भोपाल वेटलैंड पर NGT सख्त, छह साल की चुप्पी पर अधिकारियों को फटकार
Sandeep Kumar | Jul 22, 2026, 22:05 IST
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भोज वेटलैंड यानी बड़ा तालाब में अतिक्रमण का मामला एनजीटी में चल रहा है। यह मामला साल 2020 से लंबित है। छह साल बाद भी असली कार्रवाई नहीं हुई। एनजीटी ने इसे कानून का अनादर बताया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- भोज वेटलैंड (बड़ा तालाब) अतिक्रमण मामला 2020 से लंबित है।
- छह साल बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
- एनजीटी ने देरी पर कड़ी नाराजगी जताई।
- इसे कानून के शासन का अनादर बताया।
- निगम और कलेक्टर को सख्त निर्देश मिले।
किसने की पैरवी
एनजीटी ने क्यों लगाई फटकार
एनजीटी ने यह भी बताया कि पहले भी उच्च न्यायालयों ने इस विषय पर विचार किया था। एक उच्च स्तरीय समिति बनाकर वेटलैंड क्षेत्र की पहचान के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद आज तक वेटलैंड क्षेत्र का सही निर्धारण नहीं हो सका।
अवैध निर्माण बचाने की आशंका
छोटे अतिक्रमण हटे, बड़े बाकी
इस पर नगर निगम ने खुद माना कि वेटलैंड, निजी भूमि और कुछ सरकारी भूमि पर भी अतिक्रमण मौजूद हैं। निगम ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश लागू हैं।
निगम को याद दिलाया गया कर्तव्य
निगम को यह देखना होगा कि कौन सा निर्माण वेटलैंड नियम, 2017 के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है। एनजीटी ने कहा कि सिर्फ फैसला न लेना या कार्रवाई टालना अधिकारियों के कर्तव्य से बचने का बहाना नहीं हो सकता।
एनजीटी का अंतिम निर्देश
राज्य शासन की ओर से भी अगली सुनवाई से पहले जरूरी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। अब सबकी नजर अगली सुनवाई और निगम की कार्रवाई पर टिकी है।
FAQ
- एनजीटी ने भोपाल वेटलैंड मामले में क्या कहा?
एनजीटी ने कहा कि यह मामला छह साल से लंबित है। अधिकारियों ने अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की। इसे कानून के शासन का अनादर बताया गया। - एनजीटी ने क्या निर्देश दिए हैं?
एनजीटी ने निगम और कलेक्टर को FTL और बफर जोन के अतिक्रमण हटाने को कहा। साथ ही अगली सुनवाई से पहले प्रगति रिपोर्ट मांगी गई है।
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