भोपाल में सीलिंग का खतरा फिर लौटा: राहत के ड्राफ्ट में भी कारोबार की कई शर्तें, व्यापारियों की बढ़ेंगी मुश्किलें!

Ramanand Tiwari | Sootr Creatives | Oct 03, 2026, 23:06 IST
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भोपाल नगर निगम सीलिंग कार्रवाई की नई योजना बना रहा है। जानिए मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट में क्या है योजना। <br>
भोपाल नगर निगम सीलिंग कार्रवाई की नई योजना बना रहा है। जानिए मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट में क्या है योजना।

भोपाल में करीब एक महीने से थमी सीलिंग कार्रवाई फिर शुरू करने की तैयारी है। मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट में नियमितीकरण का रास्ता जरूर है, लेकिन सड़क, पार्किंग, निर्माण और पुराने रिकॉर्ड की शर्तें कई कारोबारियों की मुश्किल बढ़ा सकती हैं। भोपाल नगर निगम सीलिंग कार्रवाई की नई योजना बना रहा है।

भोपाल के रिहायशी इलाकों में दुकान या शोरूम चला रहे कारोबारियों के सामने अब सवाल सिर्फ सीलिंग का नहीं, बल्कि पात्रता साबित करने का है। करीब एक महीने से थमी कार्रवाई दोबारा शुरू करने की तैयारी है। मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट में नियमितीकरण का प्रस्ताव है। पुराने रिकॉर्ड से लेकर सड़क की चौड़ाई और पार्किंग तक की शर्तें राहत का दायरा सीमित कर सकती हैं।

राहत की चर्चा ज्यादा, लेकिन असली पेंच पात्रता में

मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट सामने आने के बाद नई धारणा बन रही है। रिहायशी इलाकों में पहले से चल रही दुकानों और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को राहत मिल सकती है। लेकिन प्रस्तावों को देखें तो मामला इतना सीधा नहीं है।

नियमितीकरण के लिए केवल यह साबित करना पर्याप्त नहीं होगा कि दुकान वर्षों से चल रही है। संपत्ति का पुराना उपयोग, गैर-रिहायशी दर से जमा प्रॉपर्टी टैक्स और व्यावसायिक बिजली कनेक्शन जैसे दस्तावेज जांच के दायरे में आ सकते हैं।

यानी जिन कारोबारियों के पास अपने पुराने व्यावसायिक उपयोग का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है, उनके सामने पात्रता साबित करने की चुनौती खड़ी हो सकती है।

बालाघाट के आदिवासी इलाकों के लिए 400 करोड़ का डेवलपमेंट प्लान, बच्चों की मौत वाले गांवों में बढ़ेंगी स्वास्थ्य सुविधाएं
03 Oct 2026 ,
By Sumit Kumar
बालाघाट के आदिवासी इलाकों में अब करीब 400 करोड़ रुपए के विकास काम किए जाएंगे। बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद सरकार ने यहां स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने पर फोकस बढ़ाया है। पांच ब्लॉक में सड़क, पानी, हेल्थ सेंटर और छोटे बांध से जुड़े करीब 1,500 काम कराने की तैयारी है।
बालाघाट के आदिवासी इलाकों में अब करीब 400 करोड़ रुपए के विकास काम किए जाएंगे। बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद सरकार ने यहां स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने पर फोकस बढ़ाया है। पांच ब्लॉक में सड़क, पानी, हेल्थ सेंटर और छोटे बांध से जुड़े करीब 1,500 काम कराने की तैयारी है।

निगम की नई सूची में कौन आएगा?

