अधिकारियों की खींचतान में फंसी मध्यप्रदेश की 237 पर्यावरण मंजूरियां, अब सिया बैठक में होगा फैसला!
Amresh Kushwaha | Oct 03, 2026, 13:23 IST
मध्यप्रदेश में पर्यावरण मंजूरियों पर विवाद।
मध्यप्रदेश में पर्यावरण मंजूरियों को लेकर मामला अब कानूनी विवाद में फंस गया है। राज्य के प्राधिकरण में अधिकारियों के बीच चली खींचतान का असर 237 मंजूरियों पर पड़ा है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जहां 13 अक्टूबर को सुनवाई होगी। इस बीच केंद्र सरकार ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष साफ कर दिया है।
237 मंजूरियों का पूरा मामला
पर्यावरण मंजूरी को ईसी यानी Environmental Clearance भी कहा जाता है। कई परियोजनाओं को शुरू करने से पहले यह मंजूरी लेना जरूरी होता है। इसलिए पूरी प्रक्रिया का कानून और तय नियमों के मुताबिक होना बहुत जरूरी है।
मंजूरी की प्रक्रिया क्या है
डीम्ड क्लीयरेंस पर रुख
डीम्ड क्लीयरेंस का मतलब है ऐसी मंजूरी, जिसे तय समय में फैसला न होने पर अपने आप मंजूर मान लिया जाए। केंद्र सरकार का कहना है कि पर्यावरण मंजूरी के नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसी वजह से बिना बैठक के जारी हुई मंजूरियों पर सवाल उठ रहे हैं।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि एसईएसी इन 237 मामलों का मूल्यांकन पूरा कर चुकी थी। इसके बाद अंतिम फैसला सिया को लेना था। वहीं, सिया की बैठक नहीं हो सकी। इसी कारण इन मामलों पर औपचारिक फैसला नहीं हो पाया।
केंद्र सरकार ने इसका समाधान भी बताया है। उसके मुताबिक सभी 237 मामलों को सिया की औपचारिक बैठक में दोबारा रखा जाना चाहिए। वहीं इन पर फैसला लेना कानूनी तौर पर सही प्रक्रिया होगी।
कमेटी की जांच में खुलासा
इन 237 मामलों में अलग-अलग तरह के फैसले शामिल थे। इनमें 186 मामले ईसी के थे। साथ ही, 37 मामले टीओआर (Terms of Reference) के थे। वहीं, 10 मामले रिजेक्शन के थे। चार मामले ट्रांसफर या वैलिडिटी एक्सटेंशन के थे। चारों को जोड़ने पर आंकड़ा 237 होता है।
सबसे ज्यादा मामले ईसी के थे। इनकी हिस्सेदारी करीब 78 फीसदी रही। टीओआर वह दस्तावेज होता है, जिसमें किसी परियोजना के अध्ययन की शर्तें तय की जाती हैं। ट्रांसफर का मतलब मंजूरी को किसी दूसरे नाम पर करना है। वहीं वैलिडिटी एक्सटेंशन में मंजूरी की अवधि बढ़ाई जाती है।
एसईएसी और सिया में फर्क
यानी एसईएसी जांच कर सकती है और अपनी राय दे सकती है। वहीं, फैसला सिया को ही करना है। इसी आधार पर 237 मंजूरियां कानूनी सवालों में हैं। ऐसे में बैठक के बिना जारी मंजूरी का आधार जांच का विषय बना है।
13 अक्टूबर की सुनवाई
सिया के अध्यक्ष और सदस्य सचिव का पक्ष उपलब्ध अंश में नहीं है। उनका जवाब आने पर तस्वीर और साफ हो सकेगी। अभी की बातें केंद्र के हलफनामे और जांच कमेटी की रिपोर्ट पर आधारित हैं। आगे की स्थिति कोर्ट के आदेश और सिया की बैठक पर निर्भर करेगी।
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