भोपाल निगमायुक्त संस्कृति जैन को बड़ी राहत! अवमानना आदेश पर हाईकोर्ट की रोक

Neel Tiwari | Feb 06, 2026, 12:22 IST
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भोपाल नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन के खिलाफ अवमानना मामले में 6 फरवरी को हाईकोर्ट में बड़ा बदलाव हुआ। जहां एक तरफ सिंगल बेंच ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करने का दोषी ठहराया था। वहीं डिविजनल बेंच ने पूरी स्थिति ही पलट दी।

जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्टकी डिविजनल बेंच ने न सिर्फ सजा पर रोक लगा दी, बल्कि सिंगल बेंच के आदेश को गलत भी माना। डिविजनल बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी पर हाईकोर्ट को अवमानना की कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश सिर्फ “टारगेटेड डिमोलिशन” यानी खास मामलों तक ही सीमित है। अगली सुनवाई 18 फरवरी 2026 को होगी, और मर्लिन बिल्डकॉन को नोटिस जारी किया गया है।

बता दें कि चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच में अपील के दौरान भोपाल नगर निगम आयुक्त आईएएस संस्कृति जैन खुद हाईकोर्ट में मौजूद थीं। अधिवक्ता सुयश मोहन गुरु ने कमिश्नर की तरफ से तर्क रखे।

ये है पूरा मामला

यह पूरा विवाद मर्लिन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा नगर निगम भोपाल के खिलाफ दायर याचिका से जुड़ा है। मामला संपत्ति के सामने बने हिस्से (MOS) को अवैध बताकर की गई ध्वस्तीकरण कार्रवाई से संबंधित था।

निगम का कहना था कि निर्माण की अनुमति 7 नवंबर 2024 को निरस्त की जा चुकी थी। वहीं, 14 मई 2025 को अवैध निर्माण हटाने का नोटिस भी जारी किया गया था।

अचानक अवैध निर्माण तोड़ने के थे आरोप

याचिकाकर्ता ने अवैध निर्माण को शमन (Compounding) कराने के लिए आवेदन किया, लेकिन नगर निगम ने यह कहते हुए आवेदन लौटा दिया कि पहले सामने का अवैध हिस्सा हटाया जाए।

आरोप हैं कि इसी बीच 18 नवंबर 2025 को नगर निगम ने बिना पूर्व सुनवाई के अचानक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी। उसी दिन नया नोटिस जारी कर शेष निर्माण हटाने का निर्देश दे दिया।

सिंगल बेंच की सख्त टिप्पणी और अवमानना आदेश

इस कार्रवाई को लेकर जबलपुर हाई कोर्ट की सिंगल बेंच (जस्टिस विशाल मिश्रा) ने माना कि नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट के ‘डायरेक्शन इन द मैटर ऑफ डिमोलिशन ऑफ स्ट्रक्चर्स (2025)’ के अनिवार्य दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है।

कोर्ट ने कहा था कि न तो व्यक्तिगत सुनवाई दी गई, न मिनट्स रिकॉर्ड हुए और न ही कोई अंतिम आदेश पारित हुआ। इसी आधार पर निगम आयुक्त संस्कृति जैन को ‘कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट एक्ट, 1971’ की धारा 2(b) के तहत दोषी ठहराया गया।

6 फरवरी 2026 को सजा तय करने के लिए व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश दिया गया था। इसके बाद ही भोपाल कमिश्नर के द्वारा इस मामले में डिविजनल बेंच में अपील दायर की गई थी।

6 फरवरी की सुनवाई: पूरा मामला पलटा

6 फरवरी को यह मामला चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच के समक्ष आया। यहां भोपाल नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन और सिटी प्लानर की ओर से सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई थी। इस पर डिविजनल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को ही प्रथम दृष्टया गलत पाया।

डिविजनल बेंच की अहम टिप्पणी

डिविजनल बेंच ने स्पष्ट किया कि जिस सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया जा रहा है, वह उन मामलों से संबंधित है जहां किसी व्यक्ति को आपराधिक मामलों के आधार पर टारगेट कर उसकी संपत्ति तोड़ी जाती है।

कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता एक बिल्डर है और यहां किसी तरह की टारगेटेड कार्रवाई नहीं दिखती।

विदुष ओबेरॉय बनाम अन्य फैसले का हवाला

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के ‘विदुष ओबेरॉय बनाम अन्य’ फैसले का भी उल्लेख किया गया। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि हाई कोर्ट केवल उन्हीं मामलों में अवमानना कार्रवाई शुरू कर सकता है, जो हाईकोर्ट या उसके अधीनस्थ न्यायालयों के आदेशों के उल्लंघन से जुड़े हों।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना पर कंटेंप्ट की कार्रवाई करने का अधिकार हाईकोर्ट को नहीं है।

सिंगल बेंच की कार्रवाई पर रोक, अगली सुनवाई 18 फरवरी को

डिविजनल बेंच ने सिंगल बेंच में चल रही अवमानना कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही मर्लिन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर 18 फरवरी 2026 को जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

भोपाल निगमायुक्त को बड़ी राहत

इस फैसले के साथ भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन को बड़ी राहत मिली है। सिंगल बेंच द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद जहां उनकी सजा तय होनी थी, वहीं अब डिविजनल बेंच के हस्तक्षेप से पूरी अवमानना कार्रवाई पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।

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