चार महीने की चुप्पी के बाद हरकत में बीजेपी! अब जिलाध्यक्षों की मजबूरी में तैयारी

बीजेपी ने मोर्चा और प्रकोष्ठों के प्रदेश अध्यक्ष चार महीने पहले घोषित किए, लेकिन जिलास्तर की कार्यकारिणी अब तक अधर में लटकी है। इस देरी ने संगठन की रफ्तार धीमी कर दी।

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Ramanand Tiwari
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News in short

  • बीजेपी ने मोर्चा अध्यक्ष तो घोषित किए, लेकिन जिला कार्यकारिणी अभी तक अधूरी है।
  • संगठन में देरी के कारण पुराने और निष्क्रिय ढांचे पर काम हो रहा है।
  • बीजेपी अब चुनावी दबाव में नई टीम बनाने के प्रयास में है।
  • युवा और महिला मोर्चा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
  • नियुक्तियों में चुनावी गणित और सक्रिय नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

News in Detail

भाजपा ने मोर्चा और प्रकोष्ठों के प्रदेश अध्यक्ष तो चार महीने पहले घोषित कर दिए। लेकिन जिला स्तर की कार्यकारिणी अब तक अधर में लटकी हुई है। इस देरी ने संगठन की रफ्तार थाम दी। भविष्य में होने वाले निकाय से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनाव को मद्देनजर रखते हुए पार्टी संगठन विस्तार की पहल करती दिख रही है।

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चार महीने बीते, संगठन अब भी अधूरा

मोर्चा और प्रकोष्ठों की घोषणा को करीब चार महीने हो चुके हैं। लेकिन जमीनी ढांचे का आज तक निर्माण नहीं हो पाया।
इसका नतीजा यह रहा कि कई जिलों में संगठन पुराने और निष्क्रिय ढांचे के सहारे चलने को मजबूर रहा। प्रदेश स्तर पर अध्यक्ष घोषित होने के बावजूद जिला कार्यकारिणी लंबित रहने से संगठनात्मक फैसले अटके।

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मोर्चा-प्रकोष्ठ निष्क्रिय हुए

जमीनी गतिविधियां कमजोर पड़ीं अब पार्टी इस देरी की भरपाई की कोशिश में जुटी है। अब जिलाध्यक्षों सेराय-मशविरा
काफी विलंब के बाद जिलाध्यक्षों को सक्रिय किया गया है। विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से दावेदारों के नाम मांगे जा रहे हैं। निर्देश साफ हैं। योग्य और सक्रिय चेहरों के नाम दें, संगठन में पकड़ रखने वालों को आगे बढ़ाएं। लेकिन सवाल यह है कि यह पहल पहले क्यों नहीं हुई?

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फरवरी में दिख सकते हैं नए चेहरे

पार्टी सूत्रों का दावा है कि फरवरी में कुछ जिलों को नए मोर्चा-प्रकोष्ठ अध्यक्ष मिल सकते हैं। हालांकि, संगठन के भीतर यह चर्चा भी है कि यह प्रक्रिया देरी से लिया गया फैसला है, जो चुनावी दबाव का नतीजा है।

नियुक्तियों में अब चुनावी गणित को प्राथमिकता दी जा रही है। तलाश ऐसे नेताओं की है जो निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी के लिए काम कर सकें।

युवा मोर्चा में सख्ती, बाकी में ढिलाई?

युवा मोर्चा के लिए उम्र सीमा 40 वर्ष से अधिक नहीं तय की गई है। इन मोर्चों में नियुक्तियां भी प्रस्तावित हैं। महिला मोर्चा, एससी मोर्चा, एसटी मोर्चा, पिछड़ा वर्ग मोर्चा और किसान मोर्चा शामिल हैं।

अन्य प्रकोष्ठ पुराने पदाधिकारियों की समीक्षा

पिछली कार्यकारिणी के कामकाज का आकलन किया जा रहा है। सक्रिय नेताओं को आगे मौका दिया जाएगा, निष्क्रिय चेहरों को बाहर किया जाएगा। हकीकत यह है कि अधिकांश पुराने पदाधिकारी पहले ही खुद को कार्यकाल से बाहर मान चुके हैं।

युवा और महिला मोर्चा पर दबाव

पार्टी नेतृत्व मानता है कि चुनावी मैदान में सबसे बड़ी भूमिका युवा और महिला मोर्चा निभाते हैं। इसीलिए यहां मजबूत, सर्वमान्य, ऊर्जा से भरे नामों की तलाश की जा रही है।

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क्यों अब मजबूरी बनी नियुक्ति?

जिला अध्यक्ष को बने एक साल हो चुका है। मोर्चा-प्रकोष्ठ अध्यक्ष निष्क्रिय हो चुके हैं। संगठन में तालमेल और गति दोनों गायब हैं। इसी वजह से अब नई टीम बनाना पार्टी की मजबूरी बन गई है। बीजेपी संगठन विस्तार की बात कर रही है, लेकिन यह प्रक्रिया काफी देर से शुरू हुई है। चार महीने की देरी ने संगठन को कमजोर किया है। अब सवाल यह नहीं कि जिलाध्यक्ष कब बनेंगे, सवाल यह है कि क्या देर से बनी टीम आगामी चुनावी चुनौतियों का सामना कर पाएगी?

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