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News In Short
- 17-18 दिसंबर को स्लॉटर हाउस से गोमांस पकड़ा गया, और असलम कुरैशी की गिरफ्तारी 24 दिसंबर को हुई।
- पुलिस ने आरोपी की रिमांड नहीं मांगी और मामले की जांच धीमी गति से चल रही है।
- सांसद अलोक शर्मा ने पुलिस पर सवाल उठाए हैं।
- निगम के स्लॉटर हाउस समझौते में गायों का वध न करने की शर्त थी, बावजूद इसके FIR नहीं दर्ज की गई।
- स्लॉटर हाउस में सुरक्षा बढ़ाई गई, और मृत पशु उठाने का काम दरोगा और एएचओ ने संभाला।
News In Detail
भोपाल न्यूज. भले ही एमपी पुलिस 2025 को अपना उपलब्धियों से भरा सालबता कर अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है। राजधानी भोपाल में खुलेआम गोमांस का धंधा चल रहा था। ना तो इंटेलिजेंस को इसकी खबर लगी, ना ही स्थानीय पुलिस को।
गोमांस मामले का खुलासा हुए 24 दिन हो गए, लेकिन अब तक पुलिस ये नहीं पता कर पाई कि गाय कहां से आई थीं?
यह पुलिस की लापरवाही और नाकामी का एक बड़ा उदाहरण है। वो अपनी उपलब्धियों पर गर्व कर रही है, जबकि असलियत यह है कि जमीन पर कुछ और ही हो रहा है!
ये है मामला
17-18 दिसंबर की रात स्लॉटर हाउस के ट्रक से गोमांस पकड़ा गया था। जब ट्रक में गोमांस की पुष्टि हुई, तो 24 दिसंबर को स्लॉटर हाउस के मालिक असलम कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, 24 दिन गुजरने के बावजूद पुलिस यह तक नहीं पता लगा पाई कि स्लॉटर हाउस में इतनी बड़ी संख्या में गायें कहां से आ रही थीं?
पुलिस ने आरोपी की रिमांड तक नहीं मांगी
यहां तक कि पुलिस ने इस मामले में आरोपी असलम की रिमांड तक नहीं मांगी। जबकि मध्य प्रदेश गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम 2004 के तहत इस तरह के अपराध में सात साल की सजा हो सकती है।
यह ढीली जांच तब हो रही है, जब नगर निगम परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, भाजपा विधायक, मंत्री और कांग्रेस भी इस मुद्दे पर जोर-शोर से बोल रहे हैं।
निगम के अधिकारियों की सुस्त कार्रवाई
स्लॉटर हाउस के लिए नगर निगम ने पीपीपी मोड पर समझौता किया है। इस समझौते में साफ तौर पर लिखा गया है कि यहां सिर्फ भैंस, भेड़ और बकरी का वध किया जा सकता है। गाय, बछड़ा या बछिया का वध करने का कोई जिक्र नहीं है। इसके बावजूद, निगम के अधिकारियों, महापौर या कमिश्नर की तरफ से अब तक FIR दर्ज नहीं कराई गई है।
भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने क्या मांग की
मामले में भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने आरोप लगाया कि इसमें कई लोगों की मिलीभगत है, इसलिए अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर वह बहुत दुखी हैं।
उन्होंने कहा कि यह पता किया जाना चाहिए कि किस अधिकारी ने स्लॉटर हाउस का टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया और एक खास वेंडर को फायदा पहुंचाया। साथ ही, उन्होंने संभागायुक्त से लेकर नगर निगम आयुक्त तक की भूमिका की भी जांच करने की अपील की है।
पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों की मिलीभगत
भाजपा सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और वह खुद भी इसे पूरी तरह से जानने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी आरोपी बच नहीं पाएगा, चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों न हो।
आलोक शर्मा ने यह भी कहा, "जब मैं महापौर था, मैंने एक भी स्लॉटर हाउस नहीं खुलने दिया। स्लॉटर हाउस को लेकर मेरी बहस भी हुई थी और NGT भी नाराज हुआ था।"
सांसद ने कहा कि ये स्लॉटर हाउस किसी महापौर या परिसर की सहमति से नहीं खोले गए। यह सब प्रशासक के कार्यकाल में हुआ था। उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय कौन प्रशासक था और कौन अधिकारी थे, इन सबका पता किया जा रहा है।
सांसद ने यह भी कहा कि स्थानीय थाने और नगर निगम के कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना यह सब मुमकिन नहीं था।
स्लॉटर हाउस के बाहर पुलिस तैनात, सुरक्षा बढ़ी
स्लॉटर हाउस में विवाद के बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। अब यहां 24 घंटे पुलिसकर्मी तैनात हैं, जो हर आने-जाने वाले व्यक्ति से पूछताछ कर रहे हैं। स्लॉटर हाउस के बाहर बड़ी संख्या में पॉलीथिन पड़ी हुई हैं, जिनमें मांस को पैक कर बाहर भेजा जाता था।
कांग्रेस की मांग, जिम्मेदार अफसरों पर केस दर्ज हो
कांग्रेस नेता अमित शर्मा ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि असलम के भाजपा नेताओं से रिश्ते हैं और वह नेताओं और अधिकारियों को मोटी रकम देता है। शर्मा ने यह भी चेतावनी दी कि वह जल्द ही इन अधिकारियों की बैंक डिटेल्स उजागर करेंगे।
क्या कहा एडीसीपी रश्मि अग्रवाल दुबे ने?
रश्मि अग्रवाल दुबे, एडीसीपी जोन-1 ने इस मामले पर कहा कि असलम को कोर्ट के आदेश पर जेल भेजा गया था। पुलिस की जांच अभी जारी है और उन्होंने मामले पर ज्यादा जानकारी देने से मना किया।
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