अफसरों ने फोटो में गड्ढे भर सुधार दी सड़क, पीडब्ल्यूडी मंत्री ने दिए थे चार दिन में मरम्मत के निर्देश

Sanjay Dhiman | Oct 03, 2026, 17:34 IST
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गड्ढे भरे नहीं, शिकायत बंद हो गई? लोकपथ एप पर लोक निर्माण विभाग की रोड मरम्मत पर सवाल<br>
गड्ढे भरे नहीं, शिकायत बंद हो गई? लोकपथ एप पर लोक निर्माण विभाग की रोड मरम्मत पर सवाल

लोक निर्माण विभाग के लोकपथ एप पर रोड के गड्ढों की शिकायतें बंद दिखाई गईं, लेकिन सागर जिले के बीना और खुरई-राहतगढ़ रोड पर हालत जस की तस बताई जा रही है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अफसरों ने दूसरी रोड की फोटो अपलोड कर शिकायतों का निराकरण दर्ज किया। मंत्री राकेश सिंह ने चार दिन में निपटारे के निर्देश दिए थे।

बीना और खुरई में रोड के गड्ढे जस के तस हैं। लेकिन लोकपथ एप पर शिकायतें बंद हो चुकी हैं। आरोप है कि अफसरों ने दूसरी रोड की फोटो अपलोड कर दी।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने शिकायतें चार दिन में निपटाने को कहा था। उन निर्देशों के बाद जमीनी हकीकत पर सवाल उठ रहे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

लोक निर्माण विभाग ने गड्ढों की शिकायत के लिए लोकपथ एप शुरू किया है। इस एप पर बीना और खुरई-राहतगढ़ रोड के शिकायतकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक गड्ढे भरे बिना दूसरी जगह की फोटो अपलोड कर दी गई। विभाग के रिकॉर्ड में दोनों शिकायतें निपटी हुई दिख रही हैं। मंत्री के चार दिन वाले निर्देश के बाद यह मामला सामने आया है।

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बालाघाट के आदिवासी इलाकों में अब करीब 400 करोड़ रुपए के विकास काम किए जाएंगे। बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद सरकार ने यहां स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने पर फोकस बढ़ाया है। पांच ब्लॉक में सड़क, पानी, हेल्थ सेंटर और छोटे बांध से जुड़े करीब 1,500 काम कराने की तैयारी है।
बालाघाट के आदिवासी इलाकों में अब करीब 400 करोड़ रुपए के विकास काम किए जाएंगे। बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद सरकार ने यहां स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने पर फोकस बढ़ाया है। पांच ब्लॉक में सड़क, पानी, हेल्थ सेंटर और छोटे बांध से जुड़े करीब 1,500 काम कराने की तैयारी है।

क्या है लोकपथ एप?

लोकपथ एप (Lokpath App) रोड के गड्ढों की शिकायत का डिजिटल जरिया है। कोई भी व्यक्ति गड्ढे की फोटो एप पर डालता है। शिकायत सीधे संबंधित अफसर तक पहुंच जाती है।

यह व्यवस्था जुलाई 2024 की शुरुआत में प्रदेश में लागू हुई थी। तब अफसरों को सात दिन में सुधार करना था। उसके बाद एप पर निराकरण दर्ज करना जरूरी था। निराकरण दर्ज होते ही शिकायतकर्ता के मोबाइल पर सूचना पहुंचती है।

योजना दो चरणों में लागू होनी थी। पहले चरण में राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और मुख्य जिला मार्ग शामिल हुए। दूसरे चरण में बाकी जिला और ग्रामीण मार्ग शामिल होने थे।

गड्ढे वहीं, फोटो कहीं और की

बीना रिफाइनरी रोड पर क्या हुआ?

यह रोड बीना रिफाइनरी गेट नंबर-1 से शुरू होती है। फिर कोविड अस्पताल मार्ग होते हुए मुंगावली-कंजिया रोड तक जाती है। इसी रोड के गड्ढों की शिकायत लोकपथ एप पर की गई थी। चार दिन में एप पर इस सड़क की मरम्मत के बाद शिकायत का निराकरण होना बताया जा रहा है।

शिकायतकर्ता के अनुसार मौके पर मरम्मत नहीं हुई। बल्कि दूसरी जगह की सीसी (CC – Cement Concrete) रोड की फोटो डाली गई। सवाल सीधा है। जिस रोड की मरम्मत ही नहीं हुई, उसका निराकरण किस आधार पर हुआ?

