भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों पर वॉटर केनन चलाने के मामले की जांच पूरी: पुलिस को क्लीन चिट, कॉलेज प्रबंधन पर सवाल
Sourabh Bhatnagar | Oct 31, 2026, 15:26 IST
भोपाल में डॉक्टरों पर वॉटर केनन का मामला पलटा, पुलिस को क्लीन चिट का दावा
भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों पर हुई कार्रवाई की वॉटर केनन जांच रिपोर्ट आ गई है। सूत्रों के मुताबिक होम सेक्रेटरी शिल्पा गुप्ता की कमेटी ने पुलिस को क्लीन चिट दी है। रिपोर्ट में कॉलेज प्रबंधन पर पुलिस को सूचना न देने का जिक्र है। सितंबर में इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड की मांग लेकर सीएम हाउस की ओर बढ़े थे। अब पुलिसकर्मियों की बहाली का रास्ता साफ हो गया है।
कमेटी की अगुवाई होम सेक्रेटरी शिल्पा गुप्ता कर रही थीं। इस water cannon विवाद की रिपोर्ट अब सीएम मोहन यादव को सौंपी जाएगी।
रिपोर्ट से पुलिसकर्मियों की बहाली का रास्ता भी साफ हो गया है। घटना के बाद दो पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई थी।
सूत्रों के मुताबिक वॉटर केनन जांच रिपोर्ट में घटना का पूरा क्रम दर्ज है। रिपोर्ट कहती है कि छात्रों ने 7 सितंबर को सुबह 11:30 बजे से हंगामा शुरू कर दिया था। इसके बाद भी कॉलेज प्रबंधन, डीन और प्रोफेसर्स ने पुलिस को सूचना नहीं दी।
रिपोर्ट के मुताबिक दोपहर बाद हंगामा उग्र हो गया था। प्रदर्शन सीएम हाउस घेराव की कोशिश में बदल गया। सूत्रों का कहना है कि प्रदर्शनकारी छात्र सीएम हाउस में घुसने की तैयारी में थे।
आंदोलन की जड़ में इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड का मुद्दा था। MBBS intern stipend MP का सवाल जुलाई 2026 से गरमाया हुआ था। इंटर्न्स को अभी 14 हजार 337 रुपए महीना मिलता है। यह रोज के हिसाब से करीब 478 रुपए बैठता है।
इंटर्न्स इसे 30 हजार रुपए करने की मांग कर रहे थे। यह करीब दोगुनी बढ़ोतरी की मांग थी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सीएम मोहन यादव को पत्र लिखकर यही मांग उठाई थी। पत्र के मुताबिक करीब 3600 एमबीबीएस इंटर्न इससे प्रभावित हैं।
7 सितंबर 2026, सोमवार को गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के इंटर्न्स धरने पर बैठे। धरना हमीदिया अस्पताल परिसर में शुरू हुआ। बाद में इंटर्न्स सीएम हाउस की ओर निकले। पुलिस ने अस्पताल गेट के पास बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार करने लगे। तब पुलिस ने वॉटर केनन (भीड़ हटाने वाली तेज पानी की बौछार) चलाया। सफेद कोट में भीगते डॉक्टरों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठी चलाने का आरोप भी लगाया। दावा है कि इस दौरान कई इंटर्न्स घायल हुए थे।
डॉक्टरों के संगठन फेमा (FAIMA – Federation of All India Medical Association) ने कार्रवाई की निंदा की। संगठन ने फ्रैक्चर और कान का पर्दा फटने जैसी चोटों का दावा किया।
लेकिन असली मोड़ जांच रिपोर्ट में आया। सूत्रों के मुताबिक अब कॉलेज प्रबंधन और डीन ही सवालों के घेरे में हैं। रिपोर्ट में पुलिस को समय पर सूचना न देने की बात दर्ज है।
वॉटर केनन के बाद भोपाल इंटर्न डॉक्टर प्रदर्शन और तेज हो गया। इसके बाद 8 सितंबर को प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी का बहिष्कार हुआ। जेडीए (JDA – Junior Doctors Association) ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। हमीदिया, इंदौर के एमवाय अस्पताल और खंडवा मेडिकल कॉलेज में ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुईं।
इसी दिन इंटर्न्स ने तीन मांगें रखीं। पहली मांग थी कि स्टाइपेंड 30 हजार रुपए हो। दूसरी मांग घायल छात्रों को 1.5 लाख रुपए मुआवजे की थी। तीसरी मांग जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की थी।
Hamidia hospital protest का दायरा 8 सितंबर को कमला पार्क तक पहुंच गया। वहीं 9 सितंबर को दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न भी intern doctors protest में शामिल हुए।
9 सितंबर को सरकार ने स्टाइपेंड करीब 50 फीसदी बढ़ाने पर सहमति दी। इससे स्टाइपेंड करीब 21 हजार 500 रुपए महीना होने की बात तय हुई। यह हर महीने करीब 7 हजार रुपए की बढ़ोतरी है। इसके बाद इंटर्न्स ने तीन दिन का आंदोलन खत्म कर दिया।
घटना के बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने जांच के आदेश दिए थे। डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी जांच की बात कही थी। एएसआई नरेंद्र यादव पर लाठी चलाने का आरोप लगा था। वॉटर केनन चला रहे आरक्षक कृष्णदत्त पर भी कार्रवाई हुई थी।
सूत्रों के मुताबिक क्लीन चिट के बाद इन पुलिसकर्मियों की बहाली का रास्ता खुल गया है।
लेकिन सवाल अब भी कायम हैं।
सोचिए एक बार। अगर हंगामा सुबह से था, तो सूचना देने की जिम्मेदारी किसकी थी? और क्या भीड़ रोकने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था?
