शहर में मची खलबली, कैसे हो गई गड़बड़ी, आखिर कैसे भोपाल का शाही कब्रिस्तान चला गया किराए पर
Sandeep Kumar | May 15, 2024, 10:28 IST
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नवाब शासन काल में वक्फ के नाम की गई करीब 35 एकड़ जमीन में यह कब्रिस्तान स्थित है। यहां नवाब परिवार और शाही खानदान से जुड़े लोगों को दफनाया जाता है, लेकिन अब इस जगह को किराए पर दे दिया है...
भोपाल शहर के बीच स्थित शाही कब्रिस्तान ( shaahee kabristaan ) के एक बड़े हिस्से को औने- पौने किराए पर दे दिया गया है। अस्थाई किरायादारी बताकर किए गए इस समझौते में जहां वक्फ अधिनियम ( waqf act ) की धज्जियां उड़ाई गई हैं, वहीं भविष्य में इस बेशकीमती जमीन पर स्थाई कब्जा हो जाने के हालात भी बना दिए गए हैं। आपको बताते चलें कि मामला औकाफ ए शाही ( auqaf e shahi ) की निगरानी वाली संपत्ति शाही बड़ा बाग कब्रिस्तान का है। नवाब शासन काल में वक्फ की गई करीब 35 एकड़ जमीन में यह कब्रिस्तान स्थित है। यहां नवाब परिवार और शाही खानदान से जुड़े लोगों को दफनाया जाता है।
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शाही कब्रिस्तान की इस जमीन पर इन दिनों जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से समतलीकरण का काम किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कब्रिस्तान के एक बड़े हिस्से को शहर की एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी को किराए पर दे दिया गया है। हमीदिया रोड समेत आसपास की सड़कों के निर्माण कार्यों के लिए कब्रिस्तान की इस जमीन पर मिक्सिंग प्लांट लगाए जाने की बात कही जा रही है।
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वक्फ अधिनियम 1995 के प्रावधानों के मुताबिक किसी भी कब्रिस्तान की जमीन को स्थाई या अस्थाई किरायादारी पर नहीं दिया जा सकता। लेकिन औकाफ ए शाही ने 11 महीने के किराया समझौते पर कब्रिस्तान की जमीन कंस्ट्रूशन कंपनी को सौंप दी है। हालांकि इस कंपनी से जुड़े लोग यहां करीब 3 साल तक काम जारी रहने की बात कह रहे हैं।
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कब्रिस्तान पर अतिक्रमण के आसार और बढ़े
शाही कब्रिस्तान की 35 एकड़ की जमीन लंबे समय से अवैध कब्जों का गढ़ बनी हुई है। हमीदिया रोड के एक लंबे हिस्से में बड़ी तादाद में स्थाई निर्माण खड़े हो चुके हैं। इसके मॉडल ग्राउंड साइड में भी अंदर तक घुसकर लोगों ने कब्जे कर लिए हैं। इस कब्रिस्तान के बैरसिया रोड वाले हिस्से में कब्जों के नजारे हैं। यहां पूरा हिस्सा अस्थाई दुकानों से घिरा हुआ है। जबकि सिंधी कॉलोनी साइड के हिस्से को भी कब्जाधारियों ने अपनी जद में ले रखा है।
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हाल ही में औकाफ शाही की पुरानी कमेटी को भंग कर एक नई कमेटी गठित की गई है। नई 3 सदस्यीय कमेटी इस किरायादारी समझौते से खुद को अलग बता रही है। जबकि पुरानी कमेटी के सचिव आजम तिरमिजी इस समझौते को वक्फ बोर्ड की सहमति से होना बता रहे हैं। आजम का कहना है कि राकेश शर्मा की कंस्ट्रक्शन कंपनी से 11 महीने का एग्रीमेंट किया गया है। करीब 15 लाख रुपए में यह समझौता हुआ है। जिसके लिए मप्र वक्फ बोर्ड से भी सहमति ली गई है। आपको बताते चलें कि फिलहाल इस समय मप्र वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल है।
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कब्रिस्तान की जमीन पर हो रहा समतलीकरण
शाही कब्रिस्तान की इस जमीन पर इन दिनों जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से समतलीकरण का काम किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कब्रिस्तान के एक बड़े हिस्से को शहर की एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी को किराए पर दे दिया गया है। हमीदिया रोड समेत आसपास की सड़कों के निर्माण कार्यों के लिए कब्रिस्तान की इस जमीन पर मिक्सिंग प्लांट लगाए जाने की बात कही जा रही है।
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क्या कहता है वक्फ बोर्ड का अधिनियम
वक्फ अधिनियम 1995 के प्रावधानों के मुताबिक किसी भी कब्रिस्तान की जमीन को स्थाई या अस्थाई किरायादारी पर नहीं दिया जा सकता। लेकिन औकाफ ए शाही ने 11 महीने के किराया समझौते पर कब्रिस्तान की जमीन कंस्ट्रूशन कंपनी को सौंप दी है। हालांकि इस कंपनी से जुड़े लोग यहां करीब 3 साल तक काम जारी रहने की बात कह रहे हैं।
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कब्रिस्तान पर अतिक्रमण के आसार और बढ़े
शाही कब्रिस्तान की 35 एकड़ की जमीन लंबे समय से अवैध कब्जों का गढ़ बनी हुई है। हमीदिया रोड के एक लंबे हिस्से में बड़ी तादाद में स्थाई निर्माण खड़े हो चुके हैं। इसके मॉडल ग्राउंड साइड में भी अंदर तक घुसकर लोगों ने कब्जे कर लिए हैं। इस कब्रिस्तान के बैरसिया रोड वाले हिस्से में कब्जों के नजारे हैं। यहां पूरा हिस्सा अस्थाई दुकानों से घिरा हुआ है। जबकि सिंधी कॉलोनी साइड के हिस्से को भी कब्जाधारियों ने अपनी जद में ले रखा है।
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दोनों कमेटी में खीचतान
हाल ही में औकाफ शाही की पुरानी कमेटी को भंग कर एक नई कमेटी गठित की गई है। नई 3 सदस्यीय कमेटी इस किरायादारी समझौते से खुद को अलग बता रही है। जबकि पुरानी कमेटी के सचिव आजम तिरमिजी इस समझौते को वक्फ बोर्ड की सहमति से होना बता रहे हैं। आजम का कहना है कि राकेश शर्मा की कंस्ट्रक्शन कंपनी से 11 महीने का एग्रीमेंट किया गया है। करीब 15 लाख रुपए में यह समझौता हुआ है। जिसके लिए मप्र वक्फ बोर्ड से भी सहमति ली गई है। आपको बताते चलें कि फिलहाल इस समय मप्र वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल है।
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