BRTS पर एलिवेटेड कॉरिडोर की तैयारी, उधर लग गई याचिका, दो सर्वे में नहीं मिली थी यूटिलिटी
Sanjay Gupta | Jan 29, 2026, 15:22 IST
brts railing delayed indore elevated corridor court
इंदौर हाईकोर्ट में बीआरटीएस रेलिंग हटाने में देरी को लेकर शासन और प्रशासन घिर गए हैं। इस देरी की वजह 350 करोड़ के एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट को बताया जा रहा है। इस मुद्दे पर हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई है।
INDORE. एमपी हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ में बीआरटीएस रेलिंग नहीं हटाने को लेकर शासन, प्रशासन घिरा हुआ है। इसमें काम में देरी के लिए वजह पीडब्ल्यूडी ने प्रस्तावित 6.1 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बताया है। इसी को लेकर गुरुवार, 29 जनवरी को जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की बड़ी बैठक भी हो रही है। इसी को लेकर एक याचिका भी हाईकोर्ट में दायर हो गई है। साथ ही, मामला फंस गया है।
यह याचिका अतुल सेठ ने लगाई है। इसमें सवाल उठा गया है कि इस कॉरिडोर को लेकर दो सर्वे पहले हुए थे। इस सर्वे में इस कॉरिडोर की यूटिलिटी ही साबित नहीं हुई है। एक सर्वे में 15 फीसदी की उपयोगी पाया गया, तो दूसरे सर्वे में भी संतोषजनक स्थिति नहीं थी। ऐसे में इस मामले में 350 करोड़ रुपए खर्च करने का क्या तुक है। वहीं इसके निर्माण के चलते इंदौर की सबसे व्यस्त एबी रोड पर कम से कम दो साल तक जनजीवन अस्त व्यस्त रहेगा।
अतुल सेठ ने सवाल उठाए हैं कि सरकार के पीएस नीरज मंडलोई ने ही साल 2022-23 में इसे निरस्त करने की अनुशंसा की थी। इस दौरान ठेकेदार कंपनी के 30 करोड़ रुपए मुआवजे पर कानूनी सलाह की बात भी उठी थी। वहीं इसमें कराए गए सर्वे जो एक निजी कॉलेज से हुआ था केवल 15 फीसदी उपयोगी पाया गया था। तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने दूसरा सर्वे कराया, इसमें भी खास उपयोगी नहीं पाया गया है।
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यह बात भी याचिका में उठाई गई है कि कई सर्वे में यह पाया गया कि लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाना बेहतर नहीं है। इसकी जगह अलग-अलग चौराहों पर फ्लाईओवर बनाना अधिक उपयोगी है।
एलआईजी से नवलखा तक हर थोड़ी दूर में एक चौराहा है। इसमें ट्रैफिक बंट जाता है। एलआईजी से नवलखा तक सीधे जाने वाले वाहन चालक बहुत कम संख्या में हैं। अधिकांश ट्रैफिक इंडस्ट्री हाउस तिराहा, पलासिया, गीताभवन, शिवाजी वाटिका चौराहे पर ही कट जाता है।
बीआरटीएस की रेलिंग हटाने में देरी को लेकर अधिकारी लगातार हाईकोर्ट की फटकार झेल रहे हैं। अधिकारियों ने इस देरी की वजह कॉरिडोर को बताया है। कहा गया कि इसे सीएम दिसंबर में मंजूर कर चुके हैं। काम का भूमिपूजन भी हो चुका है और फरवरी से इसका काम शुरू कर रहे हैं। इसलिए पूरे कॉरिडोर में इस हिस्से को छोड़कर बाकी बचे 3.1 किमी हिस्से में हम रैलिंग हटा देते हैं।
यह कॉरिडोर साल 2019 से कांग्रेस सरकार के समय से चल रहा है। तब इसे मंजूर किया गया था। बाद में बीजेपी सरकार आने पर इसकी डिजाइन व अन्य मुद्दे को लेकर मामला उलझा रहा। वहीं, मोहन सरकार के समय फिर इस पर काम की बात हुई। अब जब हाईकोर्ट में केस हुआ तो इस कॉरिडोर का मुद्दा फिर सुर्खियों मे आ गया।
वहीं चिंता आमजन की है। दरअसल इसके पैरेलल दो और रोड है। एबी रोड पर काम चलने के बाद ट्रैफिक रिंग रोड पर शिफ्ट होगा। यहां पहले ही मेट्रो का और ब्रिज का काम चल रहा है। इससे ट्रैफिक की हालत बेहाल है। वहीं फिर बायपास की ओर जाओ तो यहां भी फ्लाईओवर के काम के चलते लंबे जाम आते हैं, छोटे बोगदे से वाहन फंसते हैं। फिर शहर में आने-जाने के लिए भी यह दूर पड़ता है। ऐसे में इस कॉरिडोर को लेकर वैसे ही चिंता है।
यह प्रोजेक्ट 350 करोड़ का है। इसमें तीन अहम चौराहों शिवाजी प्रतिमा, गीताभवन व पलासिया पर भुजाएं प्रस्तवित की गई है। इससे वाहन चालक डायवर्ट हो सकें। ब्रिज पर रोटरी भी प्रस्तावित है। दिसंबर में सीएम ने इसकी घोषणा की थी। गुजरात की कंपनी को इसका ठेका दिया गया है। हाईकोर्ट में अधिकारी इस पर फरवरी में काम शुरू होने की बात कह चुके हैं।
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यह लगी है याचिका, यह उठे सवाल
सरकार ने ही पूर्व में निरस्त किया था
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अलग-अलग ब्रिज बनाना अधिक उपयोगी
एलआईजी से नवलखा तक हर थोड़ी दूर में एक चौराहा है। इसमें ट्रैफिक बंट जाता है। एलआईजी से नवलखा तक सीधे जाने वाले वाहन चालक बहुत कम संख्या में हैं। अधिकांश ट्रैफिक इंडस्ट्री हाउस तिराहा, पलासिया, गीताभवन, शिवाजी वाटिका चौराहे पर ही कट जाता है।
रेलिंग मामले से बचने के लिए उठा कॉरिडोर मुददा
कांग्रेस सरकार से चल रहा मामला
पैरेलल रोड ही खत्म हो जाएगी
350 करोड़ का यह है प्रोजेक्ट
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