भोजशाला विवाद: मुस्लिम पक्ष की गुहार पर सुप्रीम सुनवाई आज, हिंदू पक्ष भी शीर्ष अदालत में
Amresh Kushwaha | Apr 01, 2026, 10:46 IST
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भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष के आवेदन पर आज, 01 अप्रैल को सुनवाई है। हाईकोर्ट इंदौर में 02 अप्रैल को भी सुनवाई तय है। बता दें कि हिंदू पक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है।
News In Short
- धार का भोजशाला विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
- मुस्लिम पक्ष ने 23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया था।
- आज यानी 01 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष के आवेदन पर सुनवाई है।
- 02 अप्रैल को इंदौर हाईकोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई निर्धारित है।
- हिंदू पक्ष ने जवाब में सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है।
News In Detail
धार भोजशाला विवाद फिर सुप्रीम कोर्ट में
कैविएट का मतलब है कि अदालत उनका पक्ष सुने बिना कोई अंतरिम आदेश न दे। यानी हिंदू पक्ष ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों को सुनकर ही कोई फैसला ले।
मुस्लिम पक्ष ने क्यों खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
हालांकि, 16 मार्च की सुनवाई में इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। उनका मुख्य कानूनी तर्क यह है कि हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर की गई यह मूल याचिका ही सुनवाई के योग्य नहीं है। इसी आवेदन पर 01 अप्रैल यानी आज सुनवाई प्रस्तावित है।
हमने हाईकोर्ट में अपनी सभी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन वहां हमारे बिंदुओं पर विचार नहीं हुआ। इसी कारण हमें न्याय की उम्मीद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। - अब्दुल समद, अध्यक्ष, कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी
हाईकोर्ट इंदौर में 2 अप्रैल को सुनवाई
इसमें एक जनहित याचिका और तीन रिट याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। इनमें से एक याचिका मुस्लिम पक्ष की है और शेष तीन हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल हैं।
आज के फैसले पर टिकी सबकी नजर
01 और 02 अप्रैल को भोजशाला मामले के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई इस विवाद को नई दिशा दे सकती है।
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शिलालेखों में छिपा इतिहास: क्या मिला रिपोर्ट में?
- बहुभाषी शिलालेख: परिसर में संस्कृत, प्राकृत, अरबी और फारसी भाषाओं के शिलालेख (Inscriptions) मिले हैं।
- साहित्यिक साक्ष्य: पत्थरों पर पारिजातमंजरी-नाटिका और अवनिकर्मसातम जैसे प्राचीन ग्रंथों के अंश पाए गए हैं।
- लिपियों का मिश्रण: जहां एक ओर नागरी लिपि के अभिलेख मिले हैं, वहीं 56 अरबी-फारसी शिलालेख भी दर्ज किए गए हैं जिनमें धार्मिक दुआएं और नाम शामिल हैं।
- पुन: उपयोग के संकेत: रिपोर्ट में एक चौंकाने वाली बात यह भी है कि कुछ पत्थरों पर पुरानी लिखावट को मिटाकर उन्हें दोबारा इस्तेमाल (Reuse) किया गया है।
क्या है भोजशाला विवाद की जड़?
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