भोपाल नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई करीब एक महीने से थमी है। अब निगम ड्राफ्ट मास्टर प्लान के प्रस्तावों और न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए नई कार्ययोजना बनाने की तैयारी में है।

डिप्टी कमिश्नर भुवन गुप्ता के अनुसार, ड्राफ्ट के प्रावधानों के आधार पर एक्शन प्लान बनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन किया जाएगा।

हालांकि, कार्रवाई किस तारीख से शुरू होगी और पहले किन इलाकों या प्रतिष्ठानों की जांच होगी, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।

सबसे बड़ा पेंच सड़क और पार्किंग

ड्राफ्ट में व्यावसायिक गतिविधियों का दायरा सड़क की चौड़ाई से जोड़ने का प्रस्ताव है। 12 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर गतिविधियों का दायरा सीमित रखने की बात है।

चौड़ी सड़कों पर बैंक, मेडिकल स्टोर, रेस्टोरेंट और शोरूम जैसी गतिविधियों के लिए अपेक्षाकृत ज्यादा गुंजाइश प्रस्तावित है। गैर-रिहायशी इस्तेमाल को सामान्य तौर पर स्वीकृत एफएआर के 50 प्रतिशत तक सीमित रखने का प्रस्ताव भी है।

इसका मतलब यह है कि एक ही कॉलोनी की दो पुरानी दुकानों की कानूनी स्थिति अलग हो सकती है। सड़क की चौड़ाई, भवन का उपयोग और पार्किंग उनकी पात्रता बदल सकते हैं।

क्या गुजरात की तरह एमपी में भी होगी शराबबंदी?: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया बड़ा ऐलान
03 Oct 2026 ,
By Arohi Raj
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार यानी 3 अक्टूबर को भोपाल आए थे। उन्होंने भेल दशहरा मैदान में कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने एक बड़ा ऐलान किया है। बता दें शाह ने कहा कि एमपी 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त होगा। इसके अलावा शाह ने गोशालाओं के लिए 101 करोड़ और उज्जैन के डेयरी प्लांट के लिए 225 करोड़ रुपए देने की घोषणा की है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार यानी 3 अक्टूबर को भोपाल आए थे। उन्होंने भेल दशहरा मैदान में कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने एक बड़ा ऐलान किया है। बता दें शाह ने कहा कि एमपी 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त होगा। इसके अलावा शाह ने गोशालाओं के लिए 101 करोड़ और उज्जैन के डेयरी प्लांट के लिए 225 करोड़ रुपए देने की घोषणा की है।

इन मामलों में राहत की उम्मीद कमजोर

बिना मंजूरी के निर्माण, अनधिकृत कॉलोनियों की संपत्ति और सामने की खुली जगह या पार्किंग पर कब्जे वाले मामलों को नियमितीकरण से बाहर रखने का प्रस्ताव है।

ग्रीन एरिया, जलाशय, वन क्षेत्र और प्रस्तावित सड़क की जमीन पर मौजूद निर्माणों के लिए भी राहत का रास्ता नहीं खुलता दिख रहा।

ऐसे मामलों में लागू नियमों और न्यायालय के आदेशों के अनुसार कार्रवाई जारी रह सकती है। किसी संपत्ति को सील करने का अंतिम फैसला हालांकि जांच और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही होगा।

नियमितीकरण मुफ्त नहीं होगा

पात्र संपत्ति मालिकों के लिए कमर्शियल और रिहायशी कलेक्टर गाइडलाइन दरों के अंतर का 20 प्रतिशत उपयोग परिवर्तन शुल्क देने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क, पार्किंग मुआवजा और दूसरे कानूनी शुल्क भी लग सकते हैं। यानी पात्रता मिल जाने के बाद भी नियमितीकरण की आर्थिक लागत अलग सवाल होगी।

ड्राफ्ट में अंतिम विकास योजना अधिसूचित होने के बाद पात्र मामलों को प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक साल देने का प्रस्ताव है।

