भीलवाड़ा में नहीं चला सोशल मीडिया का जादू, फेमस यूट्यूबर पवन साहू की पत्नी रहीं तीसरे स्थान पर

Jageshwar Prasad | Oct 31, 2026, 15:09 IST
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भीलवाड़ा की फुलियाखुर्द ग्राम पंचायत में यूट्यूबर पवन साहू की पत्नी कोमल साहू को सिर्फ 277 वोट मिले
भीलवाड़ा की फुलियाखुर्द ग्राम पंचायत में यूट्यूबर पवन साहू की पत्नी कोमल साहू को सिर्फ 277 वोट मिले

सोशल मीडिया की आभासी दुनिया के लाखों-करोड़ों फॉलोअर्स और डिजिटल लोकप्रियता हमेशा वास्तविक धरातल पर वोटों में तब्दील नहीं होती। इस बात पर मुहर लगाती हुई राजस्थान के भीलवाड़ा (शाहपुरा) जिले की फुलियाखुर्द ग्राम पंचायत से एक खबर सामने आई है। देश के जाने-माने फिटनेस यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पवन साहू की पत्नी कोमल साहू को सरपंच पद के चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा।

मतदान के दौरान दिनभर फर्जी वोटिंग के आरोपों और पुलिस से तीखी नोकझोंक के बाद जब देर रात आधिकारिक नतीजे घोषित किए गए, तो कोमल साहू इस मुकाबले में तीसरे स्थान पर सिमटकर रह गईं।

इस हाई-प्रोफाइल और पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बने ग्रामीण चुनाव में भगवती लाल सोनी ने शानदार जीत हासिल करते हुए सरपंच की कुर्सी पर कब्जा जमाया है। सोशल मीडिया के तमाम बड़े चेहरों और डिजिटल कैंपेनिंग (Digital Campaigning) के बावजूद ग्रामीण मतदाताओं ने साफ कर दिया कि स्थानीय स्तर पर जमीन से जुड़ाव ही मायने रखता है।

पंचायत चुनाव में महिलाओं का जलवा: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की सास सुरज्ञान कंवर बनीं सरपंच | Women Dominate Panchayat Elections: Union Minister Gajendra Singh Shekhawat's Mother-in-Law Surgyan Kanwar Becomes Sarpanch
पंचायत चुनाव में महिलाओं का दबदबा, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की सास भी बनीं सरपंच
31 Oct 2026 ,
By Jageshwar Prasad
नागौर जिले की मेड़ता रोड-गोटन पंचायत समिति की 24 ग्राम पंचायतों में हुए सरपंच पद के चुनावों के नतीजे सामने आ गए हैं। इन नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा दधवाड़ा ग्राम पंचायत की रही, जहां केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की सास सुरज्ञान कंवर ने शानदार जीत दर्ज की है।
नागौर जिले की मेड़ता रोड-गोटन पंचायत समिति की 24 ग्राम पंचायतों में हुए सरपंच पद के चुनावों के नतीजे सामने आ गए हैं। इन नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा दधवाड़ा ग्राम पंचायत की रही, जहां केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की सास सुरज्ञान कंवर ने शानदार जीत दर्ज की है।

फुलियाखुर्द पंचायत चुनाव का पूरा गणित: किसे मिले कितने वोट?

शाहपुरा पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली फुलियाखुर्द ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए कुल 8 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब देर रात मतगणना के आधिकारिक आंकड़े सामने आए, तो परिणामों ने यह तस्वीर पेश की:

  • भगवती लाल सोनी (विजेता): इन्हें मतदाताओं का सबसे अधिक समर्थन मिला और कुल 1,203 वोट पाकर इन्होंने सरपंच पद पर शानदार जीत दर्ज की।
  • कालू राम जाट (उपविजेता): पूर्व सरपंच व मजबूत प्रतिद्वंद्वी कालू राम जाट ने 797 वोट हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया।
  • कोमल साहू (पवन साहू की पत्नी): सोशल मीडिया पर भारी-भरकम फैन फॉलोइंग और आक्रामक प्रचार के बावजूद कोमल साहू मात्र 277 वोट ही हासिल कर सकीं और मुकाबले में तीसरे स्थान पर रहीं।
इस पंचायत में कुल 2,380 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था, जिसमें से स्पष्ट बहुमत भगवती लाल सोनी के पक्ष में गया।

