थाना परिसर की 100 करोड़ से ज्यादा की जमीन पर बीजेपी नेताओं का कब्जा

बीजेपी नेताओं ने पुलिस थाने की जमीन पर कब्जा कर लिया है। पुलिस बीजेपी के छुटभैया नेताओं भूमाफिया के आगे बेबस है। शहर की प्राइम लोकेशन होने की वजह से गोला का मंदिर थाना परिसर की जमीन की कीमत करोड़ों में है।

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Rahul Garhwal
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थाने की जमीन पर बनी बाउंड्री वॉल

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मारुतराज, BHOPAL. सत्ता का नशा सिर चढ़कर बोलता है। ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी। अब इसे चरित्रार्थ होते भी देख लीजिए, यानी इसका साक्षात प्रमाण भी देख लीजिए। मध्यप्रदेश (mp) में सत्ता बीजेपी की है तो इसका नशा भी जाहिर है जो बीजेपी के नेताओं पर चढ़ गया है। बीजेपी के इन नेताओं ने पुलिस की और वो भी पुलिस थाने की जमीन पर कब्जा कर लिया है। बाउंड्री वॉल बना ली है। हम और आप जिस पुलिस पर मदद के लिए भरोसा करते हैं। मदद मांगने जाते हैं। वही पुलिस बीजेपी के इन छुटभैया नेताओं भूमाफिया के आगे बेबस है। एक आम आदमी की तरह सीएसपी ऑफिस यानी सिटी सुप्रीडेंट ऑफ पुलिस, नगर पुलिस अधीक्षक कार्यालय, तहसीलदार, कलेक्टर के यहां आवेदन करता फिर रहा है। हम आपको बता रहे हैं कि भूमाफिया कहां के हैं और पूरा मामला क्या है।

ग्वालियर में प्राइम लोकेशन पर कब्जा

ग्वालियर (Gwalior) की प्राइम लोकशन गोला का मंदिर है। यहीं पर गोला का मंदिर थाना (Gola Ka Mandir Police Station) है। शहर की प्राइम लोकेशन होने की वजह से थाना परिसर की जमीन की कीमत करोड़ों में है। थाना कैंपस की जमीन के कुछ हिस्से पर पिछले दिनों बीजेपी नेता विष्णु जैन, पारस जैन, स्वदेश मेहरोत्रा, राजेंद्र जिझौतिया, भाग्योदय गृह निर्माण सहकारी समिति ने कब्जा कर लिया। सबसे बड़ी बात ये है कि पुलिस वाले इस कब्जे को होता देखते रहे। पुलिस बेबस थी, प्रशासन मूक बना था, बिल्कुल गांधी जी के 3 बंदरों की तरह। न कोई कुछ देख रहा था, न कोई कुछ कह रहा था और न कोई कुछ सुन रहा था।

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कैसे सामने आया पूरा मामला

हम आपको बता रहे हैं कि आखिर इस पूरे मामले का खुलासा कैसे हुआ। शहर की प्राइम लोकेशन पर थाने की जमीन पर कब्जे की खबर से शहर में सन्न खिंच गई यानी सब चौंक गए। पुलिस और प्रशासन खुद ही सरकारी जमीन पर कब्जा करा रहा था तो कोई विरोध में आगे आने को भी तैयार नहीं था। आखिर सत्ताधारी पार्टी यानी बीजेपी के नेताओं और अफसरों से एक साथ पंगा कौन ले। इस बीच आरटीआई कार्यकर्ता संकेत साहू और हरिओम शर्मा ने मामले को उठाया। कलेक्टर और अन्य जगहों पर शिकायत की। इनके द्वारा पुराने दस्तावेज निकलवाए गए। 100 करोड़ से ज्यादा की जमीन है। हरिओम शर्मा का कहना है कि गोला का मंदिर थाने की जिस जमीन पर कब्जा किया गया है, ये सर्वे नंबर 1008 की है। ये लगभग एक बीघा यानी 25 हजार स्क्वायर फीट बैठती है। इसकी कीमत आज के हिसाब से 100 करोड़ के आसपास होगी।

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मल्टी बना रहे बीजेपी नेता

हरिओम शर्मा ने अपनी शिकायत में बताया है कि कब्जे की जमीन पर बीजेपी नेता मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बना रहे हैं। प्राइम लोकेशन होने के कारण इसमें मार्केट भी निकाला जा रहा है। ये जमीन सरकारी है और आने वाले समय में इस पर सरकार अपना कब्जा वापस ले ही लेगी तो ऐसे में मार्केट और मल्टी में दुकान फ्लैट खरीदने वालों के साथ ये एक तरह से धोखाधड़ी है।

'कोर्ट में ले जाऊंगा केस'

आरटीआई कार्यकर्ता संकेत साहू का कहना है कि वे इस मामले को लेकर कोर्ट भी जाने को तैयार हैं। चरनोई जमीन व्यक्ति विशेष को ट्रांसफर नहीं हो सकती। ग्वालियर हाईकोर्ट एडवोकेट अवधेश तोमर का कहना है कि गोला का मंदिर थाने की जमीन पर कब्जे का केस उनके पास आया है। एडवोकेट तोमर का कहना है कि सरकारी दस्तावेज में गोला का मंदिर थाने की रकबा नंबर 1008 और उसके आसपास की जमीन चरनोई के रूप में दर्ज है। चरनोई की जमीन को किसी भी व्यक्ति को ट्रांसफर ही नहीं किया जा सकता।

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कलेक्टर ने दोनों पक्षों को बुलाया

कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह का कहना है कि गोला का मंदिर थाने के पास की जमीन का विवाद उनके पास आया है। उन्होंने दोनों पक्षों को बुलाया है। दस्तावेजों की जांच के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन को सब पता है, लेकिन बीजेपी नेताओं के दबाव में वे कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। अफसरों को अपनी कुर्सी की चिंता है। आखिर बीजेपी के इन नेताओं की ही तो प्रदेश में सरकार है।

आजादी से पहले की जमीन बता रहे विष्णु जैन

इस मामले में विष्णु जैन से बात की गई तो उनका कहना है कि जिस जमीन पर पुलिस अपना दावा कर रही है, वो उनके हक में 1940 यानी आजादी से भी पहले की है।

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आम आदमी को ठगी से बचाने की कवायद

बीजेपी के नेताओं द्वारा करोड़ों की जमीन पर कब्जे के मामले में जो भी फैसला हो, तब तक प्रशासन को चाहिए कि वे इस जमीन से जुड़ी सभी प्रकार की खरीद-फरोख्त पर सख्ती से रोक लगा दे, ताकि आम आदमी को ठगने से बचाया जा सके। वरना होता ये है कि बिल्डर पैसे लेकर गायब हो जाता है और आम आदमी कोर्ट कचहरी के चक्कर लगा-लगाकर अंत में हार मान लेता है। कोर्ट भी अफसरों की लापरवाही बताकर सख्त टिप्पणी कर देता है, लेकिन आम आदमी का क्या जिसके फ्लैट और दुकान खरीदने में लाखों रुपए खून पसीने की कमाई डूब जाती है। उसके सपने इन भूमाफिया के लालच में स्वाहा हो जाते हैं। इस बार भूमाफिया को ऐसा नहीं करने देंगे, द सूत्र आपके साथ है।

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