अधिकारियों की खींचतान में फंसी मध्यप्रदेश की 237 पर्यावरण मंजूरियां, अब सिया बैठक में होगा फैसला!
03 Oct 2026 ,
By Amresh Kushwaha
मध्यप्रदेश में पर्यावरण मंजूरियों को लेकर मामला अब कानूनी विवाद में फंस गया है। राज्य के प्राधिकरण में अधिकारियों के बीच चली खींचतान का असर 237 मंजूरियों पर पड़ा है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जहां 13 अक्टूबर को सुनवाई होगी। इस बीच केंद्र सरकार ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष साफ कर दिया है।
मध्यप्रदेश में पर्यावरण मंजूरियों को लेकर मामला अब कानूनी विवाद में फंस गया है। राज्य के प्राधिकरण में अधिकारियों के बीच चली खींचतान का असर 237 मंजूरियों पर पड़ा है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जहां 13 अक्टूबर को सुनवाई होगी। इस बीच केंद्र सरकार ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष साफ कर दिया है।

ड्राफ्ट को छूट न समझें

कारोबारियों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि मास्टर प्लान-2047 अभी ड्राफ्ट स्तर पर है। प्रस्तावित नियमितीकरण को तत्काल और सार्वभौमिक कानूनी छूट मानना जोखिम भरा होगा।

निगम की नई कार्ययोजना सामने आने के बाद ही साफ होगा कि पुराने प्रतिष्ठानों की जांच किस आधार पर होगी, नोटिस की प्रक्रिया क्या रहेगी और किन मामलों में सीलिंग तक बात पहुंचेगी।

ड्राफ्ट से राहत की उम्मीद

ड्राफ्ट से राहत की उम्मीद बनी है, लेकिन पात्रता की कई शर्तें हैं; कार्रवाई की तारीख और प्राथमिकता स्पष्ट नहीं है। इसलिए व्यापारियों के लिए कानूनी अनिश्चितता अभी खत्म नहीं हुई है।

अफसरों ने फोटो में गड्ढे भर सुधार दी सड़क, पीडब्ल्यूडी मंत्री ने दिए थे चार दिन में मरम्मत के निर्देश
03 Oct 2026 ,
By Sanjay Dhiman
लोक निर्माण विभाग के लोकपथ एप पर रोड के गड्ढों की शिकायतें बंद दिखाई गईं, लेकिन सागर जिले के बीना और खुरई-राहतगढ़ रोड पर हालत जस की तस बताई जा रही है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अफसरों ने दूसरी रोड की फोटो अपलोड कर शिकायतों का निराकरण दर्ज किया। मंत्री राकेश सिंह ने चार दिन में निपटारे के निर्देश दिए थे। <br />
लोक निर्माण विभाग के लोकपथ एप पर रोड के गड्ढों की शिकायतें बंद दिखाई गईं, लेकिन सागर जिले के बीना और खुरई-राहतगढ़ रोड पर हालत जस की तस बताई जा रही है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अफसरों ने दूसरी रोड की फोटो अपलोड कर शिकायतों का निराकरण दर्ज किया। मंत्री राकेश सिंह ने चार दिन में निपटारे के निर्देश दिए थे। <br />

  1. भोपाल में दुकानें और शोरूम नियमितीकरण के लिए क्या पात्रता मानदंड हैं?
    भोपाल में दुकानें और शोरूम नियमितीकरण के लिए केवल पुरानी गतिविधियों का रिकॉर्ड होना पर्याप्त नहीं होगा। संपत्ति के पुराने उपयोग, गैर-रिहायशी दर से जमा प्रॉपर्टी टैक्स, और व्यावसायिक बिजली कनेक्शन जैसे दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।
  2. सीलिंग कार्रवाई फिर से शुरू होने पर किन इलाकों की जांच की जाएगी?
    भोपाल नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई की नई कार्ययोजना में किस तारीख से कार्रवाई शुरू होगी और पहले किन इलाकों की जांच होगी, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
  3. क्या मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट तत्काल राहत देने वाला है?
    मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट राहत की उम्मीदें जरूर पैदा करता है, लेकिन इसे तुरंत और सार्वभौमिक कानूनी छूट मानना जोखिम भरा होगा। पात्रता की कई शर्तें हैं और कार्ययोजना आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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