राजस्थान पंचायत चुनाव में एक रात में हाथ से लिखे हजारों उम्मीदवारों के नाम, मतपत्र में गलती हुई तो कौन जिम्मेदार?
Raghvendra Singh Rathore | Oct 30, 2026, 17:03 IST
राजस्थान पंचायत चुनाव में हाथ से लिखे उम्मीदवारों के नाम
राजस्थान में आज 3,626 ग्राम पंचायतों में सरपंच और 33,804 वार्ड पंच पदों के लिए मतदान हो रहा है। खास बात यह है कि मतपत्रों पर उम्मीदवारों के नाम छपे हुए नहीं हैं। मतदान कर्मचारियों को चुनाव चिह्न के सामने काले पेन से नाम लिखने हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि हजारों मतपत्र तैयार करते समय नाम या चुनाव चिह्न की गलती रोकने के लिए क्या व्यवस्था ?
राजस्थान में पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में शुक्रवार को सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए मतदान हो रहा है। प्रदेश की 3,626 ग्राम पंचायतों में करीब 1.06 करोड़ मतदाताओं को अपने प्रतिनिधि चुनने का मौका मिला है। इसके लिए 11,799 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। लेकिन इस चुनाव में मतदान कर्मचारियों के सामने एक बड़ी चुनौती भी है। उन्हें उम्मीदवारों के नाम मतपत्रों पर खुद लिखने पड़ रहे हैं।
दरअसल, सरपंच और वार्ड पंच चुनाव के मतपत्रों पर पहले से केवल चुनाव चिह्न छपे होते हैं। उम्मीदवारों की अंतिम सूची तैयार होने के बाद मतदान दल के कर्मचारी प्रत्येक उम्मीदवार का नाम उसके चुनाव चिह्न के सामने काले बॉल पेन से लिखते हैं।
यह व्यवस्था इसलिए अपनाई गई है, क्योंकि नामांकन, नाम वापसी और चुनाव चिह्न आवंटन की प्रक्रिया मतदान से महज एक दिन पहले पूरी होती है। ऐसे में अंतिम उम्मीदवारों के नाम छापकर मतपत्र तैयार कराने के लिए पर्याप्त समय नहीं रहता।
राज्य निर्वाचन आयोग के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, दूसरे चरण में 29 अक्टूबर को सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए नामांकन प्रक्रिया हुई। इसी दिन नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी और चुनाव चिह्न आवंटन के बाद उम्मीदवारों की अंतिम सूची तैयार की गई।
इसके अगले ही दिन 30 अक्टूबर को सुबह सात बजे से मतदान शुरू हो गया। शाम छह बजे तक मतदान होना है। इसके बाद ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर मतगणना की जाएगी। इस व्यवस्था में मतदान दलों को सीमित समय के भीतर अंतिम उम्मीदवार सूची के अनुसार मतपत्र तैयार करने और मतदान केंद्र की दूसरी व्यवस्थाएं पूरी करने की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।
राज्य निर्वाचन आयोग के 2 अक्टूबर 2026 के निर्देश क्रमांक 9809 का हवाला देते हुए प्रकाशित विवरण के अनुसार, सरपंच और वार्ड पंच के मतपत्रों पर पहले से केवल चुनाव चिह्न छपे होते हैं। मतदान कर्मचारियों को प्रत्येक उम्मीदवार का नाम निर्धारित स्थान पर काले बॉल पेन से लिखना होता है। अंतिम उम्मीदवार के बाद नोटा का विकल्प भी निर्धारित व्यवस्था के अनुसार लगाया जाता है। ऐसे में सबसे जरूरी है कि अंतिम उम्मीदवार सूची, चुनाव चिह्न और मतपत्र पर लिखे गए नामों का आपस में सही मिलान हो।
राजस्थान पंचायती राज निर्वाचन नियम, 1994 के नियम 39A में मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम उसी क्रम में रखने और उनके सामने आवंटित चुनाव चिह्न दर्शाने का प्रावधान है। उम्मीदवारों का विवरण देवनागरी लिपि में होना चाहिए। इससे एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है। यदि किसी उम्मीदवार का नाम गलत चुनाव चिह्न के सामने लिख दिया जाए या नाम लिखने में गलती हो जाए, तो उसे मतदान शुरू होने से पहले कैसे पकड़ा जाएगा?
