237 पर्यावरण मंजूरियों पर केंद्र की जांच पूरी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी कार्रवाई

Amresh Kushwaha | Aug 10, 2026, 11:43 IST
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मध्य प्रदेश डीम्ड पर्यावरण मंजूरी घोटाला
मध्य प्रदेश डीम्ड पर्यावरण मंजूरी घोटाला

मध्य प्रदेश के 237 डीम्ड पर्यावरणीय मंजूरी घोटाले में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की जांच पूरी हो गई है। भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने मुस्तपुरा गांव में जंगल काटकर खदान बनाने की साजिश का आरोप लगाया था। कार्रवाई अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद होगी।

237 फर्जी पर्यावरण मंजूरियों पर केंद्र की जांच पूरी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी कार्रवाई

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेशमें 237पर्यावरण मंजूरियों की जांच पूरी हो गईहै।
  • यह मामला डीम्डईसी (Deemed Environmental Clearance)विवाद से जुड़ा है।
  • केंद्रीय पर्यावरणमंत्रालय की फैक्टफाइंडिंग कमेटी ने रिपोर्ट तैयार की है।
  • भोपालसांसद आलोक शर्मा ने केंद्रीय मंत्री कोपत्र लिखा है।
  • अबकार्रवाई कोर्ट के आदेश के बाद ही शुरूहोगी।

237 मंजूरियों की जांच पूरी हुई

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित डीम्ड पर्यावरणीय मंजूरी घोटाले में बड़ा अपडेट आया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है। यह जांच कुल 237 मामलों को लेकर की गई थी। कमेटी अब अपनी रिपोर्ट अंतिम रूप देने में जुटी है। हालांकि इस मामले में कार्रवाई अभी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टिकी हुई है।

भोपाल सांसद ने लगाए गंभीर आरोप

भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने राज्य के पर्यावरण विभाग के अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सांसद ने लिखा है कि भोपाल के पास मुस्तपुरा गांव में गड़बड़ी हुई है। यहां 17 एकड़ घने सरकारी जंगल को खदान बनाने की अनुमति दे दी गई थी।

जबकि कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में वहां जंगल होने की पुष्टि हो चुकी थी। सांसद के मुताबिक यह मंजूरी पूरी तरह अवैध है। इससे इस मंजूरी की वैधता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

सिया पर उठे सवाल

सांसद ने अपने पत्र में एक अहम बात लिखी है। उनके मुताबिक यह पर्यावरणीय मंजूरी उन्हीं 237 विवादित मंजूरियों में शामिल है। यह मंजूरी मध्य प्रदेश स्टेट एनवायरोमेंट इम्पैक्ट एसेसमेंट अथॉरिटी यानी सिया (SEIAA) से जुड़ी बताई जा रही है।

सांसद का आरोप है कि सही प्रक्रिया अपनाने के बजाय अफसरों ने मनमाने ढंग से यह मंजूरी दी। उन्होंने इसे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला साजिशाना कदम बताया है। सांसद ने इसे तुरंत प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है। साथ ही दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

केंद्रीय मंत्री का जवाब

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सांसद की शिकायत का जवाब दिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की जांच अंतिम चरण में है। मंत्री के मुताबिक जांच रिपोर्ट जल्द सामने आएगी। हालांकि इसके बाद भी असली कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (National Green Tribunal) के निर्देशों पर ही निर्भर करेगी। यानी जांच पूरी होने के बाद भी फैसला अदालत के हाथ में है।

पोर्टल पर दर्ज नहीं हैं मंजूरियां

इस पूरे मामले में एक और बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। पिछले साल मई में जारी हुई 237 डीम्ड पर्यावरणीय मंजूरियां यानी ईसी (Environmental Clearance) एक साल बाद भी परिवेश पोर्टल पर दर्ज नहीं हैं।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय इन मंजूरियों को वैध ईसी मानने से इनकार कर रहा है। वहीं सिया ने भी वैधानिक रूप से जारी कई अन्य प्रकरण पोर्टल पर दर्ज नहीं किए हैं। इससे मामला और उलझ गया है।

जिम्मेदारी को लेकर विवाद

इस गड़बड़ी की जिम्मेदारी सिया के मेंबर सेक्रेटरी की बताई जा रही है। चेयरमैन ने तत्कालीन मुख्य सचिव अनुराग जैन से इस बारे में शिकायत भी की थी। इसके बाद मेंबर सेक्रेटरी को बदल दिया गया था। लेकिन इसके बावजूद 237 मंजूरियों का मामला अब तक साफ नहीं हो पाया है। यह साफ करता है कि प्रशासनिक स्तर पर भी काफी लापरवाही बरती गई।

आगे क्या होगा

अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर टिकी है। केंद्रीय जांच कमेटी की रिपोर्ट फाइनल होते ही यह कोर्ट में पेश की जाएगी। इसके बाद कोर्ट के निर्देशों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी। अगर मंजूरियां अवैध साबित होती हैं तो कई अफसरों पर गाज गिर सकती है। साथ ही मुस्तपुरा जैसे इलाकों में हुए काम पर भी रोक लग सकती है। पर्यावरण से जुड़े इस मामले में आने वाले हफ्तों में बड़ा फैसला आ सकता है।

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