भोपाल के कोहेफिजा की करोड़ों की जमीन पर हाईकोर्ट सख्त, वन सचिव तलब
Neel Tiwari | Jul 22, 2026, 11:40 IST
bhopal kohefiza vip land highcourt case
भोपाल के सबसे महंगे इलाकों में शामिल कोहेफिजा की करोड़ों रुपए कीमत वाली जमीन को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने वन विभाग के सचिव को 10 अगस्त को व्यक्तिगत रूपए से पेश होने का आदेश दिया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल के पॉश कोहेफिजा इलाके में सरकार ने केवल 3.36 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था।
- आरोप है कि इसके बाद करीब 1.48 एकड़ अतिरिक्त जमीन भी सरकारी कब्जे में चली गई।
- कई साल तक यह मामला राजस्व अदालतों और फिर हाईकोर्ट में चलता रहा।
- सीमांकन में अतिरिक्त जमीन पर सरकारी कब्जे के दावे को बल मिला।
- अब हाईकोर्ट ने जमीन लौटाने की प्रक्रिया पर जवाब मांगते हुए वन सचिव को तलब किया है।
भोपाल की जमीन अब हाईकोर्ट की निगरानी में
इसी जमीन को लेकर वर्षों से कानूनी लड़ाई चल रही है। अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने वन विभाग के सचिव को 10 अगस्त 2026 को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। अदालत यह भी देखेगी कि अतिरिक्त कब्जे वाली जमीन को असली मालिकों को लौटाने की प्रक्रिया कितनी आगे बढ़ी है।
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कोहेफिजा की जमीन कैसे आई विवाद में
इसमें बड़ा हिस्सा एमपी वन विभाग की फेंसिंग के भीतर चला गया। वहीं कुछ जमीन पर वीआईपी रोड (VIP Road) का निर्माण भी हो गया। इसी अतिरिक्त जमीन को लेकर भू-स्वामियों ने कानूनी लड़ाई शुरू की।
पहले राजस्व अदालतों ने माना अतिरिक्त कब्जा
बाद में एसडीओ ने इस फैसले में बदलाव किया। बदलाव करते हुए अतिरिक्त 1.48 एकड़ जमीन भू-स्वामियों को लौटाने का आदेश दिया। यह आदेश आगे की पूरी कानूनी लड़ाई की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बना।
सरकार को राहत मिली, फिर खत्म भी हो गई
2019 में हाईकोर्ट ने सरकार की याचिका खारिज की
रिकॉर्ड साफ बताता है कि अधिग्रहण केवल 3.36 एकड़ का था। ऐसे में अतिरिक्त जमीन पर कब्जा सही नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भू-स्वामी अपनी जमीन वापस मांगने के हकदार हैं।
अपील में सरकार को मिली थी केवल अंतरिम राहत
नए सीमांकन ने बदल दी पूरे केस की दिशा
रिपोर्ट में सामने आया बड़ा खुलासा
सरकार की चुप्पी पर अदालत ने दिखाई सख्ती
अब 1.43 एकड़ जमीन लौटाने की प्रक्रिया शुरू
10 अगस्त की सुनवाई पर सबकी नजर
ये फैसला क्यों बन सकता है बड़ी मिसाल
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