मतपत्र पर उम्मीदवार के नाम और चुनाव चिह्न का सही होना चुनाव की निष्पक्षता के लिए जरूरी है। यदि किसी उम्मीदवार का नाम गलत चिह्न के सामने दर्ज हो जाए, तो मतदाता भ्रमित हो सकता है। खासकर उन मतदाताओं के लिए यह परेशानी बढ़ सकती है, जो उम्मीदवार की पहचान नाम या चुनाव चिह्न से करते हैं।
ऐसी स्थिति में मतपत्र की गलती केवल तकनीकी समस्या नहीं रहेगी। उससे मतदान प्रक्रिया पर आपत्ति और बाद में चुनावी विवाद की आशंका पैदा हो सकती है।
पंचायत चुनाव के पहले चरण में भी मतदान दलों को इसी प्रक्रिया से मतपत्र तैयार करने पड़े थे। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने स्वीकार किया था कि मतपत्रों पर उम्मीदवारों के नाम हाथ से लिखने में कर्मचारियों को मेहनत करनी पड़ेगी। उन्होंने कर्मचारियों की कर्तव्यनिष्ठा और परिश्रम पर भरोसा जताया था।
अब दूसरे चरण में भी यही व्यवस्था अपनाई गई है। ऐसे में पहले चरण के अनुभव के आधार पर आयोग ने मतपत्रों की जांच और गलती सुधारने के लिए क्या अतिरिक्त निर्देश दिए।
जयपुर जिले में पंचायत चुनाव अलग-अलग चरणों में कराए जा रहे हैं। दूसरे चरण में जिन पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों में मतदान हो रहा है, वहां भी मतपत्र तैयार करने की यही व्यवस्था लागू है। अब जिला निर्वाचन कार्यालय से यह जानकारी मिलनी चाहिए कि कितने मतदान केंद्रों पर मतपत्र तैयार किए गए, कितने कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई और मतपत्रों के अंतिम सत्यापन की क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
राजस्थान में इतने बड़े स्तर पर हाथ से नाम लिखकर मतपत्र तैयार करने की व्यवस्था ने चुनाव प्रबंधन से जुड़े कई सवाल खड़े किए हैं। क्या हर मतपत्र का उम्मीदवार सूची से मिलान किया जाता है? क्या मतदान शुरू होने से पहले रिटर्निंग ऑफिसर सभी मतपत्रों की जांच करता है? गलती मिलने पर सुधार की क्या प्रक्रिया है? और यदि मतदान के बाद कोई उम्मीदवार मतपत्र में त्रुटि की शिकायत करे, तो उसके निस्तारण का आधार क्या होगा?
दरअसल, सरपंच और वार्ड पंच चुनाव के मतपत्रों पर पहले से केवल चुनाव चिह्न छपे होते हैं। उम्मीदवारों की अंतिम सूची तैयार होने के बाद मतदान दल के कर्मचारी प्रत्येक उम्मीदवार का नाम उसके चुनाव चिह्न के सामने काले बॉल पेन से लिखते हैं।
यह व्यवस्था इसलिए अपनाई गई है, क्योंकि नामांकन, नाम वापसी और चुनाव चिह्न आवंटन की प्रक्रिया मतदान से महज एक दिन पहले पूरी होती है। ऐसे में अंतिम उम्मीदवारों के नाम छापकर मतपत्र तैयार कराने के लिए पर्याप्त समय नहीं रहता।
गुरुवार को उम्मीदवार तय हुए, शुक्रवार सुबह शुरू हुआ मतदान
इसके अगले ही दिन 30 अक्टूबर को सुबह सात बजे से मतदान शुरू हो गया। शाम छह बजे तक मतदान होना है। इसके बाद ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर मतगणना की जाएगी। इस व्यवस्था में मतदान दलों को सीमित समय के भीतर अंतिम उम्मीदवार सूची के अनुसार मतपत्र तैयार करने और मतदान केंद्र की दूसरी व्यवस्थाएं पूरी करने की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।
चुनाव चिह्न के सामने हाथ से लिखना होता है नाम
नाम और चुनाव चिह्न का मिलान कैसे होता है?
एक गलती से चुनावी विवाद की आशंका
ऐसी स्थिति में मतपत्र की गलती केवल तकनीकी समस्या नहीं रहेगी। उससे मतदान प्रक्रिया पर आपत्ति और बाद में चुनावी विवाद की आशंका पैदा हो सकती है।
पहले चरण में भी कर्मचारियों के सामने थी यही चुनौती
अब दूसरे चरण में भी यही व्यवस्था अपनाई गई है। ऐसे में पहले चरण के अनुभव के आधार पर आयोग ने मतपत्रों की जांच और गलती सुधारने के लिए क्या अतिरिक्त निर्देश दिए।
जयपुर में भी मतपत्रों की जांच का सवाल
राज्य निर्वाचन आयोग के सामने ये सवाल
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