राजस्थान पंचायत चुनाव: मतपत्र पर हाथ से नाम लिखने की गलती, कौन होगा जिम्मेदार? | Rajasthan Panchayat Elections: Handwritten Names on Ballot Papers, Who Will Be Responsible for Errors?
राजस्थान पंचायत चुनाव में एक रात में हाथ से लिखे हजारों उम्मीदवारों के नाम, मतपत्र में गलती हुई तो कौन जिम्मेदार?
30 Oct 2026 ,
By Raghvendra Singh Rathore
राजस्थान में आज 3,626 ग्राम पंचायतों में सरपंच और 33,804 वार्ड पंच पदों के लिए मतदान हो रहा है। खास बात यह है कि मतपत्रों पर उम्मीदवारों के नाम छपे हुए नहीं हैं। मतदान कर्मचारियों को चुनाव चिह्न के सामने काले पेन से नाम लिखने हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि हजारों मतपत्र तैयार करते समय नाम या चुनाव चिह्न की गलती रोकने के लिए क्या व्यवस्था ?
राजस्थान में आज 3,626 ग्राम पंचायतों में सरपंच और 33,804 वार्ड पंच पदों के लिए मतदान हो रहा है। खास बात यह है कि मतपत्रों पर उम्मीदवारों के नाम छपे हुए नहीं हैं। मतदान कर्मचारियों को चुनाव चिह्न के सामने काले पेन से नाम लिखने हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि हजारों मतपत्र तैयार करते समय नाम या चुनाव चिह्न की गलती रोकने के लिए क्या व्यवस्था ?

पवन साहू की सोशल मीडिया में धमक

  • यूट्यूब: 27 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर
  • इंस्टाग्राम: 7 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स
  • फेसबुक: 3 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स
राजस्थान: 70 साल से वार्ड पंच चुनाव नहीं, एक जाजम पर बैठकर चुनते हैं प्रतिनिधि | Rajasthan: Ward Panch elections not held for 70 years, representatives chosen by sitting on one mat
राजस्थान के इस गांव में आजादी के बाद से नहीं हुआ वार्ड पंच का चुनाव, एक जाजम पर बैठकर चुनते हैं प्रतिनिधि
30 Oct 2026 ,
By Ashish Bhardwaj
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक ऐसा गांव है, जहां आजादी के बाद से अब तक वार्ड पंच चुनने के लिए एक भी वोट नहीं डाला गया। गनोड़ा तहसील की भुवासा ग्राम पंचायत के सज्जन सिंह का गढ़ गांव में लोग हर बार आपसी सहमति से वार्ड पंच चुनते हैं।
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक ऐसा गांव है, जहां आजादी के बाद से अब तक वार्ड पंच चुनने के लिए एक भी वोट नहीं डाला गया। गनोड़ा तहसील की भुवासा ग्राम पंचायत के सज्जन सिंह का गढ़ गांव में लोग हर बार आपसी सहमति से वार्ड पंच चुनते हैं।

दिनभर रहा हाई-वोल्टेज ड्रामा, फर्जी वोटिंग के आरोप और पुलिस से तनातनी

चुनाव के दिन फुलियाखुर्द मतदान केंद्र पर सुबह से ही भारी गहमागहमी और तनाव का माहौल बना रहा। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पवन साहू (Pawan Sahu) ने मतदान प्रक्रिया के दौरान एक बूथ पर पहुंचकर फर्जी वोटिंग होने के गंभीर और खुले आरोप लगाए। उनका कहना था कि नियमों को ताक पर रखकर मतदान कराया जा रहा है।

मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और सुरक्षा अधिकारियों ने जब उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए बूथ के अंदर दखल देने से रोका, तो दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और बहस शुरू हो गई। स्थिति को ज्यादा बिगड़ता देख पुलिस ने सख्त रुख अपनाया और पवन साहू को मतदान केंद्र से बाहर खदेड़ दिया। इस हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुआ, जिसने इस चुनाव की चर्चा को और हवा दे दी।