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार यानी 3 अक्टूबर को भोपाल आए थे। उन्होंने भेल दशहरा मैदान में कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने एक बड़ा ऐलान किया है। बता दें शाह ने कहा कि एमपी 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त होगा। इसके अलावा शाह ने गोशालाओं के लिए 101 करोड़ और उज्जैन के डेयरी प्लांट के लिए 225 करोड़ रुपए देने की घोषणा की है।
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खुरई-राहतगढ़ रोड पर क्या हुआ?

खुरई-राहतगढ़ रोड पर भी गड्ढों की शिकायत दर्ज की गई थी। आरोप है कि यहां भी गड्ढे भरने की असली फोटो नहीं लगी। दूसरी जगह की रोड की तस्वीर अपलोड कर शिकायत बंद कर दी गई।

शिकायतकर्ता के अनुसार रोड की असली हालत में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। अधिकारियों ने लोक निर्माण मंत्री के निर्देशों को पूरा करने के लिए फर्जी फोटो से शिकायतों का निराकरण कर दिया।

मंत्री के निर्देश पर उठे सवाल

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने अफसरों को निर्देश दिए थे। रोड के गड्ढों की शिकायतों का चार दिन के भीतर निराकरण होना था। एप की शुरुआत में यह समय सीमा सात दिन थी।

इसके बाद शिकायतें तुरंत निपटाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन जमीनी स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। सोचिए एक बार। रिकॉर्ड में रोड ठीक है, पर शिकायतकर्ता के सामने गड्ढा अब भी मौजूद है। ऐसे में समय सीमा का क्या मतलब रह जाता है?

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ऑनलाइन सिस्टम की साख दांव पर

अगर निराकरण के नाम पर गलत फोटो लग रही हैं, तो मामला गंभीर है। इससे पूरी ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। वरिष्ठ अधिकारियों को ऑनलाइन सिस्टम के लूप होल को बंद करने की दिशा में विचार करना होगा।

जीपीएस सत्यापन क्यों जरूरी है?

विभाग के उच्चाधिकारियों को ऐसी शिकायतों की मौके पर जांच करनी चाहिए। उन्हें देखना चाहिए कि एप पर लगी फोटो उसी स्थान की है या नहीं। शिकायत बंद करने से पहले जीपीएस (GPS – Global Positioning System) सत्यापन जरूरी है।

यानी फोटो उसी लोकेशन से ली गई हो, जहां गड्ढा था। मौके की जांच की व्यवस्था भी प्रभावी रूप से लागू होनी चाहिए। तभी निराकरण का रिकॉर्ड और जमीन की हालत एक जैसी दिखेगी।

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आम लोगों को क्या नुकसान?

इन मार्गों से रोज गुजरने वाले लोग गड्ढों से परेशान हैं। शिकायतकर्ता की समस्या जस की तस बनी हुई है। विभाग के रिकॉर्ड में शिकायत निपट चुकी है।

यानी कागज की तस्वीर और जमीन की तस्वीर अलग-अलग है। यही फर्क सबसे अहम सवाल है।

  1. लोकपथ एप क्या है और यह कैसे काम करता है?
    लोकपथ एप रोड के गड्ढों की शिकायत का डिजिटल जरिया है, जो जुलाई 2024 में शुरू किया गया था। उपयोगकर्ता गड्ढों की फोटो अपलोड कर सकते हैं, और यह शिकायत सीधे संबंधित अधिकारियों तक पहुँचती है।
  2. बीना और खुरई में गड्ढों की शिकायत का क्या हुआ?
    बीना और खुरई में गड्ढों की शिकायतें जारी हैं, लेकिन शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अधिकारियों ने दूसरी जगह की रोड की फोटो अपलोड कर दी है, जिससे शिकायतें बंद कर दी गई हैं।
  3. मंत्री राकेश सिंह के निर्देशों का क्या प्रभाव पड़ा?
    मंत्री राकेश सिंह ने चार दिन में शिकायतों का निपटारा करने का निर्देश दिया था, लेकिन जमीनी स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अधिकारियों ने निराकरण के नाम पर गलत फोटो लगाई।
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