहेंगे, हम पहले से कोर्ट जा रहे हैं। 2003 से हमने आपत्ति उठाई थी, जिस पर पहले सुनवाई होना चाहिए।
हाईकोर्ट में भोजशाला के सर्वेक्षण को लेकर याचिका 10497/2022 लगी थी। इस पर हाईकोर्ट ने 11 मार्च 2024 को वैज्ञानिक सर्वेक्षण के आदेश दिए थे। इस आदेश के तहत सर्वे भी हुआ और रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश की गई थी। इसी बीच मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट की याचिका में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री, आशीष गोयल, आशीष जनक, मोहित गर्ग, जितेंद्र सिंह, सुनील सारस्वत याचिकाकर्ता हैं। वहीं इसमें पक्षकार केंद्र सरकार, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, मप्र शासन, जिला कलेक्टर, एसपी धार, मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद और श्री महाराजा भोज सेवा संस्थान समिति के सचिव गोपाल शर्मा हैं।
याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया था कि सुप्रीम कोर्ट में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अभिभाषक विष्णु शंकर जैन ने पैरवी की थी। हाईकोर्ट में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस एवं याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी अभिभाषक विनय जोशी इंदौर के जरिए की जाएगी।
हालांकि सर्वे की रिपोर्ट तो बंद लिफाफे में रखी गई है, लेकिन एएसआई के पहले के वकील हिमांशु जोशी ने 2170 पन्नों की यह रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की थी। इसमें कुछ बातें बाहर आई थीं। रिपोर्ट में बताया गया कि यहां पर 1700 अवशेषों का विश्लेषण किया गया था। इसके बाद 151 पेजों में निष्कर्ष दिए गए थे। धार में स्थित भोजशाला को 11वीं सदी में बनी हिंदू वाग्देवी (सरस्वती देवी) का मंदिर माना जाता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौलाना मस्जिद के रूप में बताता है।
एएसआई के दस्तावेजों के अनुसार, धार की "भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर" 11वीं सदी का ऐतिहासिक स्मारक है। यह लंबे समय से धार्मिक विवादों का केंद्र बनी हुई है। हिंदू पक्ष इसे देवी सरस्वती का मंदिर मानता है।
इसे परमार वंश के राजा भोज ने संस्कृत शिक्षा का एक बड़ा केंद्र बनाने के लिए बनवाया था। ऐतिहासिक जानकारी के मुताबिक, इसे एक शैक्षिक और धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां नक्काशीदार स्तंभ, संस्कृत और प्राकृत में लिखे गए शिलालेख, और प्राचीन विद्वानों का उल्लेख मिलता है।
वहीं, मुस्लिम समुदाय इस स्थल को कमाल मौला मस्जिद के रूप में मानता है। इनका कहता है कि यहां सदियों से नमाज अदा की जाती रही है। ऐतिहासिक दस्तावेजों में इस स्थल पर मध्यकाल में किए गए संरचनात्मक बदलावों का जिक्र मिलता है। साथ ही, परिसर के कुछ हिस्सों में इस्लामी स्थापत्य शैली के मुताबिक नमाज अदा करने के स्थल देखे जा सकते हैं।
पिछले कुछ दशकों में खासकर वसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक साथ पड़ने पर यहां तनाव की स्थिति बन चुकी है। प्रशासन ने दोनों समुदायों के बीच तालमेल बनाने की कोशिश की है। वहीं, मामला अदालतों में लगातार चलता रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज, 16 फरवरी को यह केस इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच में लिस्ट हुआ था। सुनवाई में ही इस रिपोर्ट का खुलासा भी होना था। हालांकि वकीलों के हड़ताल पर होने के कारण सुनवाई टाल दी गई।
18 फरवरी को होगी अगली सुनवाई
ASI ने हिंदू पक्ष के आवेदन पर वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसे 15 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया था। वहीं मुस्लिम पक्ष ने बताया कि जब तक पहले के मामलों की सुनवाई नहीं होती, हम उसी बात पर बने रहेंगे, हम पहले से कोर्ट जा रहे हैं। 2003 से हमने आपत्ति उठाई थी, जिस पर पहले सुनवाई होना चाहिए।
मुस्लिम पक्ष ने बताया था कि ASI का सर्वे गलत तरीके से 2024 के बाद से हुआ है। रात के समय वहां ऐसी चीजें और पत्थर रखे जा रहे हैं, जिस पर अब सर्वे हो रहा है। यह तमाम बातें कोर्ट के सामने रखी गई हैं।
हाईकोर्ट में याचिका और पक्षकार
हाईकोर्ट की याचिका में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री, आशीष गोयल, आशीष जनक, मोहित गर्ग, जितेंद्र सिंह, सुनील सारस्वत याचिकाकर्ता हैं। वहीं इसमें पक्षकार केंद्र सरकार, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, मप्र शासन, जिला कलेक्टर, एसपी धार, मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद और श्री महाराजा भोज सेवा संस्थान समिति के सचिव गोपाल शर्मा हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को लेकर दिए हैं निर्देश
- हाईकोर्ट चीफ जस्टिस मप्र की अध्यक्षता वाली बेंच इस मामले की सुनवाई करे। या फिर पीठ के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश की बेंच के जरिए तीन सप्ताह की अवधि में सुनवाई की जाए।
- डिवीजन बेंच से अनुरोध है कि वह खुली अदालत में रिपोर्ट को अनसील करें और दोनों पक्षों को उसकी प्रतियां उपलब्ध कराएं।
- इसके बाद, पक्षों को अपनी-अपनी आपत्तियां, राय, सुझाव या सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जा सकता है।
- इसके बाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ अंतिम सुनवाई के लिए मामले को ले सकती है और अंतिम सुनवाई के समय पक्षों के सभी निवेदनों पर विधिवत विचार किया जा सकता है।
- रिट याचिका पर अंतिम निर्णय होने तक, भोजशाला सरस्वती मंदिर-सह-मौलाना कमल मौला मस्जिद के स्वरूप में परिवर्तन के संबंध में पक्षकार यथास्थिति बनाए रखेंगे।
- पक्षकार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक के जरिए दिनांक 07 अप्रैल 2003 को जारी आदेश का पालन और कार्यान्वयन करते रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को हिंदू फ्रंट ने बताई थी जीत
भोजशाला में एएसआई द्वारा 98 दिन तक का सर्वे हुआ है। इस सर्वे के आधार पर हाईकोर्ट सुनवाई कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करेगी।
एएसआई रिपोर्ट में यह आया था
जानें क्या है भोजशाला विवाद
इसे परमार वंश के राजा भोज ने संस्कृत शिक्षा का एक बड़ा केंद्र बनाने के लिए बनवाया था। ऐतिहासिक जानकारी के मुताबिक, इसे एक शैक्षिक और धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां नक्काशीदार स्तंभ, संस्कृत और प्राकृत में लिखे गए शिलालेख, और प्राचीन विद्वानों का उल्लेख मिलता है।
मुस्लिम पक्ष मानता है मस्जिद
कई बार बन चुकी तनाव की स्थिति
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