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News In Short
बीआर गोयल समूह मध्यप्रदेश के बड़े सरकारी ठेकेदारों में से एक है। इसका मुख्यालय इंदौर में है।
ग्रुप पर 11 साल पहले बड़ी कार्रवाई हो चुकी है, जिसमें करोड़ों की बेनामी संपत्ति मिली थी।
ग्रुप आईडीए, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, नेशनल हाईवे, एकेवीएन जैसी विभिन्न सरकारी एजेंसियों के लिए काम करता है।
इसका काम मुख्यतः सड़क निर्माण है। छापे से ठेके देने वाले विभागों में हलचल मच गई है।
News In Detail
INDORE. बीआरजी इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रुप की स्थापना 1986 में हुई थी। फिर यह प्राइवेट कंपनी से 2018 में पब्लिक कंपनी में तब्दील हो गया। इसमें ब्रिज किशोर गोयल चेयरमैन और एमडी हैं।
राजेंद्र गोयल, गोपाल गोयल होल टाइम डायरेक्टर, उप्पल गोयल और यश गोयल एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। इनके साथ ही मोहित भंडारी, खुशबू पाटौदी, ब्रिज मोहन माहेशवरी, रविंद्र करोडा ये नॉन-एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स हैं।
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ग्रुप के पास 1423 करोड़ के प्रोजेक्ट
ग्रुप ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि जून 2025 तक उनके पास 1423 करोड़ के प्रोजेक्ट्स के ऑर्डर थे। इन पर काम चल रहा है। ग्रुप के जरिए वित्तीय वर्ष 2025 में 515 करोड़ के राजस्व की कमाई की गई है।
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ग्रुप ने नगर निगम, आईडीए, पीडब्ल्यूडी के ये काम किए
ग्रुप ने एमपीआरडीसी भोपाल से कन्नौद रोड का 118 करोड़ का प्रोजेक्ट लिया। रीवा पीडब्ल्यूडी से 107 करोड़ का काम मिला। आईडीए इंदौर से स्कीम 136 में रोड बनाने का काम लिया। पीडब्ल्यूडी जबलपुर से बायपास का काम भी मिला।
इंदौर नगर निगम से जेएनएनयूआरएम का नैनोद प्रोजेक्ट और आईआईटी इंदौर से भी काम मिला है। साथ ही पीडब्ल्यूडी उज्जैन से जिला कोर्ट का काम भी है।
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ठेके देने वाले विभागों के अधिकारी भी लपेटे में तो नहीं
वहीं खबर यह भी है कि बीआरजी ग्रुप पर हाल ही में सर्वे हुआ था। इसके बाद इतनी बड़ी कार्रवाई की वजह हवाला नेटवर्क से मिली अहम जानकारियां हैं। हवाला नेटवर्क पर आयकर विभाग ने हाल ही में बीते दो सालों में कई दबिश दी हैं।
इसमें डायरियों पर कई बड़े लेन-देन सामने आए हैं। इसी कड़ी में बीआरजी ग्रुप का नाम भी जुड़ा है। इसकी आंच ठेके देने वाले सरकारी विभागों के अधिकारियों तक भी पहुंचने की बात हो रही है।
लंबे समय से सरकारी ठेकों में कमीशनखोरी के आरोप लगते रहे हैं। इसी राशि के ट्रांजेक्शन की बात हवाला नेटवर्क में आई है। यह भी इस छापे के पीछे एक वजह मानी जा रही है।
हालांकि आयकर विभाग ने अभी तक छापे को लेकर औपचारिक जानकारी नहीं दी है। कार्रवाई अभी भी कई ठिकानों पर एक साथ जारी है।
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ग्रुप पर 2014 में भी हुआ था बड़ा छापा
बीआरजी पर यह पहली कार्रवाई नहीं है। साल 2014 में आयकर विभाग ने इंदौर के सभी बड़े ठेकेदारों पर एक साथ छापा मारा था। इसमें बीआरजी के साथ ही पाथ ग्रुप और अन्य थे। इसमें 135 करोड़ रुपए से ज्यादा की अघोषित आय घोषित हुई थी। इसमें एक बड़ी राशि बीआरजी ने भी सरेंडर की थी।
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