बिना रेरा मंजूरी और रजिस्ट्री के भोपाल में बनी देश की पहली अवैध स्मार्ट सिटी
Amresh Kushwaha | Sept 18, 2026, 12:12 IST
भोपाल में देश की पहली अवैध स्मार्ट सिटी
भोपाल स्मार्ट सिटी की 342 एकड़ जमीन विवादों में घिर गई है। न रजिस्ट्री हुई, न विकास अनुमति ली गई और न रेरा मंजूरी ली गई। हाईकोर्ट ने कंपनी को प्रोजेक्ट प्रमोटर माना है। सरकार 4 साल से समाधान तलाश रही है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल स्मार्ट सिटी की 342 एकड़ जमीन का विवाद गहराया है।
- जमीन की न रजिस्ट्री हुई, न विकास अनुमति ली गई।
- रेरा ने प्रोजेक्ट पर 2022 में रोक लगा दी थी।
- हाईकोर्ट ने कंपनी को पूरे प्रोजेक्ट का प्रमोटर माना है।
- सरकार 4 साल से समाधान का रास्ता तलाश रही है।
क्या है पूरा विवाद
टीटी नगर की यह 342 एकड़ जमीन प्राइम नजूल भूमि है। इसे एरिया बेस्ड डेवलपमेंट यानी एबीडी (Area Based Development) के लिए चुना गया था। वहीं, स्मार्ट सिटी कंपनी ने इस जमीन का मालिकाना हक अपने नाम नहीं लिया। न ही उप-पंजीयक कार्यालय में इसका रजिस्ट्रेशन कराया गया। इसके बावजूद प्लॉट्स की बिक्री शुरू कर दी गई। यहीं से पूरी गड़बड़ी की शुरुआत हुई।
कैसे शुरू हुई गड़बड़ी
रेरा ने क्यों लगाई रोक
फंडिंग पर पड़ा असर
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
एक्सपर्ट के 4 समाधान
दूसरा सुझाव है कि सभी प्लॉटों का अलग-अलग रिकॉर्ड बनाया जाए। इसमें 98 लैंड पार्सल में से 42 बिक्री वाले प्लॉट और यूटिलिटी प्लॉट को अलग खसरा नंबर देने होंगे। तीसरा समाधान पूरे 342 एकड़ का एक साथ रेरा पंजीयन कराना है।
पूर्व उपसचिव चतुर्वेदी के मुताबिक 4-4 प्लॉट अलग से पंजीकृत कराने के बजाय पूरे एबीडी क्षेत्र का एक साथ रेरा पंजीयन जरूरी है। चौथा सुझाव पुराने विवादों के एकमुश्त निपटारे का है। प्लॉट नंबर 81-82 जैसे पुराने खरीदारों को रिफंड, ब्याज या भुगतान के लिए अतिरिक्त समय देना होगा। इससे अदालती विवाद भी खत्म हो सकेंगे।
इंदौर से तुलना
यही वजह है कि इंदौर में जमीन का मॉनेटाइजेशन चरणबद्ध तरीके से सफलतापूर्वक चल रहा है। वहीं भोपाल में मालिकाना हक, टी एंड सीपी मंजूरी और सब-डिवीजन के बिना ही नीलामी शुरू कर दी गई थी।
इसी जल्दबाजी का नतीजा है कि आज पूरा प्रोजेक्ट कानूनी विवादों में उलझा हुआ है। रेरा की रोक से इंफ्रास्ट्रक्चर का काम भी पूरी तरह रुका हुआ है। इंदौर मॉडल से तुलना करने पर भोपाल की खामियां साफ नजर आती हैं।
सरकार का पक्ष
आगे क्या होगा
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