जांच रिपोर्ट अब सीएम मोहन यादव को सौंपी जाएगी। आगे की कार्रवाई पर अंतिम फैसला सरकार को लेना है।
यह मामला शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और पुलिस बल की सीमा से जुड़ा है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(ख) बिना हथियार शांति से इकट्ठा होने का हक देता है। साथ ही सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना भी पुलिस की जिम्मेदारी है। रिपोर्ट तय करेगी कि भविष्य में ऐसे प्रदर्शनों से कैसे निपटा जाए। इसमें संस्थानों की जवाबदेही का सवाल भी है। प्रदेश के हजारों मेडिकल इंटर्न्स के लिए यह फैसला मायने रखता है।
रिपोर्ट से पुलिसकर्मियों की बहाली का रास्ता भी साफ हो गया है। घटना के बाद दो पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई थी।
वॉटर केनन जांच रिपोर्ट में क्या लिखा
दोपहर बाद सीएम हाउस घेराव की ओर बढ़े छात्र
इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड पर क्या थी मांग
इंटर्न्स इसे 30 हजार रुपए करने की मांग कर रहे थे। यह करीब दोगुनी बढ़ोतरी की मांग थी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सीएम मोहन यादव को पत्र लिखकर यही मांग उठाई थी। पत्र के मुताबिक करीब 3600 एमबीबीएस इंटर्न इससे प्रभावित हैं।
हमीदिया अस्पताल के गेट पर क्या हुआ
रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार करने लगे। तब पुलिस ने वॉटर केनन (भीड़ हटाने वाली तेज पानी की बौछार) चलाया। सफेद कोट में भीगते डॉक्टरों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठी चलाने का आरोप भी लगाया। दावा है कि इस दौरान कई इंटर्न्स घायल हुए थे।
डॉक्टरों के संगठन फेमा (FAIMA – Federation of All India Medical Association) ने कार्रवाई की निंदा की। संगठन ने फ्रैक्चर और कान का पर्दा फटने जैसी चोटों का दावा किया।
डीन बोलीं, वॉटर केनन का इस्तेमाल गलत था
वॉटर केनन का इस्तेमाल गलत था। मुझे भी यह अच्छा नहीं लगा।
By: – डॉ. कविता सिंह, डीन, गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल
तीन दिन चला भोपाल में इंटर्न डॉक्टर्स का प्रदर्शन
इसी दिन इंटर्न्स ने तीन मांगें रखीं। पहली मांग थी कि स्टाइपेंड 30 हजार रुपए हो। दूसरी मांग घायल छात्रों को 1.5 लाख रुपए मुआवजे की थी। तीसरी मांग जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की थी।
Hamidia hospital protest का दायरा 8 सितंबर को कमला पार्क तक पहुंच गया। वहीं 9 सितंबर को दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न भी intern doctors protest में शामिल हुए।
21 हजार 500 रुपए स्टाइपेंड पर खत्म हुई हड़ताल
पुलिसकर्मियों की बहाली का रास्ता साफ
सूत्रों के मुताबिक क्लीन चिट के बाद इन पुलिसकर्मियों की बहाली का रास्ता खुल गया है।
लेकिन सवाल अब भी कायम हैं।
सोचिए एक बार। अगर हंगामा सुबह से था, तो सूचना देने की जिम्मेदारी किसकी थी? और क्या भीड़ रोकने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था?
अब सीएम मोहन यादव के पास जाएगी रिपोर्ट
यह खबर क्यों जरूरी है:
भीलवाड़ा में नहीं चला सोशल मीडिया का जादू, फेमस यूट्यूबर पवन साहू की पत्नी रहीं तीसरे स्थान पर
By Jageshwar Prasad
RSS के संगठन बदलाव पर अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल में लगेगी मुहर, फोकस में जेन जी भी शामिल
By Sanjay Gupta
नगरीय प्रशासन विभाग में बड़ा फेरबदल, 100 अफसर-कर्मचारी इधर से उधर, 53 CMO और 24 इंजीनियर भी बदले
By VINAY VERMA
कई प्राइवेट आयुष कॉलेजों की फीस अब तक तय नहीं, बिना फीस जाने एडमिशन लेने को मजबूर विद्यार्थी
By Manya Jain
छत्तीसगढ़ में कर्मचारी संघों को सरकार की दो टूक, बिना मान्यता मांग पत्र भेजा तो होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर होगी 50, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने भेजे 12 नाम, राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार
By Manya Jain
राजस्थान में भारत-पाक सीमा पर रात 7 बजे से सुबह 6 बजे तक आवाजाही बंद, 12 गांवों में दो महीने बढ़ीं पाबंदियां
By Jyoti Mahender Bhardwaj