पंचायत चुनाव में हार के बाद भी मिला 25 लाख का सम्मान, भाईचारे की मिसाल पेश | 25 Lakhs Honor Received Despite Losing Panchayat Election, A Precedent of Brotherhood Set
पंचायत चुनाव में भाईचारे की मिसाल हुई पेश, सरपंच का चुनाव हारे प्रत्याशी को दिए 25 लाख
27 Oct 2026 ,
By Ashish Bhardwaj
राजस्थान के नागौर जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने चुनाव के बाद रंजिश की धारणा को बदल दिया है। यहां सरपंच का चुनाव हारने वाली महिला प्रत्याशी के परिवार को ग्रामीणों ने 25 लाख रुपये की सम्मान राशि भेंट की। गांव वालों का कहना है कि चुनाव में हार-जीत अपनी जगह है, लेकिन आपसी रिश्ते और भाईचारा उससे कहीं ऊपर हैं।
राजस्थान के नागौर जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने चुनाव के बाद रंजिश की धारणा को बदल दिया है। यहां सरपंच का चुनाव हारने वाली महिला प्रत्याशी के परिवार को ग्रामीणों ने 25 लाख रुपये की सम्मान राशि भेंट की। गांव वालों का कहना है कि चुनाव में हार-जीत अपनी जगह है, लेकिन आपसी रिश्ते और भाईचारा उससे कहीं ऊपर हैं।

विकास के बड़े वादों के बावजूद जनता ने नकारा

चुनाव प्रचार के दौरान पवन साहू ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। उन्होंने अपने निजी संसाधनों से गांव में पानी की समस्या दूर करने के लिए बोरिंग लगवाने, सड़कों के निर्माण और अन्य बुनियादी विकास कार्यों में हाथ बंटाने का पूरा प्रयास किया था। इसके अलावा, राजस्थान के तमाम अन्य बड़े सोशल इन्फ्लुएंसर्स ने भी वीडियो जारी कर कोमल साहू के पक्ष में वोट करने की अपील की थी।

हालांकि, चुनावी नतीजों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि ग्रामीण स्तर के चुनावों में सोशल मीडिया के 'व्यूज' और 'डिजिटल स्टारडम' से ज्यादा स्थानीय समीकरण, पारिवारिक जुड़ाव और जमीन पर मतदाताओं का सीधा विश्वास मायने रखता है। ओसियां (जोधपुर) के यूट्यूबर ओमप्रकाश बिश्नोई के बाद पवन साहू की यह हार यह दर्शाती है कि वर्चुअल दुनिया की लोकप्रियता को असल मतपेटी के वोटों में बदलना हर बार आसान नहीं होता।

ओमप्रकाश बिश्नोई को भी मिली थी करारी हार

गौरतलब है कि पहले चरण के चुनाव के दौरान भी ठीक इसी तरह का चुनाव नतीजा सामने आया था। सोशल मीडिया की दुनिया में लाखों-करोड़ों फैंस रखने वाले इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर ओमप्रकाश बिश्नोई को जोधपुर जिले की ओसियां तहसील से सरपंच चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लाखों लोगों के दिलों पर राज करने वाले ओमप्रकाश को उनके अपने ही गांव के लोगों का समर्थन नहीं मिल सका। कुल 1,600 मतदाताओं वाले गांव में उन्हें सिर्फ 33 वोटों से ही संतोष करना पड़ा। जोधपुर जिले की ओसियां तहसील में स्थित इंदों की ढाणी द्वितीय ग्राम पंचायत से सरपंच पद के प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरे ओमप्रकाश बिश्नोई की हार इस समय चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है।

सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग और डिजिटल लोकप्रियता को देखते हुए माना जा रहा था कि वे कड़े मुकाबले में रहेंगे। लेकिन चुनावी नतीजों ने यह साबित कर दिया कि सोशल मीडिया की वर्चुअल दुनिया के लाइक और कमेंट्स असल जिंदगी में मतपेटी के वोटों में तब्दील नहीं होते।
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